चंडीगढ़,17 सितंबर। फैडरेशन ऑफ यूटी ईम्पलाइज एंड वर्कर्स चंडीगढ़ ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष अपना विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए देशभर केन्द्रीय कर्मचारियों, राज्य सरकारी कर्मचारियों, तथा यूटी चंडीगढ़ के कर्मचारियों, शिक्षकों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मियों के वेतन, भत्तों तथा सेवा शर्तों से जुड़ी प्रमुख मांगों को मजबूती से रखा है। फैडरेशन का कहना है कि केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें प्रत्यक्ष रूप से केन्द्रीय कर्मचारियों तथा यूटी कर्मचारियों पर ही लागू होती है, किंतु देश के अधिकांश राज्यों में वेतन पुनरीक्षण एवं सेवा लाभों का आधार केंद्रीय वेतन आयोग ही बनता है।
महासंघ के अध्यक्ष गोपाल दत्त जोशी, प्रधान राजेन्द्र कटोच ने बताया कि महासंघ द्वारा आयोग को प्रस्तुत ज्ञापन में कहा गया है कि सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद से खाद्य मुद्रास्फीति में औसतन 6 से 8 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
शिक्षा पर होने वाले व्यय में 10 से 12 प्रतिशत,स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च लगभग 12 से 18 प्रतिशत तथा शहरी एवं अर्ध – शहरी क्षेत्रों में आवास संबंधी खर्च में लगभग 8 से 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से भारी वृद्धि हुई है, जबकि वर्तमान वेतन संरचना कर्मियों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं बढ़ी है। महासंघ का मत है कि वर्तमान न्यूनतम वेतन ₹18,000 कर्मचारियों और उनके परिवारों के सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें 50 प्रतिशत डीए जोड़ दे तो 27 हजार बनता है,जो प्रयाप्त नहीं है। जबकि एक परिवार का वास्तविक मासिक खर्च 30 से 40 हजार रुपए बैठता है।
महासंघ ने आठवें वेतन आयोग से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की हैं:-
आठवें वेतन आयोग में कम से कम 3.8 का फिटमेंट फैक्टर निर्धारित किया जाए।
वार्षिक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) की दर को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया जाए।
वेतन मैट्रिक्स में सुधार करते हुए कर्मचारियों के लिए 5 से 7 वर्ष के अंतराल पर समयबद्ध वित्तीय उन्नयन की व्यवस्था लागू की जाए।
न्यूनतम एवं अधिकतम वेतन के बीच अनुपात को वर्तमान 1:14 के स्थान पर 1:10 रखा जाए।
वर्तमान 10 वर्षीय व्यवस्था समाप्त कर प्रत्येक 5 वर्ष में वेतन पुनरीक्षण किया जाए।
महासंघ के महासचिव हरकेश चंद ने कहा कि ज्ञापन में केरल में प्रचलित ‘मास्टर स्केल प्रणाली’ जैसी व्यवस्था अपनाकर वेतन असमानताओं को समाप्त करने की अनुशंसा की गई है। उन्होंने बताया कि महासंघ ने 24 प्रष्ठीय अपने ज्ञापन में यह भी कहा है कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर होने वाला कुल व्यय देश के सकल घरेलू उत्पाद का केवल 2 से 3 प्रतिशत है। इसलिए वेतन वृद्धि को राजकोषीय बोझ के बजाय आर्थिक विकास, उपभोग वृद्धि और राजस्व संवर्धन का माध्यम माना जाना चाहिए।महासंघ ने विश्वास व्यक्त किया है कि आठवां केंद्रीय वेतन आयोग कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों की न्यायसंगत अपेक्षाओं पर सकारात्मक विचार करते हुए ऐसी सिफारिशें करेगा जो सम्मानजनक जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा, समानता और बेहतर प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करें। यह जानकारी जारी एक विज्ञप्ति में महासचिव हरकेश चंद ने दी।
