करनाल, 8 नवंबर। देसी गायों के दूध में ए-2 प्रोटीन अधिक मात्रा मैं होता है जो शरीर को आधुनिक जीवन शैली से उत्पन्न होने वाली कई बीमारियों से बचाता है। इसलिए इस दूध को अमृत समान कहा जाता है। भारत शुरू से ही कृषि प्रधान देश रहा है और हमारी अर्थव्यवस्था कृषि और गायों पर आधारित थी। यह बात हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के लाइव कार्यक्रम में ग्रामीणों से संवाद के दौरान कही। उन्होंने कहा कि हरियाणा के करनाल जिले में आजकल विदेशी नस्ल की गायों की संख्या ज्यादा देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि आज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान जिस निष्कर्ष पर पहुंचा है, हमारे शास्त्रों में वह पहले ही कहा जा चुका है। आज पश्चिमी सोच से प्रभावित लोग भारतीय संस्कृति में छिपे ज्ञान के अनमोल खजाने को पुरातनपंथी कहकर खारिज करते रहते हैं। पुराना सब कुछ अच्छा ही हो, यह जरूरी नहीं। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि जीवन को प्रगतिशील बनाए रखने के लिए पुरानी अप्रासंगिक बातों को बदलना होगा। लेकिन, पुरानी जिन बातों में स्वर्णिम तत्व छिपा है उसे तो स्वीकार करना ही होगा।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि पश्चिमी सोच को ही प्रगतिशील मानने और भारतीयता में अंधविश्वास व पिछड़ापन देखने वाले लोग आज भी हैं और पहले भी थे। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी ऐसे ही लोगों में शामिल थे जिनका कहना था कि आई एम ए हिंदू बाय एक्सीडेंट। यानी कि वह अपने हिंदू होने को एक दुर्घटना या संयोग मानते थे। ऐसी सोच के लोगों ने हमारी भारतीय संस्कृति को काफी नुकसान पहुंचाया है।
लोगों को सकारात्मक सोच रखने की सलाह देते हुए डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि निकटतम परिस्थितियों में भी हमें अपनी मुस्कान की पहरेदारी करनी चाहिए। बुरे दौर में भी अपने आसपास कुछ न कुछ अच्छा घटता ही रहता है। हमें उसे स्वीकार करना चाहिए और ईश्वर को इसके लिए धन्यवाद भी देना चाहिए। हंसने मुस्कुराने की कोई न्यूनतम सीमा अवश्य तय होनी चाहिए।
इस लाइव कार्यक्रम में डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता पवन तोमर एवं नारनौल की कवियित्री कृष्णा आर्य ने भी भाग लिया। कृष्णा आर्य ने इस अवसर पर भाई-बहन के प्रेम पर आधारित एक सुंदर गीत भी सुनाया।
पाश्चात्य सोच से प्रभावित लोगों ने भारतीय संस्कृति का काफी नुकसान कियाः डॉ. चौहान
