चंडीगढ़, 30 सितंबर । यूटी चंडीगढ़ के बिजली कर्मचारी चंडीगढ़ प्रशासन तथा सीपी डी एल मैनेजमेंट के खिलाफ पुनः सड़कों पर उतरकर चरणबद्ध तरीके से धरना-प्रदर्शन करेंगे । पहले चरण मे लड़ीवार रैलियां व धरना प्रदर्शन करने तथा 19 अक्टूबर को सेक्टर 17 स्थित बिजली कार्यालय के सामने विशाल धरना देने का ऐलान किया गया है । जिसका फैसला यूनियन की कार्यकारिणी की यूनियन के प्रधान अमरीक सिंह की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में लिया गया । मीटिंग में लम्बी विचार चर्चा के बाद चंडीगढ़ प्रशासन तथा सीपीडीएल मैनेजमेंट की तीखी निंदा करते हुए आरोप लगाया कि एक तरफ चंडीगढ़ प्रशासन ने गैरकानूनी तौर पर एकतरफा व मनमानी पूर्ण तरीके से सरकारी कर्मचारियों को उनकी मर्जी के बिना वस्तु समझकर निजी कंपनी को बेच दिया तथा अपना पल्ला झाड़ लिया, व कर्मचारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया । दूसरी तरफ कंपनी इन कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है तथा कर्मचारियों की समस्याओं व परेशानियों को हल करने की बजाय टरकाऊ रवैया अपना रही है| कर्मचारियों के काम की प्रकृति भी पूरी तरह बदली जा रही है, तथा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है ।
यूनियन की मीटिंग में इस बात पर गहरी चिंता व रोष व्यक्त किया कि कर्मचारियों को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने के लिए कुछ खास विभाग से रिटायर्ड अधिकारियों को आगे किया जा रहा है, ऐसा लग रहा है कि उन्हें सिर्फ कर्मचारियों को तंग व परेशान करने के लिए ही कम्पनी में रखा गया है। जो अधिकारी पहले विभाग में रहकर विभाग की हालत खराब करने के जिम्मेदार हैं, आज वह अपनी नकारात्मक कार्यप्रणाली से जहाँ कर्मचारियों को तंग कर रहे हैं, दूसरी तरफ कम्पनी का भी लगातार नुकसान कर रहे हैं।
मीटिंग में इस बात पर भी हैरानी जताई कि 21 जुलाई को सीपीडीएल मैनेजमेंट से मांगों पर चर्चा हुई थी तथा उन्हें लागू करने के भरोसे के बाद 22 जुलाई का धरना स्थगित किया था लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी सभी मांगें ज्यों की त्यों लम्बित हैं। रेगुलर कर्मचारियों की प्रमोशन करने से प्रशासन ने अपना पल्ला झाड़ लिया था, जिस कारण फ़रवरी 2025 में खाली हुई पोस्टों पर अभी भी प्रमोशन नहीं हुई। कांट्रेक्ट कर्मचारियों को अपने रोल में लेने के वादे से भी कम्पनी मुकर चुकी है तथा यूपीएससी लेवल की परीक्षा की बात कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने की फ़िराक में है। यहाँ तक कि डीसी रेट में 2% अतिरिक्त बढ़ोतरी भी 3 महीने से नहीं की जा रही। प्रशासन व कम्पनी द्वारा समयबद्ध प्रमोशन, पे-स्केल तथा मेडिकल फैसिलिटी पर भी प्रशासन व कम्पनी मोंन हैं।
रिटायर कर्मचारियों के वकाया देने में भी दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। कोर्ट में केस पैंडिंग होते हुए भी अपार न भरने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकालने व तरक्की रोकने तक की धमकी दी जा रही है। मीटिंग में सभी कमचारियों से सभी रैलियों में शामिल होने तथा 19 अक्टूबर को दिए जा रहे धरेन में भारी गिनती में भाग लेने की अपील की गई । मिटिंग में विशेष तौर पर प्रशासक महोदय को कर्मचारियों के हित में दखल देने की भी मांग की गई तथा कम्पनी के शीर्ष नेतृत्व को भी मामले पर संज्ञान लेने की अपील की।
यह जानकारी जारी एक विज्ञप्ति में महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने दी।
बिजली कर्मचारी पुन संघर्ष की राह पर: 19 अक्टूबर को सीपीडीएल के खिलाफ होगा धरना व प्रदर्शन
