कोविड-19 और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए वन एवं पर्यावरण संरक्षण आवश्यक: राज्यपाल

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चण्डीगढ, 03 दिसम्बर। हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने हरियाणा सरकार द्वारा वन, वन्य प्राणी एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए वन एवं पर्यावरण संरक्षण बहुत आवश्यक है।
दत्तात्रेय आज पंचकूला के मोरनी स्थित नेचर कैंप थापली में वन विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने नेचर कैंप थापली का भ्रमण किया। इस अवसर पर उनके साथ उनकी धर्मपत्नी वसंता बंडारू और उनके संबंधी श्री बी. जर्नादन रेड्डी और उपायुक्त श्री महावीर कौशिक भी उपस्थित थे।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए दत्तात्रेय ने कहा कि हरियाणा मे वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है लेकिन इस दिशा में और अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा वन, वन्य प्राणी और पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिये ताकि इस दिशा मे बेहतर परिणाम सामने आएं।
दत्तात्रेय ने कहा कि वन विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2021-22 में प्रदेश में 3 करोड़ पौधे लगाने का लक्षय निर्धारित किया गया है जिनमें से अब तक 2 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं जो कि एक सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि पौधरोपण के साथ-साथ उनकी देखभाल व सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, तभी सही मायनों में पौधारोपण का लाभ होगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के उप कुलपतियों को निर्देश दिये हैं कि वे विश्वविद्यालयों के परिसरों को हरा-भरा रखें व खाली स्थानों पर पौधारोपण करें। उन्होंने कहा कि वन विभाग व अन्य संबंधित विभाग विश्वविद्यालयों के साथ मिल कर इस दिशा में प्रयास करें।
शहरी वानिकी पर बल देते हुए दत्तात्रेय ने कहा कि आज के इस औद्योगिकीकरण के युग में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिये कि जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाये। उन्होंने वन और वन्य प्राणी विभाग द्वारा प्रदेश में वन्य प्राणी संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि मोरनी में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इसे एक बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोरनी में एडवेंचर स्पोर्ट्स के शुरू होने से पर्यटकों का रूझान मोरनी की ओर काफी बढ़ा है।
इससे पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी.एस. तंवर ने वन और वन्य जीव विभाग की गतिविधियों पर एक प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि मोरनी पहाड़ियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 50,000 एकड़ है। इसे स्थानीय राजस्व इकाई में विभाजित किया गया है। पूरा मोरनी पहाड़ी क्षेत्र वनस्पति और पशु संपदा में बहुत समृद्ध है। जानवरों में तेंदुआ इस क्षेत्र का प्रमुख है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा और विशेष रूप से मोरनी की पहाड़ियों के समग्र विकास में गहरी दिलचस्पी ले रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कई घोषणाएं भी की हैं। उन्होंने बताया कि नेचर कैंप थपली में पंचकर्मा केंद्र स्थापित किया गया है जो इस वर्ष जून से चालू हो गया है। इसमें मालिश की सुविधा, सर्वंगा उपचार, और भाप स्नान की सुविधा आदि उपलब्ध है। केंद्र का निर्माण प्रकृति प्रेमियों और आगंतुकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने बताया कि पंचकर्म केंद्र के अलावा नेचर कैंप थापली में बारह हट्स हैं जहां पर्यटक रात के लिए रुक सकते हैं। नेचर कैंप थापली परिसर में एक छोटी हर्बल पौधों की नर्सरी भी है। स्कूली बच्चों के लिए यहां प्रकृति कक्षाएं अक्सर आयोजित की जाती हैं। एक छोटा सम्मेलन कक्ष और एक भोजन कक्ष (गोल घर) भी है।
इस अवसर पर उन्होंने राज्यपाल को आश्वस्त किया कि राज्य में वन क्षेत्र को बढाने और पौधों के रख-रखाव व सुरक्षा के लिए और अधिक प्रयास किए जायेंगे। इसके अलावा ओद्यौगिक क्षेत्रों और विद्यालयो तथा महाविद्यालयों में भी पौधारोपण के लक्षय को और बढाया जायेगा।
इसके पश्चात राज्यपाल ने हरड़ वाटिका, मोरनी फोर्ट और टिक्कर ताल का दौरा किया। उन्होंने टिक्कर ताल में पौधारोपण किया और वहां साहसिक गतिविधियों का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर हरियाणा वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक विवेक सक्सेना, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक जी. रमन और विनोद कुमार व के.सी. मीणा, मुख्य वन संरक्षक टी.पी. सिंह, पुलिस उपायुक्त मोहित हांडा, एसडीएम ऋचा राठी, जिला वन अधिकारी भूपेन्द्र राघव और सहायक जिला वन अधिकारी अनीता भी उपस्थित थी।

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