सरकार के फैसले के बिना ट्राँसमिशन के असैट निजी कम्पनी को सौपने को लेकर युनियन ने जांच की मांग की

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चण्डीगढ़, 11 दिसम्बर । यूटी पावरमैन यूनियन के पदाधिकारियों ने चण्डीगढ़ के प्रशासक गुलाब चन्द कटारिया को पत्र लिखकर केन्द्र है तथा अपील की है कि इस मामले पर शीघ्र संज्ञान लेकर अधिकारियों द्वारा लिये गये फैसले को रद्द कर ट्राँसमिशन की संपत्ति प्रशासन के हवाले की जाये।
यूनियन के प्रधान अमरीक सिंह, महासचिव गोपाल दत्त जोशी, उप प्रधान सुखविन्दरर सिंह, गुरमीत सिंह आदि ने कहा कि इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने केन्द्र सरकार के 12 मई 2020 के फैसले व केन्द्रीय कैबिनेट के 6-1-2022 के फेसले का सीधा उल्लघंन किया है। पहले प्रशासन ने 1फरवरी 2025 को नोटिफिकेशन कर 31जनवरी से 349 कर्मचारियों को 1 साल के लिए अस्थाई तौर पर निजी कम्पनी में भेज दिया तथा शडयूल सी के तहत यह भी कह दिया कि ट्राँसमिशन की फंक्शन व संपत्ति कम्पनी को ट्राँसंसफर नहीं की जायेगी। लेकिन अब 220 केवी, 66 केवी व 33 केवी की लाइने व ग्रिड सब स्टेशन निजी कम्पनी एमीनेंट को सौंपे जा रहे हैं ,जो सीधे तौर पर केन्द्र सरकार व केन्द्रीय कैबिनेट के फैसलों का उल्लघंन है। प्रशासन के इन अधिकारियों ने अपना तो बचाव कर लिया तथा प्रशासक महोदय को भी अंधेरे में रखकर 349 अधिकारियों व कर्मचारियों को कम्पनी में 1 साल के लिए अस्थाई तौर पर भेजने की नोटिफिकेशन करवा ली। यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि अगर केन्द्र सरकार के फैसले का व बिजली एक्ट 2003 को सही तौर पर लागू किया जाता तो 1 -220 केवी सब स्टेशन , 15-66 केवी सब स्टेशनों व 5-33 केवी सब स्टेशनों पर कम से कम 250 के करीब अधिकारी व कर्मचारी अडजैस्ट हो सकते थे।
प्रशासन ने ट्राँसमिशन की सम्पत्तियां निजी कम्पनी को सौंपकर कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात किया व कम्पनी को तोहफा दे दिया। अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की बजाय उन्हें ईनाम दिया जा रहा है व कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि कम्पनी के पास न तो डिस्ट्रीब्यूशन का लाईसेंस है न ही ट्राँसमिशन का लेकिन कम्पनी मालिक बनी है। यूनियन की कार्यकारिणी इस मामले की जाँच की पहले ही मांग कर चुकी है तथा प्रशासन द्वारा शीघ्र दखल न देने पर इस फैसले को कानूनी तौर पर चैलेंज किया जायेगा।
यह जानकारी जारी एक विज्ञप्ति में महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने दी।

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