चंडीगढ़, 23 मई। लघु उद्योग भारती, चंडीगढ़ ने मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों के संबंध में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को एक ज्ञापन सौंपा है तथा औद्योगिक क्षेत्र और एमएसएमई सेक्टर के लिए व्यावहारिक राहत उपायों की मांग की है।
संस्था ने शहर के ऊर्ध्वाधर विकास और योजनाबद्ध विकास की दिशा में दूरदर्शी एवं प्रगतिशील कदम उठाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन की सराहना की। हालांकि, लघु उद्योग भारती ने इस बात पर जोर दिया कि औद्योगिक क्षेत्रों से संबंधित कुछ प्रस्तावित प्रावधानों में अभी भी व्यावहारिक सुधारों की आवश्यकता है, ताकि एमएसएमई को समर्थन मिल सके और चंडीगढ़ में व्यापार करने में सुगमता को मजबूत किया जा सके।
संस्था ने जोरदार मांग की कि औद्योगिक प्लॉटों के लिए प्रस्तावित 60% ग्राउंड फ्लोर कवरेज को बढ़ाकर न्यूनतम 90% किया जाए, क्योंकि भूमि की उपलब्धता सीमित है और उद्योगों की परिचालन आवश्यकताएं लगातार बढ़ रही हैं।
लघु उद्योग भारती ने यह भी मांग की कि औद्योगिक इकाइयों में आंतरिक परिवर्तन और आंतरिक संशोधन की अनुमति एक सरल और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से दी जाए, ताकि उद्योग वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार अपने परिसर का आधुनिकीकरण और उपयोग कर सकें।
संस्था ने आगे कहा कि सेवा उद्योग अब एमएसएमई सेक्टर का अभिन्न हिस्सा बन चुका है और इसे चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में आधिकारिक रूप से अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही यह भी मांग की गई कि उद्योगों को सीधे सेवाएं प्रदान करने वाले व्यवसाय जैसे मिल स्टोर्स, आयरन शीट एवं पाइप व्यापारी, हार्डवेयर सप्लायर्स, ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स डीलर्स और कार रिपेयर एवं सर्विस से जुड़े व्यवसायों को औद्योगिक क्षेत्रों में संचालन की अनुमति दी जाए, क्योंकि ये गतिविधियां दशकों से वहां संचालित हो रही हैं और औद्योगिक संचालन के लिए आवश्यक हैं।
जोनिंग फ्रेमवर्क के अंतर्गत प्रस्तावित माइग्रेशन नीति के संबंध में संस्था ने चिंता व्यक्त की कि कई छोटे और मध्यम उद्योग माइग्रेशन से जुड़े अतिरिक्त खर्चों को वहन करने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो सकते। लघु उद्योग भारती ने प्रशासन से आग्रह किया कि विकास और राहत के लाभ सभी औद्योगिक इकाइयों को समान रूप से उपलब्ध कराए जाएं और केवल आर्थिक रूप से मजबूत इकाइयों तक सीमित न रहें।
लघु उद्योग भारती चंडीगढ़ के अध्यक्ष अवि भसीन ने कहा कि एमएसएमई और औद्योगिक इकाइयां चंडीगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और रोजगार सृजन तथा स्थानीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रशासन मास्टर प्लान-2031 में संशोधनों को अंतिम रूप देते समय औद्योगिक क्षेत्र और जनहित को ध्यान में रखते हुए संतुलित, संवेदनशील और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएगा।
यह जानकारी जारी एक विज्ञप्ति में लघु उद्योग भारती, चंडीगढ़ के अध्यक्ष अवि भसीन ने दी।
चंडीगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में FAR बढ़ोतरी एवं विकास नियमों में राहत से एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन: अवि भसीन
