जैन धर्म के नियम आज और भी अधिक प्रासंगिक: सत्य पाल जैन

चंडीगढ़, 27 अप्रैल। चंडीगढ़ के पूर्व सांसद, भारत सरकार के अपर महासालिसिटर एवं भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सत्य पाल जैन ने कहा कि आज के कोरोना माहामारी के दौर में जैन समाज के सिद्धांत ओर नियम और भी अधिक प्रासंगिक हो गये हैं तथा उनका पालन करने से इस माहामारी से बचने के लिये और अधिक मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन नियमों में मुंह को ढक कर रखना, एकांतवास में स्वाध्याय, शारीरिक दूरी बनाये रखना, शुद्व शाकाहारी भोजन, पैदल चलना तथा आवश्यकता से अधिक सामग्री न इक्टठा करना शामिल है। जैन आज सैक्टर 18 के जैन स्थानक में जैन समाज द्वारा आयोजित, भगवान महावीर जंयती कार्यक्रम को मुख्यतिथि के नाते सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में जैन साधुओं तथा जैन साध्वियों ने भी अपने प्रवचन दिये तथा शारीरिक दूरी सहित कोविड के सभी नियमों का पालन किया गया।
जैन ने कहा कि भगवान महावीर ने हजारों वर्ष पहले वो सब बातें कह दी थी जो आज वैज्ञानिक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी जैन धर्म के अनुयायियों का मुख ढकने का मजाक उडाया करते थे वो सभी आज बार-बार मास्क लगाने की अपील कर रहे हैं तथा मास्क न लगाने वालों को जुर्माना लगाने की बात कर रहे है। उन्होंने कहा कि शारीरिक दूरी तथा एकांतवास, कोरेटाइन या आइसोलेशन का ही दूसरा पक्ष है। जिसका अनुपालन जैन समाज के लोग सदियों से करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज सारी दुनियां में इन्हीं नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है। जिसकी व्यवस्था जैन धर्म के संस्थापकों द्वारा हजारों वर्ष पहले कर दी थी। जैन ने कहा कि जैन समाज सहित भारत के सभी धर्मो के पूर्वजों ने वे सब बातें धार्मिक मान्यताओं में ही शामिल कर दी थी जिनका पालन करना, मानवता को बर्बादी से बचाने के लिये अति आवश्यक है।

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