सावरकर पर प्रश्न पूछना अपराध नहीं, शिक्षक का निलंबन तत्काल वापस हो: शैक्षिक महासंघ

सावरकर पर प्रश्न पूछना अपराध नहीं, शिक्षक का निलंबन तत्काल वापस हो: शैक्षिक महासंघ
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चंडीगढ़/केरल । अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने केरल के कासरगोड जिले के कुंबला सब-डिस्ट्रिक्ट में आयोजित विद्यालयी सोशल साइंस फ्रीडम क्विज में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछे जाने पर शिक्षक गुरु प्रसाद के निलंबन की कड़ी निंदा करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नारायण लाल गुप्ता ने बताया कि सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं। उनके क्रांतिकारी जीवन, ब्रिटिश शासन द्वारा दिए गए दंड और अंडमान की सेलुलर जेल में उनके कारावास का अध्ययन इतिहास का स्वाभाविक हिस्सा है। उनके विचारों से सहमति-असहमति हो सकती है, लेकिन सावरकर पर प्रश्न पूछना न अपराध है, न अनुशासनहीनता और न किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार। ऐसे प्रश्न के आधार पर शिक्षक को निलंबित करना उचित कार्रवाई नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन किसी एक दल अथवा विचारधारा की संपत्ति नहीं है। गांधी, सुभाष, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सरदार पटेल, तिलक, अरविंद, सावरकर सहित असंख्य राष्ट्रभक्तों के योगदान से इसकी राष्ट्रीय गाथा बनी।
महासंघ की महामंत्री प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि यदि प्रश्नावली संबंधित उप जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच एवं अनुमोदन के बाद विद्यालयों में भेजी गई थी, तो किसी त्रुटि के लिए केवल प्रश्न तैयार करने वाले शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। प्रश्न की तैयारी, स्रोत, जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच पूरी होने से पहले निलंबन जैसी कार्रवाई शिक्षक समुदाय में भय और आत्म-सेंसरशिप का वातावरण पैदा कर सकती है।
प्रो. भट्ट ने कहा कि एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व से संबंधित प्रश्न को लेकर शिक्षक का निलंबन स्पष्ट वैचारिक एवं राजनीतिक पूर्वाग्रह का संकेत देता है। शिक्षा को राजनीतिक दबाव का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। शिक्षक का दायित्व विद्यार्थियों को प्रश्न करने, तर्क करने, प्रमाणों की जांच करने और विभिन्न दृष्टिकोण समझने के लिए सक्षम बनाना है।
उन्होंने कहा कि सावरकर को स्वतंत्र भारत में विभिन्न सरकारों और राजनीतिक विचारधाराओं द्वारा सार्वजनिक रूप से ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में स्वीकार किया गया है। पोर्ट ब्लेयर के हवाई अड्डे का नाम वीर सावरकर के नाम पर है, श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया था तथा संसद भवन में उनका चित्र स्थापित है। ऐसे में विद्यालयी क्विज में सावरकर का नाम आ जाना गंभीर शैक्षिक अपराध कैसे बन गया, यह विचारणीय है।
महासंघ ने कहा कि महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को इतिहास से हटाने के बजाय तथ्यों, प्रमाणों और ऐतिहासिक संदर्भ के आधार पर आलोचनात्मक रूप से पढ़ाया जाना चाहिए। इतिहास को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए और शिक्षा को वैचारिक दबाव से मुक्त रखा जाना चाहिए।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने राज्यपाल से गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल एवं अविलंब वापस लेकर उन्हें सेवा में बहाल करने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। महासंघ ने शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
यह जानकारी जारी एक विज्ञप्ति में महामंत्री प्रो गीता भट्ट ने दी।

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