चंडीगढ़ । गणेश चतुर्थी, जो भारत के सबसे प्रमुख पर्वों में से एक है, इस वर्ष बुधवार, 27 अगस्त को बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ सेक्टर-30 चंडीगढ़ में मनाई गई। इसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है और यह भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता तथा बुद्धि और समृद्धि का देवता माना जाता है। पूरे भारतवर्ष में यह पर्व अपार भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। परंपरानुसार, गणेश स्थापना से इसका आरंभ होता है और दस दिनों की पूजा-अर्चना एवं आरतियों के बाद गणेश विसर्जन के साथ इसका समापन होता है।
सेक्टर-30 चंडीगढ़ की संगीता कुमारी की बताया कि इस वर्ष भी गणपति बप्पा हमारे घर विराजमान हुए, जहाँ मैंने अपने परिवार, मित्रों और पड़ोसियों के साथ मिलकर उनका स्वागत बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास से किया। यह अवसर हमारे लिए विशेष रहा क्योंकि इस बार हमारे घर पर गणेश स्थापना का इक्कीसवाँ वर्ष पूरा हुआ। हमारे परिवार ने इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 2005 में की थी और 2011 से इसे चंडीगढ़ में निरंतर उसी भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाते आ रहे हैं।
बप्पा के आगमन की तैयारियाँ कई सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती हैं—घर की सफाई, सजावट की योजना और प्रतिमा का सावधानीपूर्वक चयन। परिवार का प्रत्येक सदस्य इसमें उत्साहपूर्वक भाग लेता है।
पूरे दस दिनों तक प्रतिदिन प्रातः और संध्या आरती की जाती हैं। संध्या आरती के समय पड़ोसी और मित्र भी सम्मिलित होते हैं और सामूहिक रूप से बप्पा की आराधना करते हैं। प्रतिदिन प्रसाद वितरित किया जाता है, जिसमें पारंपरिक मोदक विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं।
इस वर्ष की विशेषता यह रही कि हमने भगवान गणेश को इक्कीस प्रकार के भोग अर्पित किए, जो हमारी भक्ति और कृतज्ञता का प्रतीक हैं। इन विविध व्यंजनों ने न केवल वातावरण को दिव्य ऊर्जा से भर दिया बल्कि उत्सव की गरिमा और उल्लास को भी बढ़ा दिया।
इन दिनों का वातावरण वास्तव में अवर्णनीय होता है—“गणपति बप्पा मोरया” के गगनभेदी जयकारे, मंत्रोच्चार और भक्ति गीत पूरे घर को सकारात्मकता और समरसता से भर देते हैं। दसवें दिन हम पर्यावरण की रक्षा के दृष्टिकोण से घर पर ही मिट्टी के गणेश जी का विसर्जन बड़े पात्र में करते हैं। प्रतिमा के विलीन हो जाने के बाद उस मिट्टी युक्त जल को पौधों और बगीचे में अर्पित कर देते हैं, जो जीवनचक्र और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है।
हमारे परिवार के लिए ये 21 वर्ष आस्था, भक्ति और बप्पा के आशीर्वाद की धरोहर हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान गणेश सबके जीवन से विघ्न दूर करें और सुख-समृद्धि प्रदान करें।
गणेश पूजा का इक्कीसवाँ वर्ष भी धूमधाम से मनाया गया
