नई दिल्ली, 4 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कानून के शासन, राष्ट्रीय सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में भारत की प्रत्यर्पण (Extradition) प्रणाली में व्यापक सुधार किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप अब देश के खिलाफ अपराध कर विदेशों में छिपने वाले अपराधियों के लिए दुनिया का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं रह गया है। आज भारत की नीति स्पष्ट है—अपराधी चाहे किसी भी देश में क्यों न छिपा हो, उसे कानून के दायरे में लाकर पीड़ितों को न्याय दिलाया जाएगा।
एक समय ऐसा था जब भारत की प्रत्यर्पण व्यवस्था अत्यंत धीमी, बिखरी हुई और सीमित प्रभाव वाली मानी जाती थी। देश के पास केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण व्यवस्था थी, अधिकांश मामलों में कानूनी प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रहती थी और विभिन्न मंत्रालयों एवं जांच एजेंसियों के बीच समन्वय का अभाव दिखाई देता था। वर्ष 2004 से 2013 के बीच औसतन केवल चार भगोड़े अपराधियों का ही प्रतिवर्ष भारत प्रत्यर्पण करा पाया, जबकि 110 से अधिक अनुरोध लंबित पड़े रहे। अधूरे दस्तावेज, धीमी जांच, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कानूनी तैयारी का अभाव तथा दोहरे अपराध (Dual Criminality) और Double Jeopardy जैसे कानूनी सिद्धांतों के कारण अनेक मामलों में विदेशी अदालतों ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध अस्वीकार कर दिए।
उस समय आर्थिक अपराधियों की संपत्तियां जब्त करने या विदेश भागे अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए कोई अलग कानून भी उपलब्ध नहीं था। परिणामस्वरूप कई बड़े आर्थिक अपराधी तथा आतंकवाद से जुड़े तत्व वर्षों तक विदेशों में सुरक्षित रहकर भारतीय कानून से बचते रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया और वर्ष 2018 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (Fugitive Economic Offenders Act) लागू किया। इस कानून ने पहली बार आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों की जब्ती, उनके आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने तथा उन्हें भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया को नई शक्ति प्रदान की। इसके बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करते हुए इसे केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और भारत की संप्रभुता से जुड़ा विषय माना।
वर्ष 2019 के बाद गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत ने एक इंटीग्रेटेड, इंटेलिजेंस-आधारित और तकनीक-संचालित प्रत्यर्पण मॉडल विकसित किया। “Whole of Government Approach” के अंतर्गत गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, CBI, NIA, प्रवर्तन निदेशालय (ED), खुफिया ब्यूरो (IB), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), DGGI तथा राज्य पुलिस बलों के बीच अभूतपूर्व समन्वय स्थापित किया गया। इससे भगोड़े अपराधियों की पहचान, लोकेशन ट्रैकिंग, दस्तावेज़ीकरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की गति में उल्लेखनीय तेजी आई।
सरकार ने केवल प्रशासनिक सुधारों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि कानूनी ढांचे को भी आधुनिक बनाया। NIA संशोधन अधिनियम-2019 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) संशोधन-2019 के माध्यम से कार्रवाई का दायरा केवल संगठनों तक सीमित न रहकर व्यक्तिगत आतंकियों, उनके वित्तपोषकों, विदेशी नेटवर्क और हैंडलरों तक विस्तारित किया गया। इससे भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति को नई मजबूती मिली।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 160 वर्ष पुराने औपनिवेशिक आपराधिक कानूनों को समाप्त कर भारतीय न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक परिवर्तन किए। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) सहित तीन नए आपराधिक कानून लागू कर 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप न्याय व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया गया।
इन नए कानूनों में पहली बार ‘Trial in Absentia’ का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत यदि कोई आरोपी जानबूझकर विदेश भाग जाता है या अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होता, तो उसकी अनुपस्थिति में भी मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाई जा सकती है और दोष सिद्ध होने पर न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। यदि बाद में आरोपी गिरफ्तार होता है अथवा स्वयं अदालत के समक्ष उपस्थित होता है, तो उसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा, जबकि पहले दर्ज किए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान भी न्यायिक प्रक्रिया में मान्य रहेंगे। इससे वर्षों तक मुकदमे लंबित रखने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगेगी।
नए कानूनों में गवाहों के बयान ऑडियो-वीडियो माध्यम से रिकॉर्ड करने तथा डिजिटल साक्ष्यों के व्यापक उपयोग का भी प्रावधान किया गया है, जिससे पारदर्शिता, विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया की गति दोनों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।
इन व्यापक सुधारों ने भारत की प्रत्यर्पण प्रणाली को केवल अधिक प्रभावी ही नहीं बनाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच भारत की विश्वसनीयता को भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। आज भारत कानूनी तैयारी, कूटनीतिक समन्वय, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आधार पर भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करने वाले अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है।
इसी व्यापक रणनीति के अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में जनवरी 2025 में भारतपोल (BHARATPOL) पोर्टल की शुरुआत की गई। यह भारत और इंटरपोल के बीच सूचना साझाकरण तथा अंतरराष्ट्रीय समन्वय को नई गति देने वाला एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इस पोर्टल ने CBI, राज्य पुलिस मुख्यालयों, इंटरपोल लायजन अधिकारियों तथा जिला स्तर की एजेंसियों को एकीकृत कर ऐसा सूचना तंत्र विकसित किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मामलों में सूचनाओं का आदान-प्रदान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी हुआ है। आज 1,400 से अधिक केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय इकाइयाँ इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं, जिसके परिणामस्वरूप इंटरपोल के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं और प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोधों के निस्तारण में उल्लेखनीय तेजी आई है।
गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक पुलिस सहयोग को नई दिशा दी। वर्ष 2022 में भारत द्वारा 90वीं इंटरपोल महासभा की सफल मेजबानी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय अपराध नियंत्रण में केवल सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर गृह मंत्री ने वैश्विक सुरक्षा के लिए Communication, Collaboration और Cooperation को सबसे प्रभावी मंत्र बताया।
सरकार की सक्रिय कूटनीति, मजबूत कानूनी तैयारी और तकनीकी क्षमता का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की विश्वसनीयता लगातार बढ़ी है। रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया में भी अभूतपूर्व सफलता मिली है। वर्ष 2022 में 40, वर्ष 2023 में 100, वर्ष 2024 में 107, वर्ष 2025 में 112 तथा वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी होना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध वैश्विक स्तर पर कहीं अधिक प्रभावी और आक्रामक रणनीति के साथ कार्य कर रहा है।
इसी प्रकार वर्ष 2019 से 2026 के बीच 274 भगोड़े अपराधियों को विभिन्न देशों से भारत वापस लाया गया, जिनमें आतंकवादी, संगठित अपराधी, गैंगस्टर, आर्थिक अपराधी, मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त आरोपी, हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो, साइबर अपराध, मानव तस्करी तथा अन्य गंभीर अपराधों के आरोपी शामिल हैं। यह उपलब्धि केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक साख, प्रभावी कूटनीति और सुदृढ़ कानून व्यवस्था का प्रमाण है।
भगोड़े अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ जैसे तकनीक आधारित अभियानों को भी मिशन मोड में संचालित किया गया। इंटरपोल के सहयोग से डिजिटल प्रोफाइलिंग, सैटेलाइट ट्रैकिंग, सर्विलांस और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उन अपराधियों तक भी पहुंच बनाई गई जिन्होंने विदेशों में अपनी पहचान और नाम बदलने का प्रयास किया था। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग से प्रत्यर्पण संबंधी न्यायिक प्रक्रियाओं को भी अधिक तेज और प्रभावी बनाया गया।
आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के विरुद्ध सरकार की नीति पूरी तरह शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की रही है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े आतंकवादी नेटवर्क, सीमा पार संचालित आतंकी तंत्र, खालिस्तान समर्थक गतिविधियों, गैंगस्टर-आतंकवादी गठजोड़, नार्को-टेरर नेटवर्क तथा संगठित अपराध के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान की है। इसी प्रकार PFI से जुड़े भगोड़ों, आर्थिक अपराधियों, साइबर अपराधियों और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़े आरोपियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब सीमा पार संचालित अपराध नेटवर्क को भी प्रभावी ढंग से ध्वस्त करने की क्षमता रखता है।
आर्थिक अपराधों के विरुद्ध भी सरकार ने कठोर रुख अपनाया है। धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियाँ जब्त की गईं तथा बड़ी मात्रा में पीड़ितों को धन की वापसी सुनिश्चित की गई। इससे यह संदेश गया कि आर्थिक अपराध कर विदेश भाग जाना अब किसी भी अपराधी के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं रह गया है।
भारत की इस सफलता में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, ओमान सहित अनेक देशों के साथ बढ़ते सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, कानूनी तैयारी, प्रभावी कूटनीति और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही सीमा पार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
इन सभी प्रयासों के केंद्र में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा अपनाई गई “Whole of Government Approach” रही है, जिसके अंतर्गत गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, CBI, NIA, ED, IB, RAW, NCB, DGGI तथा राज्य पुलिस बलों ने एक साझा रणनीति के तहत कार्य किया। जनवरी 2026 में मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के अंतर्गत गठित स्टैंडिंग फोकस ग्रुप ने भगोड़े अपराधियों से जुड़े मामलों में राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय को और अधिक सशक्त बनाया।
आज भारत की नई प्रत्यर्पण नीति केवल भगोड़े अपराधियों को वापस लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पीड़ितों को न्याय दिलाने, अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करने, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने और कानून के शासन में जनता के विश्वास को मजबूत करने का व्यापक अभियान बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के निर्णायक मार्गदर्शन में भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि देश के विरुद्ध अपराध करने वाला कोई भी व्यक्ति दुनिया के किसी भी कोने में छिपा हो, उसे कानून के कटघरे में लाकर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। यही नए भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति, सशक्त कानून व्यवस्था और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव का परिचायक है।
मोदी सरकार ने भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध छेड़ा निर्णायक अभियान, गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में प्रत्यर्पण व्यवस्था बनी विश्व की सबसे प्रभावी प्रणालियों में शामिल
