केवल सत्संग ही आत्मिक शांति, प्रेम और आपसी सद्भाव का माध्यम: एच. एस. चावला

केवल सत्संग ही आत्मिक शांति, प्रेम और आपसी सद्भाव का माध्यम: एच. एस. चावला
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मनीमाजरा़ / चंडीगढ़ 23 मई। सत्संग ही एक ऐसा माध्यम है जहां मनुष्य को आत्मिक शांति, प्रेम और आपसी सद्भाव का अनुभव होता है। यहां सभी एक-दूसरे से निष्काम प्रेम करते हैं तथा विनम्रता और सेवा की भावना को अपनाते हैं, यहां आकर जो व्यक्ति अहंकार से दूर रहकर स्वयं को परमात्मा की कृपा का पात्र मानता है वह सच्चे अर्थों में जीवन का आनंद प्राप्त करता है। मौलीजागरां में स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित विशाल सन्त समागम में लुधियाना से आए केन्द्रीय योजना एवं सलाहकार बोर्ड के वाईस चेयरमैन एच. एस. चावला ने हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहे।
मानव जीवन में सफलता, खुशहाली एवं सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए चावला ने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना अत्यंत आवश्यक है। जब मनुष्य अपने उद्देश्य को स्पष्ट कर लेता है और उसे पाने के लिए निरंतर मेहनत करता है, तभी वह अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। उन्होंने कहा कि केवल मेहनत ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि सकारात्मक सोच भी सफलता की कुंजी है। सकारात्मक विचार मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
चावला जी ने सेवा एवं परोपकार की भावना को मानव जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि जब हम दूसरों की सहायता करते हैं तो हमें आत्मिक संतुष्टि एवं वास्तविक खुशी प्राप्त होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में मानवता, प्रेम और भाईचारे को अपनाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि परमात्मा पर अटूट विश्वास रखने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं होता। ईश्वर में आस्था मनुष्य को जीवन के संघर्षों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने संगत को सदैव प्रसन्न रहने, मुस्कुराने और जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने का संदेश दिया।
इससे पूर्व यहां के जोनल इन्चार्ज ओ. पी. निरंकारी व मनीमाजरा ब्रान्च के मुखी अमरजीत सिंह ने भी अपने भाव व्यक्त किए तथा लुधियाना से आए चावला का सारी साधसंगत की ओर से धन्यवाद व स्वागत किया ।

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