अपनी ज्ञान परंपरा और ग्रंथों से दूर हो रही युवा पीढ़ी: डॉ.चौहान

अपनी ज्ञान परंपरा और ग्रंथों से दूर हो रही युवा पीढ़ी: डॉ.चौहान
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कुरुक्षेत्र, 10 दिसंबर। आज की युवा पीढ़ी अपनी ज्ञान परंपरा, अपने महापुरुषों और अपने ग्रंथों से दूर होती जा रही है। संकट समाज के भीतर है। यह चिंताजनक स्थिति है, लेकिन हमें इस संकट से उबरना होगा। उपरोक्त टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने गीता जयंती महोत्सव में आयोजित एक विचार गोष्ठी के दौरान की। इस विचार गोष्ठी का विषय था ‘स्वतंत्रता संग्राम और गीता’। विचार गोष्ठी हरियाणा ग्रंथ अकादमी एवं कुरुक्षेत्र स्थित सामाजिक संस्था ‘प्रेरणा’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी।
डॉ चौहान ने कहा कि आज की नई पीढ़ी को यह भी नहीं पता कि भगवद गीता और भागवत में क्या अंतर है। उन्होंने एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि एक कार्यक्रम के दौरान जब यह सवाल पूछा गया तो जवाब में सिर्फ तीन चार हाथ ही उठे। उन्होंने कहा कि विवाह समारोह संपन्न कराने वाले पंडित भी मंत्रों का सही उच्चारण नहीं कर पाते। यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि भटकाव को छोड़कर हमें वापसी की तरफ बढ़ने का सिलसिला यहीं से शुरू करना है। हमें ज्ञान परंपरा की छूटी हुई डोर को फिर से पकड़ना होगा।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि गीता जयंती महोत्सव यह संकल्प लेने का एक अच्छा अवसर है। अपनी मूल परंपराओं की ओर वापस लौटने का काम सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं हो सकता। आज हम इस पर गर्व कर सकते हैं कि हमें ऐसा नेतृत्व मिला है जो अपनी विदेश यात्रा के दौरान भारत की गुलामी के प्रतीकों को स्मृति चिन्ह के रूप में नहीं देता। आज के प्रधानमंत्री के हाथ में भगवद गीता है। उनके मुख पर भगवान श्री राम और महर्षि वाल्मीकि हैं। वह महर्षि वेदव्यास के साथ खुद को जोड़ कर गर्व का अनुभव करते हैं।
डॉ. चौहान ने कहा कि केवल प्रधानमंत्री के भरोसे नहीं बैठा जा सकता, क्योंकि खतरे बड़े हैं और हम काफी पीछे छूट चुके हैं। भगवत गीता जयंती महोत्सव पर हम सब यहां से यही संकल्प लेकर जाएं।
इस अवसर पर ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस महोत्सव के दौरान संस्थान द्वारा लगाए गए पुस्तक मंडप में सिर्फ पुस्तकों को देखने और खरीदने का ही काम नहीं होगा बल्कि उन्हें पढ़ने और उस पर मंथन का काम भी किया जाएगा। महोत्सव के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर भी चर्चा होगी। डॉ. चौहान ने उपस्थित लोगों से समय निकालकर इन कार्यक्रमों में अपने मित्रों एवं संबंधियों को भी साथ लाने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए साहित्यिक क्रिकेट और कबड्डी जैसे ब्लू का भी कार्यक्रम तैयार किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि समस्याओं के समाधान के सूत्र यहीं से निकलेंगे।
इस विचार गोष्ठी के मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. हुकुम सिंह थे और मुख्य वक्ता शिक्षा संस्कृति संस्थान कुरुक्षेत्र के निदेशक डॉ. हिम्मत सिंह जी सिन्हा थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कुरुक्षेत्र के जिला कार्यवाह हरीश शर्मा ने विचार गोष्ठी में बतौर विशिष्ट अतिथि भाग लिया। प्रेरणा संस्था कुरुक्षेत्र के संचालक डॉ. जयभगवान सिंगला एवं अध्यक्षा रेणु खुग्गर के अलावा अन्य कई गणमान्य लोग इस विचार गोष्ठी में मौजूद रहे। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र संस्कृत वेद विद्यालय के छात्रों द्वारा स्वस्ति पाठ किया गया।

स्वतंत्रता सेनानियों को भगवत गीता से मिली प्रेरणा: डॉ. सिन्हा

‘स्वाधीनता संग्राम और भगवद्गीता’ विषय पर अपने सारगर्भित उद्बोधन में डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा ने कहा कि भगवद्गीता में दिए गए न्याय और सत्य के लिए मर मिटने के संदेश को अपने जीवन में उतार कर लाखों भारतीय अंग्रेजों के खिलाफ़ स्वाधीनता संग्राम में उतरे। क्रान्तिकारी हाथों में भगवत गीता लेकर फाँसी के फंदे पर हसते हसते झूल गए थे। उन्होंने कहा कि महर्षि अरविन्द से लेकर गीता रहस्य के रचयिता बाल गंगाधर तिलक और विश्व में भारतीय संस्कृति का डंका बजाने वाले स्वामी विवेकानंद ने भगवद गीता को भारतीय पुनर्जागरण का आधार बनाया।
श्रीमद्भगवद्गीता कायरता छोड़कर युद्ध छेड़ने की बात करती है। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता का संग्राम शुरू करने से पहले हर प्रकार की कायरता को छोड़ना आवश्यक था जिसका अधिष्ठान लाखों स्वाधीनता सेनानियों ने भगवद्गीता में सहज भाव से तलाश किया।

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