वेद मनुष्यों को सेवा, समर्पण एवं परोपकार के साथ जीवन जीना सिखाता है: स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती

चंडीगढ़, 29 अक्टूबर। आर्य समाज, सेक्टर 7-बी, चंडीगढ़ के 63वें वार्षिक उत्सव का शुक्रवार को शुभारम्भ हुआ। जिसमें करनाल से पधारे स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती जी ने कहा कि प्रत्येक मानव सद्गुणों को धारण कर तथा शुभ कर्मों को करते हुए अपने जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि कर सकता है। चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि कर अपने जीवन को सफल कर सकता है। मनुष्यों को आलस्य और प्रमाद को छोड़कर, दृढ़ संकल्प के साथ उत्तम कर्म करना होगा। प्रत्येक व्यक्ति को बुराइयों को छोड़कर सत्य निष्ठा के साथ शुभ कर्म करने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति का सम्मान अर्थात पर्यावरण की शुद्धि का ध्यान रखना होगा तभी हम प्रदूषण मुक्त जीवन को उत्साह एवं आरोग्यता के साथ जी सकते हैं।
पवित्र वेद हम सभी मनुष्यों को यज्ञ भावना के साथ सेवा समर्पण एवं परोपकार के साथ जीवन जीना सिखाता है। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने स्पष्ट बताया है कि प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से संतुष्ट नहीं रहना चाहिए किंतु सब की उन्नति में अपने उन्नति समझनी चाहिए। मानव जीवन की उन्नति शुभ कर्म पर ही आधारित है सांसारिक जीवन के कर्तव्य तथा आध्यात्मिक जीवन के सत्य पथ पर समर्पण, भक्ति, ज्ञान तथा उपासना ही मानव जीवन की उन्नति के उपाय हैं। बरेली से पधारे भानु प्रकाश शास्त्री ने मनमोहक भजनों की प्रस्तुति से उपस्थित आर्य जनों को आत्म विभोर कर दिया। आर्य समाज के प्रेस सचिव डॉ विनोद शर्मा ने इस धार्मिक कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर अपने जीवन को सफल बनाने का आग्रह किया।

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