राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे पर 92 वर्षीय डॉ. (कर्नल) राजिंदर सिंह सम्मानित

राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे पर 92 वर्षीय डॉ. (कर्नल) राजिंदर सिंह सम्मानित
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चंडीगढ़, 2 जुलाई । नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक समय तक निस्वार्थ सेवा देने के लिए द कलगीधर ट्रस्ट, बरू साहिब के अकाल साइकियाट्री एवं ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर्स के निदेशक डॉ. (कर्नल) राजिंदर सिंह (92 वर्ष) को 1 जुलाई को पंजाब सरकार द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे सम्मान समारोह में उत्कृष्ट जनसेवा के लिए सम्मानित किया गया।
यह सम्मान पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव कुमार राहुल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में प्रदान किया। समारोह में पंजाब के सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े 58 चिकित्सकों को जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
राज्य स्तरीय राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे सम्मान पंजाब में चिकित्सा क्षेत्र के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है। इसके लिए चिकित्सकों का चयन ऑनलाइन नामांकन, विस्तृत जांच एवं बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। इसमें जनस्वास्थ्य सेवाओं में योगदान, नेतृत्व क्षमता, नैतिक चिकित्सा, सामुदायिक सेवा, शोध, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन तथा मरीजों एवं समाज पर पड़े समग्र प्रभाव का आकलन किया जाता है।
वर्ष 2004 से डॉ. (कर्नल) राजिंदर सिंह पंजाब के सबसे बड़े गैर-सरकारी ग्रामीण मनोचिकित्सा एवं नशा मुक्ति केंद्रों में से एक का नेतृत्व कर रहे हैं। 30-बेड वाले इस आवासीय केंद्र के माध्यम से वे हजारों नशा एवं मानसिक रोग से पीड़ित मरीजों को सुलभ, किफायती एवं संवेदनशील उपचार उपलब्ध करा रहे हैं। द कलगीधर ट्रस्ट के अंतर्गत उन्होंने अब तक एक लाख से अधिक मरीजों का उपचार किया है, जिसमें वैज्ञानिक चिकित्सा, परामर्श, परिवार की भागीदारी, आध्यात्मिकता तथा सामुदायिक सहयोग को एकीकृत किया गया है।
डॉ. (कर्नल) राजिंदर सिंह अकाल इंटीग्रेटेड कम्युनिटी एडिक्शन रिकवरी मॉडल (AICARM) के जनक हैं। इस अभिनव पुनर्वास मॉडल के माध्यम से मरीजों में रिलैप्स (दोबारा नशे की ओर लौटने) की दर 32 प्रतिशत तक सीमित रही है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा बताई गई 40 से 60 प्रतिशत की वैश्विक दर से काफी कम है। यह मॉडल विशेष रूप से ग्रामीण एवं सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में नशा मुक्ति के लिए एक प्रभावी एवं समुदाय आधारित समाधान के रूप में उभरा है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. (कर्नल) राजिंदर सिंह ने कहा, “मैं अपने हर मरीज में गुरु नानक देव जी के दर्शन करता हूं। यही भावना मुझे निरंतर सेवा करने की ऊर्जा देती है। नशे और मानसिक रोग से पीड़ित लोगों की सेवा करना मेरे लिए गुरु की सेवा के समान है। जब तक ईश्वर शक्ति देगा, मैं इस मिशन को जारी रखूंगा।”
92 वर्ष की आयु में भी डॉ. (कर्नल) राजिंदर सिंह पूर्णतः स्वैच्छिक भाव से समाज की सेवा में समर्पित हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन नशा एवं मानसिक रोग से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन लौटाने के लिए समर्पित किया है। उनकी प्रेरणादायी सेवाओं ने हजारों चिकित्सकों, परामर्शदाताओं और सामुदायिक स्वयंसेवकों को समाजसेवा के लिए प्रेरित किया है।
इससे पूर्व हिमाचल प्रदेश सरकार भी उन्हें स्वास्थ्य एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित कर चुकी है।
यह सम्मान केवल एक उत्कृष्ट चिकित्सक का नहीं, बल्कि करुणामयी स्वास्थ्य सेवा, नैतिक चिकित्सा और नशा-मुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण के प्रति उनके आजीवन समर्पण का सम्मान है।

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