कांग्रेस ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ी हुई कीमतों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया

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चंडीगढ़, 12 जुलाई। चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चावला ने कहा कि जहां तक पेट्रोल का सवाल है तो साल 2014 में पेट्रोल प्रति लीटर उत्पादन शुल्क 9 .20 रूपए था जो वर्तमान में 32 .90 रुपए है जिसका अर्थ है पिछले 7 वर्षों में उत्पाद शुल्क में 258% की वृद्धि। 2014 में डीजल पर उत्पाद शुल्क 3.46 रूपए लीटर था, वह वर्तमान में 31.80 रूपए प्रति लीटर है, दूसरे शब्दों में डीजल पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि 820% है।
हर सुबह जब हम अखबार खोलते हैं तो आप पाते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 पैसे या 40 पैसे की बढ़ोतरी हुई होती है, 4 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अब तक 28 गुना वृद्धि हुई है और डीजल में 7 रूपए तथा पेट्रोल में 6.75 रूपए की वृद्धि हुई है । पेट्रोलियम मूल्य निर्धारण एक गतिशील मूल्य निर्धारण नहीं है, यह केवल राजनीतिक मूल्य निर्धारण है। बड़े हुए खर्च के माध्यम से नई मांग सृजन करने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में तत्काल प्रभाव से कम करना चाहिए ताकि लोगों के हाथों में आने वाली आय में वृद्धि हो। नई मांग से व्यवसायों को अपनी अतिरिक्त क्षमता का उपयोग करने और रोजगार सृजन करने के लिए नए निवेश का सृजन करने में मदद मिलेगी।
जिला अध्यक्ष दविंदर गुप्ता ने कहा कि खुदरा मंहगाई दर 6.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है और इसका असर आम जनजीवन पर पड़ रहा है ध्यान रहे कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने महंगाई की अपनी बाहरी सीमा 6 फीसदी तय की है। खुदरा मुद्रास्फीति इस से ऊपर चली गई है और इसके कुछ कारण है। किसी समस्या को हल करने के लिए दो बातों का पालन करना होगा। सबसे पहले किसी को यह स्वीकार करना होगा कि समस्या मौजूद है ।दूसरे किसी को उस समस्या को खुले दिमाग से विशेषज्ञों की सलाह से हल करना होगा । सरकार इस समस्या को स्वीकार करती नहीं दिख रही। जब हम खुदरा मुद्रास्फीति की बात करते हैं तो वित्तमंत्री एक अजीबोगरीब बयान देती है कि मैं प्याज नहीं खाती।
2014 से पहले जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की जाती थी तो भाजपा नेता हर तरह की चालबाजी और नाटक का सहारा लेते थे हम यह कह सकते है कि भारत सरकार पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क के रूप में जो संग्रह करती है राज्य सरकारों की अपेक्षा दो गुना है।

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