कपूरथला, 20 दिसंबर। अपनी सेवाएं रेगुलर करवाने के लिए राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मियों का संघर्ष लगातार जारी है। आए दिन मुलाजिम भिन्न-भिन्न तरीकों से राज्य सरकार के प्रति अपना रोष व्यक्त कर रहे हैं। राज्य के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने का जिम्मा जिनके कंधों पर है, वह स्वयं आर्थिक एवं मानसिक शोषण का शिकार है. क्योंकि कम वेतन के कारण यह मुलाजिम अपने परिवार के सदस्यों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। स्वास्थ्य एवं शिक्षा किसी भी राज्य की संपन्नता को प्रदर्शित करता है। आधारभूत विभाग होते हुए भी पंजाब में स्वास्थ्य विभाग के यह मुलाजिम सरकार की मुलाजिम विरोधी नीतियों के कारण लगभग 10-15 सालों से शोषण का शिकार हैं। यह मुलाजिम विभाग में पूरी तरह पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के तहत भर्ती हुए हैं और सभी तरह की शैक्षणिक योग्यता पूरी करते हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधीन आयुष, डेंटल, स्पेशलिस्ट आदि मिलाकर लगभग 900 डॉक्टर, 1360 नर्स कर्मचारी, लगभग 2000 एएनएम कर्मचारी व इनके अतिरिक्त अन्य पैरामेडिकल एवं तकनीकी मुलाजिम काम कर रहे हैं। राज्य के लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा पूरी तरह इन मुलाजिमों के कंधों पर है, परंतु ना तो पे कमीशन और ना ही लेबर कमिशन इन मुलाजिमों की जिम्मेदारी लेने को तैयार है, क्योंकि यह दो ही ऐसी इकाइयां है जो कि किसी भी मुलाजिम की तनख्वाह निश्चित करती हैं। ऐसी स्थिति में धरने प्रदर्शनों का रास्ता अपनाने की बजाय मुलाजिमों के पास और कोई विकल्प नहीं है।
इस विषय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कोर कमेटी के प्रधान डॉ इंद्रजीत सिंह राणा से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री सदा ही खजाना खाली होने का हवाला देते हैं। राज्य का विकास क्या मुलाजिमों के विकास से भिन्न मुद्दा है? वह पिछले 5 वर्षों से राज्य के वित्त मंत्री हैं और अभी भी राज्य का खजाना खाली है तो उन्हें अपनी सीट पर बने रहने का कोई हक नहीं है। अपनी इसी आवाज को उन तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मुलाजिमों ने कल मंगलवार को जिला बठिंडा में विशाल रैली करने का फैसला किया है। मुलाजिमों का कहना है कि उनकी यह आवाज आने वाले समय में राज्य की जनता की आवाज बनेगी जिसका हर्जाना वित्त मंत्री को आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मियों का संघर्ष लगातार जारी
