चंडीगढ़, 27 जून। पिछले 7 महीने से दिल्ली की सीमाओं पर किसान केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये तीन कृषि कानूनों को वापिस लेने के लिए आंदोलन कर रहे है और वहां पर कई जगह पहले दिन से अब तक दिन रात गुरु का लंगर चल रहा है । इस लंगर सेवा में खाना बनाने के लिए 10 टन लकड़ियों का भरा ट्रक लेकर समस्या समाधान टीम के ओंकार सैनी, कंवर सिंह और सीता राम आज दिल्ली के लिए रवाना हुए ।
इस मौके पर ओंकार सैनी ने कहा कि लकड़ियों की सेवा में मुख्य योगदान सरदार बच्चन सिंह, रजवंत कौर और कंवर सिंह का है। नये कृषि कानूनों के अंतर्गत खाने पीने की चीजों के असीमित भंडारण को कानूनी रूप दे दिया गया है, इससे कालाबाजारी, भ्रष्टाचार और मँहगाई बढ़ेगीI पिछले 6 महीने में सरसों के तेल में दुगने से भी ज्यादा की बढ़ोतरी के पीछे यही कानून है। प्याज के रेट बढ़ने का भी मुख्य कारण हमेशा से ही प्याज का गैर कानूनी भंडारण रहा है और अब हर खाने पीने की चीजों का असीमित भंडारण गरीब और मध्यम वर्ग की पीठ तोड़ कर रख देगी । इसलिए किसानों के ही नही लोक हित में भी इन कानूनों को सरकार द्वारा वापिस ले लेना चाहिए ।
इस पर कंवर सिंह ने कहा कि पिछले सात महीनों से किसान सर्दी, गर्मी, बरसात आदि की परवाह किए बगैर अपने घर बार से दूर दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानून वापिस करवाने के लिए सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे है। किसानों का कहना है कि यह नये कृषि कानून उनके लिए डेथ वारंट जैसे है जो कि उनको खत्म कर देंगे इसलिए हमें यह कानून नहीं चाहिए और सरकार कुछ उद्योगपतियों के इशारे पर इनको वापिस नही ले रही है । प्रजातंत्र में प्रजा की बात ना सुनना गलत हैI सरकार को हठ धर्म छोड़कर कर किसानों से बात करके आंदोलन समाप्त करवाना चाहिए ।
इस पर मनोज शुक्ला ने कहा कि हमारी संस्था हमेशा से लोगों की सहायता के लिए तत्पर रही है और ये लोग तो हमारे अन्नदाता है इसलिए इनकी सेवा सर्वोपरि है। हमने पहले भी आंदोलन में लकड़ियां, खाने-पीने के सामान आदि के अलावा तिरपाल व बरसाती आदि देकर सेवा की है और उसी कड़ी में यह एक और कदम है।
