आजादी के बाद ऐसे लोग सत्ता के सूत्रधार बने जिन्हें भारतीयता से परहेज था: डॉ. चौहान

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कुरुक्षेत्र, 14 दिसंबर। हरियाणवी सांगों में हरियाणा की लोक संस्कृति बसती है। यह हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। पूर्णचंद शर्मा लिखित पुस्तक ‘हरियाणवी सांग: एक परिशीलन’ हरियाणवी लोकसंस्कृति का लिखित दस्तावेज है। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान आयोजित एक संगोष्ठी और पुस्तक विमोचन के दौरान अपने अध्यक्षीय संबोधन में की। विचार गोष्ठी का आयोजन हरियाणा ग्रंथ अकादमी एवं पूर्व छात्र परिषद, विद्या भारती के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था जिसका विषय था ‘हरियाणवी सांग परंपरा एवं गीता का ज्ञान’।
डॉ. वीरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को जब हमने फिरंगियों को यूनियन जैक उतार कर आधी रात को तिरंगी पताका को फहरा दिया, उसी समय से अपनी जड़ों से जुड़ने का क्रम शुरू हो जाना चाहिए था। स्वदेशी चीजों को नए सिरे से सजा कर प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद जो सत्ता के सूत्रधार बने उन्हें भारतीयता से ही परहेज था। खुद को ‘एक्सीडेंटल हिंदू’ बताने वाले पंडित नेहरू करते भी तो कैसे? भारतीयता की बात कैसे करेगा। उन्होंने कहा कि गीता जयंती महोत्सव भारतीय परंपरा का ही महोत्सव है। भगवत गीता को वैश्विक पटल पर ले जाने का संकल्प लिया गया था। यह पर्व विश्व के अलग-अलग स्थानों पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रयासों से शुरू हुआ है। सरकार ने गीता को गांव-गांव और घर-घर में ले जाने की योजना तैयार की है।
मुख्य वक्ता पूर्णचंद शर्मा ने कहा कि गीता में आत्मा की अमरता पर प्रकाश डाला गया है। पंडित मांगेराम ने गीता के ज्ञान को आत्मसात किया था। पंडित हरिपाल गौड़ की भी गीता में अटूट रही है। हरियाणा के प्रख्यात सांगी रामकृष्ण व्यास ने भी गीता को सर्वश्रेष्ठ ज्ञान माना है।
प्राचार्य रामवीर सिंह ने कहा कि सांग हरियाणा की नाट्य परंपरा का सिरमौर है। सॉन्ग में लोक कथाओं का मंचन किया जाता है। कार्यक्रम में उपस्थित पंकज शर्मा ने कहा कि भारत को जानो नहीं, उसे मानो। चांद के माध्यम से गीता को समझाया जाए तो आमजन की समझ में अच्छी तरह आ सकती है।
इस अवसर पर पुस्तक ‘हरियाणवी सांग : एक परिशीलन’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन थे। हिंदी विभाग, म. द. वि., रोहतक के पूर्व प्रोफेसर डॉ. पूर्णचंद शर्मा ने मुख्य वक्ता के तौर पर अपना उद्बोधन किया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर हरियाणा कला परिषद के अतिरिक्त निदेशक नागेंद्र शर्मा, श्रीमद्भागवत गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुरुक्षेत्र के प्रधानाचार्य अनिल कुलश्रेष्ठ, पूर्व छात्र परिषद विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज शर्मा और ब्रह्मशक्ति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, थाना कलां के प्रधानाचार्य रामबीर सिंह ने कार्यक्रम में भाग लिया।
श्रीमद्भगवदगीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कुरुक्षेत्र के छात्रों द्वारा हरियाणवी गीत की प्रस्तुति की गई।

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