गीता काव्य’ गीता का केवल सार नहीं, बल्कि गीता दर्शन का सीधा साक्ष्य भी है: पद्मश्री प्रो. हरमहेंदर सिंह बेदी

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चंडीगढ़। केंद्रीय विश्विद्यालय, हिमाचल प्रदेश के कुलाधिपति, पद्मश्री प्रो. हरमहेंदर सिंह बेदी को पंजाब विश्वविद्यालय में मुलाकात के दौरान डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने अपना काव्य संग्रह ‘गीता काव्य’और कठोपनिषद भेंट किया। कुलाधिपति, पद्मश्री प्रो. हरमहेंदर सिंह बेदी ने कहा कि डॉ.विनोद कुमार शर्मा द्वारा विरचित ‘गीता काव्य’ और कठोपनिषद का सरल भाषा में केवल परमार्थ ही नही बल्कि मौलिक चिंतन को रेखांकित करने वाली यशस्वी दीपमाला है। उन्होंने कहा कि गीता विश्व की उच्चतम आध्यात्मिक पोथी है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने गीता को विश्व के विरासत ग्रंथों में स्वीकृति दी है। गीता के विना भारत को नही समझा जा सकता।
आज कल एशिया के देश भी गीता के अध्ययन के माध्यम से अपनी विरासत को नए अर्थ प्रदान कर रहे हैं। डॉ. विनोद कुमार ने इस अमर कृति के शाश्वत संदेश को हिंदी के माध्यम से जिस पद्धति द्वारा प्रचारित किया है, उसके लिए वे साधुवाद के हकदार हैं। डॉ. विनोद हिंदी के समर्थ कवि है। पत्रकारिता की दुनिया में भी उनका सम्मान है।
मुझे गीता काव्य पढ़कर आश्चर्य हुआ कि एक कवि गीता के मर्म को किस तरह अपनी सृजन शक्ति का हिस्सा बनाकर उसे खूबसूरत भाषा में अभिव्यक्त करता है। गीता की दार्शनिकता की झलक पूरे काव्य एवं संवादों में देखते ही बनती है। ‘गीता काव्य’ गीता का केवल सार नहीं, बल्कि गीता दर्शन का सीधा साक्ष्य भी है। हिंदी काव्य में गीता के ऐसे बहुत कम मौलिक संवाद प्रस्ताव उपलब्ध होते हैं। उन्होंने डॉ. विनोद शर्मा को इस कृति की सृजना के लिए बधाई दी। डॉ विनोद शर्मा ने प्रोफेसर बेदी का आभार व्यक्त किया।

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