चण्डीगढ़ बिजली विभाग जीकरणः कांग्रेस प्रतिनिधि मण्डल ने प्रशासक को ज्ञापन सौंपा

चण्डीगढ़ बिजली विभाग जीकरणः कांग्रेस प्रतिनिधि मण्डल ने प्रशासक को ज्ञापन सौंपा
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चण्डीगढ़, 22 दिसम्बर। चण्डीगढ़ कांग्रेस के मुख्य सुभाष चावला, चुनावों हेतु समनव्यक अभिषेक दत्त व डीडी जिन्दल, विनोद शर्मा, हरफूल चन्द्र कल्याण, राजश शर्मा , राजीव शर्मा तथा नगर निगम के सभी वार्डों के प्रत्याशियों के साथ कांग्रेस के एक प्रतिनिधि मण्डल ने आज बुद्धवार को पंजाब के राज्यपाल व केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासक को एक ज्ञापन सौंपा।
इस ज्ञापन में कांग्रेस ने प्रशासन के यूटी बिजली विभाग के निजीकरण के निर्णय का विरोध किया। इस ज्ञापन में मांग की गई है कि सार्वजनिक एवं राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने हेतु चण्डीगढ़ में बिजली वितरण के कार्य के साथ-साथ बिजली विभाग की सभी संपत्तियां किसी निजी कपनी को हस्तांत्रित करने का निर्णय हर हालत में रद्द किया जाना चाहिए ।
इस मामले में किसी बड़े कथित घोटाले की आशंका प्रकट करते हुए कांग्रेस ने इस मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की, ताकि इस सौदे के सभी छिपे हुए पहलू उजागर हो सकें।
इस अवसर पर बोलते हुए सुभाष चावला ने कहा कि चुनाव अभियान की प्रक्रिया के दौरान पार्टी प्रत्याशियों ने चण्डीगढ़ के निवासियों से बहुत सी बातें मालूम हुईं हैं। उन्होंने कहा कि नगर निवासियों को यही आशंका है कि मोदी सरकार ने मुनाफ़ा कमाने वाला एक अन्य उद्दम बेच रही है। आगे की जांच में, कुछ ऐसे स्पष्ट खुलासे हुए कि सरकार मनमाने ढंग से सार्वजनिक कंपनियों के निजीकरण के लिए एक असंगत नीति का पालन कर रही है ताकि एक अमीर कॉर्पाेरेट को लाभ हो सके। चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण का निजीकरण करने और बिजली विभाग की हजारों करोड़ की संपत्ति निजी खिलाड़ियों को हस्तांत्रित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, बिजली विभाग को स्थानांतत्रित करने के कदम का उद्देश्य भाजपा के साथियों को अप्रत्याशित लाभ सुनिश्चित करना है ।चंडीगढ़ बिजली विभाग को बेचने का निर्णय निस्संदेह जनहित के खिलाफ है और इसमें उच्च स्तर के भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
चण्डीगढ़ बिजली विभाग लगातार मुनाफे में चल रहा है, पिछले साल इसका राजस्व 365.11 करोड़ रुपए के मुनाफ़े का रहा है, ऐसा तब है जब इसकी बिजली दर देश में सबसे कम है। सुभाष चावला ने कहा कि चंडीगढ़ बिजली विभाग ने सर्वश्रेष्ठ उपयोगिता पुरस्कार जीता है, जो पिछले पांच वर्षों से लगातार संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) द्वारा दिया गया देश में एक प्रदर्शन पुरस्कार है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार की ओर से हजारों करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति सहित विभाग की संपत्ति के साथ-साथ वितरण नेटवर्क को एक निजी कंपनी को हस्तांत्रित करना अन्यायपूर्ण और अनुचित होगा।
निजीकरण के बाद, चंडीगढ़ में बिजली की दरों में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है। वर्तमान में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहली 150 युनिटों के लिए 2.5 रुपये का शुल्क लिया जा रहा है। अगली 250 यूनिटों तक और 4.5 रुपए तथा उसके आगे 5.20 रुपए प्रति युनिट। जब निजी कंपनी बिजली वितरण का काम संभालेगी, तब यह प्रति यूनिट दर 10 रुपये या उससे भी अधिक तक जाने की संभावना है।
मोदी सरकार का करदाताओं के पैसे से मुनाफा कमाने वाले सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने/हस्तांतरित करने का फैसला न केवल जन-विरोधी है, बल्कि राष्ट्रीय और जनहित के भी खिलाफ है. प्रशासन की इस हरकत से चंडीगढ़ की जनता और चंडीगढ़ बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ अन्याय होगा।
सुभाष चावला ने कहा कि चंडीगढ़ कांग्रेस ने इस संदिग्ध फैसले के सभी पहलुओं की सीबीआई जांच की मांग की है।

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