जीएमएसएसएस 20डी ने तीन स्वर्ण और तीन कांस्य पदक जीतें

जीएमएसएसएस 20डी ने तीन स्वर्ण और तीन कांस्य पदक जीतें
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चंडीगढ़ । सेक्टर 34 स्थित खेल परिसर में राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (जीएमएसएसएस) 20डी की बालक जूडो टीम ने अंतर-विद्यालय अंडर-17 बालक जूडो चैंपियनशिप में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। सामाजिक अध्ययन शिक्षिका और पूर्व जूडो स्वर्ण पदक विजेता ज्योत्सना के समर्पित मार्गदर्शन में टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों की झड़ी लगा दी। जीएमएसएसएस 20डी ने तीन स्वर्ण और तीन कांस्य पदकों के साथ अभूतपूर्व जीत हासिल की, जो विद्यालय के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
विक्रांत यादव ने 50 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर नेतृत्व किया, उसके बाद करणजोत सिंह ने -81 किग्रा और जपजोत सिंह ने -99 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। टीम ने -55 किग्रा में परीक्षित शर्मा, -73 किग्रा में तेजस और +90 किग्रा भार वर्ग में हरीश द्वारा कांस्य पदक जीतने का भी जश्न मनाया।
ज्योत्सना का अपने छात्रों और खेल के प्रति अटूट समर्पण इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके जुनून और प्रतिबद्धता ने उनकी टीम को उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे उनके छात्रों ने विभिन्न राज्य और अंतर-विद्यालय चैंपियनशिप में लगभग 100 पदक जीते हैं। यह उल्लेखनीय उपलब्धि युवा प्रतिभाओं को निखारने और अपने छात्रों में जूडो के प्रति प्रेम जगाने की उनकी असाधारण क्षमता को दर्शाती है। अब तक उनके स्कूल ने 19 पदक जीते हैं, जिनमें लड़कियों ने 4 रजत पदक और 7 कांस्य पदक जीते हैं अभी अंडर-19 प्रतियोगिता बाकी है, इस बार वो अपने पिछले साल का 19 मैडल का रिकॉर्ड तोड़ के एक नया रिकॉर्ड बनाने को तैयार हैं।
ज्योत्सना का लक्ष्य चंडीगढ़ प्रशासन से खेल छात्रवृत्ति प्राप्त करके इन छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना है। अपने छात्रों को जूडो से परिचित कराने का कारण पूछने पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘मेरी लड़कियां आत्मरक्षा में सक्षम होंगी और मेरे लड़के अपनी ऊर्जा को अधिक रचनात्मक तरीके से उपयोग कर सकेंगे।’ उन्होंने आगे कहा कि मैंने महसूस किया है कि कई सरकारी स्कूल के छात्र धन की कमी के कारण 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। अगर ये छात्र कांस्य पदक भी जीतते हैं, तो खेल विभाग उन्हें 30 से 35,000 रुपये छात्रवृत्ति के रूप में देगा। अगर छात्र 9वीं से 12वीं तक खेलते हैं, तो वे आसानी से स्नातक की पढ़ाई के लिए पैसे बचा सकते हैं।’ वह हमारे योग्य प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए नारे ‘जहां कम वहां हम’ से बहुत प्रेरित हैं और अपने विद्यार्थियों को आत्म निर्भर बनाना उनका मुख्य उद्देश्य है, वो अपने स्कूल के प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र सिंह को इस सफलता का श्रेय देती हैं, क्योंकि उनका सहयोग और हौंसला अफ़ज़ाही बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह जानकारी जारी एक विज्ञप्ति में दी गई।

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