चंडीगढ़, 14 दिसम्बर। हरियाणा के विधायक लीला राम ने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत टीबी रोगियों के लिए पोषण किट प्रदान की जाती है। टीबी रोगियों की सहायतार्थ निक्षय मित्र भी बनाए जा रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति या युवा निक्षय मित्र बनना चाहता है तो वह रैडक्रॉस कार्यालय में जरूर संपर्क करें। रेडक्रॉस के साथ-साथ सामाजिक संस्थाएं भी इस कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। सभी के सहयोग से प्रधानमंत्री का टीबी मुक्त अभियान काफी तेज गति से आगे बढ़ेगा।
विधायक लीला राम वीरवार को कैथल स्थित रेडक्रॉस कार्यालय में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत टीबी रोगियों को किट वितरित करने उपरांत बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अच्छा खान-पान नहीं करने वालों को टीबी ज्यादा होती है, क्योंकि कमजोर इम्यूनिटी से उनका शरीर बैक्टीरिया का वार नहीं झेल पाता । जब कम जगह में ज्यादा लोग रहते है, तब भी इन्फेक्शन तेजी से फैलता है। अंधेरी और सीलन भरी जगहों पर भी टीबी ज्यादा होती है, क्यूंकि टीबी का बैक्टीरिया अंधेरे में पनपता है। उन्होंने कहा कि सभी का स्वास्थ्य सही रहे और खान-पान भी हमें सही रखना चाहिए। यदि किसी को भी स्वास्थ्य से संबंधित कोई परेशानी है तो वह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में अपनी स्वास्थ्य जांच करवा सकता है।
सीटीएम गुरविंद्र सिंह ने कहा कि इस अभियान से जुड़ने के लिए निक्षय मित्र बनाए जा रहे हैं, ताकि टीबी से ग्रस्त व्यक्तियों की मदद हो सके। जिला कैथल टीबी से मुक्ति की ओर अग्रसर है। टीबी हारेगा-देश जीतेगा। टीबी के लक्षण आएं-तुरंत डॉक्टर के पास जाएं । उन्होंने कहा कि टीबी रोग प्रमुख लक्षणों में दो हफ्ते से अधिक खांसी, बुखार आना, रात में पसीना आना, भूख न लगना और वजन घटना आदि शामिल हैं। आधुनिक जांच और इलाज की सुविधा सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में मुफ्त उपलब्ध है। अधूरे उपचार से ड्रग रेजिस्टेंट टीबी हो सकती है।
सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने कहा कि हमें बीमारी से घृणा करनी चाहिए न कि बीमार से । बीमारी चाहे कोई भी हो ,बीमार व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत रहना चाहिए । जिला रेडक्रॉस सचिव रामजी लाल ने कहा कि धूम्रपान करने वालों को टीबी का खतरा ज्यादा होता है । डायबिटीज के मरीजों, स्टेरॉयड लेने वालों और एचआईवी मरीजों को भी खतरा ज्यादा । कुल मिलाकर उन लोगों को खतरा सबसे ज्यादा होता है, जिनकी इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इस अभियान के तहत लोगों को प्रतिमाह डाइट राशन, घर – घर जाकर लोगों को दवाइयां व जरूरतों को पूरा किया जा रहा है ।
