नई दिल्ली/चंडीगढ़, 20 जून । अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की एक राष्ट्रीय स्तरीय वर्चुअल बैठक संपन्न हुई, जिसमें देश के सभी राज्यों के केंद्रीय संगठन के पदाधिकारियों, प्रदेश अध्यक्षों, महामंत्रियों और संगठन मंत्रियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) लागू करना उनके साथ ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत’ (Natural Injustice) का खुला उल्लंघन है।
इसके विरोध में महासंघ अब लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के माध्यम से संसद के दोनों सदनों में आवाज उठाएगा और उन्हें ज्ञापन सौंपेगा।
मुख्य बिंदु और अब तक की कार्रवाई:
पूर्व में दी गई चेतावनी: केंद्रीय संगठन के आह्वान पर राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा जिला स्तर पर जिलाधीशों (DM) के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को पहले ही ज्ञापन सौंपा जा चुका है।
मुख्य मांग: सरकार से अनुरोध किया गया है कि संसद में एक विशेष विधेयक (Bill) लाया जाए, जिसके तहत 2010 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों के लिए टेट (TET) की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
स्थिति स्पष्टीकरण: महासंघ ने साफ किया है कि 2010 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने के बाद से CTET और राज्यों की TET अनिवार्यता का वे पूरी तरह समर्थन करते हैं, और तब से नियुक्तियां इसी आधार पर हो रही हैं। विवाद सिर्फ 2010 से पहले के कार्यरत शिक्षकों को इसमें घसीटने पर है।
5 जुलाई के बाद देशव्यापी प्रदर्शन का अल्टीमेटम:
“यदि सरकार ने सांसदों के माध्यम से दिए जाने वाले इस ज्ञापन पर भी संज्ञान नहीं लिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो 5 जुलाई के बाद देश भर में उग्र धरना-प्रदर्शनों का दौर शुरू होगा।”
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि आगामी आंदोलन की पूरी रूपरेखा, स्थान (Venue) और विरोध की पद्धति का निर्धारण कर लिया गया है, जिसे बहुत जल्द ही मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक किया जाएगा।
यह जानकारी जारी एक विज्ञप्ति में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, चण्डीगढ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र शास्त्री ने दी।

