डड्डू माजरा मेगा वन महोत्सव वृक्षारोपण अभियान के शुभारंभ अवसर पर पंजाब राज्यपाल का टीए ग्रुप ने किया स्वागत

डड्डू माजरा मेगा वन महोत्सव वृक्षारोपण अभियान के शुभारंभ अवसर पर पंजाब राज्यपाल का टीए ग्रुप ने किया स्वागत
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चंडीगढ़ । शहरी पारिस्थितिकी के पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत टीए ग्रुप मुख्यालय, पश्चिमी कमान के तत्वावधान में कार्यरत 133 इको टास्क फोर्स ने 10 जुलाई 2026 को डड्डू माजरा डंपिंग ग्राउंड में आयोजित मेगा वन महोत्सव वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया। यूटी प्रशासन, चंडीगढ़ के सहयोग से आयोजित यह अभियान ‘नो योर टीए’ अभियान तथा राष्ट्र निर्माण में भारतीय सेना के पर्यावरणीय योगदान को समर्पित था। अभियान का शुभारंभ पंजाब के माननीय राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया।
डड्डू माजरा डंपिंग ग्राउंड, जो लंबे समय से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों के लिए जाना जाता रहा है, इस अवसर पर व्यापक पर्यावरणीय पुनरुद्धार अभियान का केंद्र बना। इस वर्ष के राष्ट्रीय वन महोत्सव की थीम “हीलिंग द अर्थ थ्रू ग्रीनर इनिशिएटिव्स” के अनुरूप अभियान का उद्देश्य पर्यावरणीय रूप से प्रभावित क्षेत्रों को हरित क्षेत्रों में परिवर्तित कर शहर के हरित आवरण का विस्तार करना था।
अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में 133 इको टास्क फोर्स की व्यापक भागीदारी रही। यूनिट के अनुशासित सैनिकों ने एक ही दिन में डड्डू माजरा सहित चार विभिन्न स्थानों, जिनमें चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन भी शामिल है, पर लगभग 4,000 पौधों का रोपण किया। इस अभियान में यूटी प्रशासन के विभिन्न विभागों तथा अनेक सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
इस अवसर पर माननीय राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने 133 इको टास्क फोर्स के पर्यावरण संरक्षण एवं वनीकरण के क्षेत्र में किए जा रहे समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) की भागीदारी पौधारोपण के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक संरक्षण एवं बेहतर जीवित रहने की संभावना सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “वन महोत्सव केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”
मानसून के आगमन को ध्यान में रखते हुए यूटी वन विभाग एवं 133 इको टास्क फोर्स द्वारा नवरोपित लगभग 4,000 पौधों की नियमित निगरानी एवं संरक्षण के लिए एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना भी तैयार की गई है, जिससे पौधों की अधिकतम जीवित रहने की दर सुनिश्चित की जा सके।

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