टीईटी समीक्षा याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से प्रभावित लाखों शिक्षकों के लिए तत्काल विधायी राहत की अपील

टीईटी समीक्षा याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से प्रभावित लाखों शिक्षकों के लिए तत्काल विधायी राहत की अपील
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चंडीगढ़ । अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM), जो देशभर में 14 लाख से अधिक शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाला शिक्षक संगठन है, ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) प्रकरण से संबंधित समीक्षा याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय से उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर गहरी चिंता एवं पीड़ा व्यक्त की है। इस निर्णय से देशभर के लाखों शिक्षकों में व्यापक असंतोष एवं गंभीर मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है, जो वर्षों से समर्पण एवं निष्ठा के साथ विद्यालयों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ चण्डीगढ अध्यक्ष, डॉ. धर्मेन्द्र शास्त्री ने जारी एक बयान में कहा है कि प्रभावित शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू सरकारी नियमों एवं अधिसूचनाओं के अंतर्गत सक्षम प्राधिकरणों द्वारा विधिवत प्रक्रिया अपनाकर की गई थी। इनमें से अनेक शिक्षकों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में समर्पित किए हैं तथा ग्रामीण, शहरी एवं वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
ABRSM सरकार के समक्ष निम्नलिखित बिंदु प्रस्तुत करता है—
वर्तमान कानूनी स्थिति के कारण लाखों शिक्षकों को, वर्षों की सेवा देने के बावजूद, अपूरणीय क्षति उठानी पड़ सकती है।
उनकी सेवा स्थितियों को लेकर उत्पन्न अचानक अनिश्चितता विद्यालयों के संचालन एवं समग्र शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी।
यह विषय मानवीय एवं प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः इसमें सरकार के त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
पूर्व में भी इस प्रकार की परिस्थितियों में व्यापक जनहित एवं संस्थागत स्थिरता बनाए रखने हेतु विधायी उपायों के माध्यम से कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान किया गया है।
उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि आगामी संसद के मानसून सत्र में उपयुक्त अध्यादेश अथवा विधायी संशोधन लाकर प्रभावित शिक्षकों को तत्काल राहत प्रदान करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएँ। ऐसा कदम शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में निरंतरता एवं स्थिरता सुनिश्चित करेगा।
हमें पूर्ण विश्वास है कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं एवं चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए इस विषय में सहानुभूतिपूर्वक एवं निर्णायक कदम उठाएगी। शिक्षकों ने सदैव राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वे न्याय एवं सेवा सुरक्षा के अधिकारी हैं।
ABRSM यह भी सम्मानपूर्वक कहना चाहता है कि यदि लाखों पीड़ित शिक्षकों को समय रहते राहत प्रदान नहीं की गई, तो वे अपने अधिकारों एवं आजीविका की रक्षा हेतु लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए बाध्य हो सकते हैं। हमें आशा है कि सरकार के सकारात्मक एवं सक्रिय हस्तक्षेप से ऐसी स्थिति उत्पन्न होने से बचा जा सकेगा।

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