सलाहकार धर्मपाल ने काव्य संग्रह “प्रेरणा अंकुर” का किया विमोचन

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चंडीगढ़, 16 जुलाई। डॉ. रमेश चंद शर्मा द्वारा रचित काव्य संग्रह “प्रेरणा अंकुर” का विमोचन सलाहकार प्रशासक, यूटी चंडीगढ़ धर्मपाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर शिक्षा सचिव यूटी चंडीगढ़, एसएस गिल, स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक रुबिन्दरजीत सिंह बराड़, रविन्दर कौर उप निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग, प्रभजोत कौर जिला शिक्षा अधिकारी, राजबाला प्रधानाचार्य, प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन, प्रिया टंडन, रवि कांत शर्मा, मेयर चंडीगढ़ नगर निगम, आशा जसवाल  पूर्व मेयर चंडीगढ़ नगर निगम उपस्थित थे।
 “प्रेरणा अंकुर” काव्य संग्रह में देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण, नैतिक मूल्य, विभिन्न सामाजिक समस्याओं पर आधारित कविताएँ एवं कोरोना संबंधित कविताओं का समावेश किया गया है । यह काव्य संग्रह जहाँ एक ओर सामाजिक जागरूकता व सांस्कृतिक चेतना के भाव को अपने आप में समेटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है । सभी अधिकारियों ने काव्य संग्रह की प्रशंसा की एवं डॉ रमेश चंद शर्मा को साहित्य के क्षेत्र में किए गए रचनात्मक कार्य के लिए बधाई दी ।
देवभूमि हिमाचल के शिमला जिला से संबंध रखने वाले डॉ. रमेश चंद शर्मा विगत 27 वर्षों से अध्यापन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में ये शिक्षा विभाग चंडीगढ़ प्रशासन में ‘प्रवक्ता समाजशास्त्र’ के पद पर कार्यरत हैं। अध्यापन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल से ‘श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार’, चंडीगढ़ प्रशासक एवं महामहिम राज्यपाल पंजाब से ‘राज्य शिक्षक पुरस्कार’ एवं ‘राष्ट्रीय शिक्षा रत्न’ से सम्मानित डॉ  रमेश, प्रकृति व समाज सेवा के लिए भी समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं । कोरोना काल के कठिन दौर में जहाँ शिक्षा विभाग चंडीगढ़ प्रशासन में समाजशास्त्र ‘विषय-विशेषज्ञ’ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं अपनी लेखन कला से साहित्य के क्षेत्र में भी योगदान दे रहे हैं । कोरोना कालीन समय में 10 सांझा काव्य संग्रहों व पत्र-पत्रिकाओं में अपनी रचनाएँ प्रकाशित करने के साथ-साथ, दो काव्य संग्रह ‘प्रेरणा शतक’ (100 कविताओं का संग्रह) व ‘प्रेरणा अंकुर’ (82 कविताओं का संग्रह) प्रकाशित करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
इनके काव्य संग्रह में नैतिक मूल्य, राष्ट्रीय प्रेम, संस्कार, विभिन्न समस्याओं का चित्रण व समाधान, कोरोना काल, महत्वपूर्ण दिवस जैसे विषयों का सरल व सरस चित्रण मिलता है । प्रत्येक कविता के अंत में एक संदेश दिया गया है, प्रेरणा दी गयी है व सीख दी है । संभवत इसी उद्देश्य से काव्य संग्रहों के शीर्षक प्रेरणा रखें गये हैं।
 साहित्य में अप्रतिम योगदान के लिए इन्हें ‘सुमित्रानंदन स्मृति सम्मान पुरस्कार’, ‘सृजन शिरोमणि साहित्य सम्मान’, ‘शब्द साधक साहित्य सम्मान’, ‘काव्य कर्ममणि साहित्य सम्मान’ ‘काव्यश्री साहित्य सम्मान’, ‘वीणा- वादिनी साहित्य सम्मान’, ‘हिंदी गौरव सम्मान’, ‘काव्य गौरव सम्मान’ व अनेक प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया गया है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. शर्मा ने वर्तमान विद्यालय में शिक्षा में नवाचार को दृष्टि पथ पर रखकर विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान के पार्क बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विद्यालय में आरोग्य वाटिका, ग्रीन हाऊस, किचन गार्डन जैसी गतिविधियाँ इनके प्रकृति प्रेम के उदाहरण है।

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