प्राईवेट स्कूलों की तरफ से फ़ीसों के मामलो में राहत दे कर बड़े स्कूलों व सरकार के लिए कायम की एक मिसाल

चंडीगढ़, 16 अप्रैल। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के साथ जुड़े पंजाब के दर्जनों जिलों के स्कूल प्रबंधकों और माँ बाप ने भाई लालो स्कूल और पेरेंट्स ऐसोसीएशन नामक सांझी जत्थेबंदी बना कर पेरेंट्स को स्कूल फ़ीसों के मामलो में बड़ी राहत दी। जत्थेबंदियों के नुमायंदों जिन में एडवोकेट आर एस बेस, सतनाम दाऊं और हरनेक सिंह जोसन ने प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी । जिस में पिछले साल की सभी फ़ीसों की माफ़ी , नये मौजूदा साल के सालाना दाख़िला चार्जेस माफी और करोना काल में स्कूल बंद रहने दौरान ट्यूशन फ़ीसों में 25 प्रतीशत कटौती के ऐलान किया है। जिक्रयोग है की पंजाब बोर्ड के साथ जुड़े लगभग सभी स्कूलों की फ़ीसों और सालाना खर्च किए सी.बी.एस ई और आई.सी.एस .ई. के स्कूलों से बहुत ज़्यादा कम होती हैं। जिस कारण फ़ीसों का झगड़ा सी.बी.एस ई और आई.सी.एस ई . के स्कूलों के बीच में ही है।
वर्णनयोग्य है कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के साथ सम्बन्धित स्कूल, जिन की संख्या लगभग 9000 के करीब है, पंजाब के गाँवों और कस्बों में मौजूद हैं जिन की आमदन पहले ही बहुत कम है और बड़े स्कूलों, जिन की संख्या सिर्फ़ 1600 ही है, के झगड़ों कारण इन छोटे स्कूलों में फ़ीसों के न आने कारण इन स्कूलों की जान पर बन आयी है । इन छोटे स्कूलों के बंद होने का नुक्सान गरीब विद्यार्थियों को होगा और गरीब माँ बाप को अपने बच्चे बड़े स्कूलों में दाख़िल कराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
सरकार की इसी नीति के कारण आज छोटे स्कूल बंद होने की कगार और हैं और इन बड़े स्कुल , जो कि सिर्फ़ 1600 ही हैं, और सरकार द्वारा प्लांट किये गए इस माफीए को तोड़ने की ज़रूरत है। इन बड़े स्कूलों की लूट लगातार बढ़ती ही जा रही है क्यूं कि इस में राजसी लोगों की हिस्सेदारी है। जिस कारण यह स्कूल सरकारी और अदालती हुक्मों का उल्लंघन करके जान बूझ कर पुरी फ़ीसों को वसूलने के लिए ज़िद्दी हैं और इन स्कूलों ख़िलाफ़ आईं सभी शिकायतें को ज़िला शिक्षा अफसरों की तरफ से रफा दफ़ा कर दिया या संघरशशील माँ बाप को कुछ राहत दे कर मामले को दबाने की कोशिश की। जब कि ऐसी राहत सरकार और स्कूलों की तरफ से सभी माँ बाप को देनी बनती है।
बड़े स्कूलों की कठपुतली बने शिक्षा अफसरों की मिसाल देते सतनाम दाऊं ने बताया कि अदालती और सरकारी हिदायतों का उल्लंघन करने के कारण ओ पी बांसल स्कूल मंडी गोबिन्दगढ़, ज़िला फतहगढ़ साहब की ऐफीलीएशन कैंसल कर दी गई थी, इसी तर्ज पर के एक ओर स्कूल गोबिन्दगढ़ पब्लिक स्कूल जिसकी महीनावार फिस 3000 से घटा कर 1300 रुपए कर दी गई थी। इन दोनों स्कूलों के प्रेशर के चलते ज़िला शिक्षा अफ़सर ने सरकारी और अदालती हुक्मों की धज्जियाँ उड़ाते हुए और मनमानी करते हुए पहले स्कूल को फिर से बहाल कर दिया और दूसरे स्कूल की फिस फिर से 3000 रुपए कर दी।
इस के इलावा ज़िला शिक्षा अफ़सर मोहाली ने अदालती हुक्मों के ख़िलाफ़ जाते हुए एक विद्यार्थी की पढ़ाई को बंद ही कर दिया। जिस की शिकायत सतनाम दाऊं की तरफ से मुख्य मंत्री पंजाब को की गई थी परन्तु काफ़ी समय बीत जाने के बावजूद पंजाब सरकार की तरफ से इस सम्बन्ध में कोई एक्शन नहीं लिया गया। जिस से सरकार और स्कूल माफीए की मिलीभुगत का पता लगता है।
एक ओर ताज़ा उदाहरण मुख्य मंत्री पंजाब के अपने जिले की है जिस में भुपिन्दरा इंटरनैशनल स्कूल, पटियाला के एक माता पिता को डी सी दफ़्तर में धरना देने की नौबत तक आ गई थी। जिस में स्कूल की तरफ से फीस के झगड़े कारण दूसरी जमात की छात्रा के एग्जाम भी नहीं लिए और न ही आगे वाली क्लास में दाख़िला दिया। बार बार शिकायतें करन और आधिकारियों की तरफ से स्कूल का पक्ष दबाया गया। जिस कारण माँ बाप को बच्चे समेत कल डीसी दफ़्तर और सामने मरनवरत और बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा। जिस से यह पता लगता है कि सारा सरकारी तंत्र स्कूल माफीए के हक में खडा है।
परंतु माँ बाप की जत्थेबंदियाँ की तरफ से पिछले हफ्ते लुधियाने में मीटिंग करके अमीर बड़े स्कूलों व् पंजाब सरकार को चेतावनी दी गयी कि यदि वह स्कूल अपनी आमदन और ख़र्च को दिखाते खाते सार्वजनिक कर दें तो उन स्कूलों के स्टाफ के सभी खर्च किए माँ बाप की जत्थेबंदियाँ देने को तैयार हैं। परन्तु यह स्कूल ऐसा नहीं करते क्यों कि यह स्कूल पहले ही करोड़ों रुपए के सालाना लाभ में हैं।
आज उपरोक्त जत्थेबंदी की तरफ से मुख्य मंत्री और शिक्षा मंत्री पंजाब को पत्र लिख कर माँग की है कि छोटे स्कूलों की तर्ज़ और बड़े स्कूलों को भी माँ बाप को राहत देनी चाहिए और सरकार को इस में सख़्त फ़ैसला ले कर यह राहत लागू करवानी चाहिए। इस के साथ ही छोटे स्कूल जिन्होंने माँ बाप को फ़ीसों में बड़ी राहत दी है को बिलडिंग सेफ्टी, फायर सेफ्टी, वाटर प्योरीफिकेशन सर्टिफिकेट, बसें के रोड टैकस, पर्मिट, प्रापरटी टैकस और ओर टैकसें से सिवाय दी जाये।
इस मौके कर जत्थेबंदियों के नुमायंदों सहित माँ बाप के नुंमायन्दे जिन में हिरदेपाल औलख, एडवोकेट लवनीत ठाकुर, स्कूलों के नुमइन्दे रणजीत सिंह, इकबाल सिंह, मनीश सोनी उपस्थित थे।

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