यूटी कर्मचारियों ने बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ किया विशाल रोष धरना, गर्वनर हाऊस की तरफ किया मार्च

चण्डीगढ़, 7 अप्रैल। चण्डीगढ़ प्रशासन तथा नगर निगम व अन्य संस्थाओं के कर्मचारियों द्वारा फैड़रेषन ऑफ यूटी इम्पलाईज एण्ड वर्करस चण्डीगढ़ के आह्वान पर बुधवार को बिजली दफ्तर सैक्टर 17 के नजदीक विषाल रोष धरना व प्रर्दषन किया गया। इस प्रर्दशन में यूटी तथा एम सी के अलग अलग विभागों के कर्मचारियों के इलावा सैक्टरों की वैल्फेयर ऐसोसिशन, पेंडू संघर्ष कमेटी, भारतीय संगठनों के कर्मचारियों तथा केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने हिस्सा लिया तथा निजीकरण के खिलाफ जोरदार आवाज बुलन्द की गई। रैली के बाद प्रर्दशनकारीयों ने गर्वनर हाऊस की तरफ मार्च शुरू किया। मार्च को सैक्टर 17 की लाईटों पर बेरीकैड लगा कर रोकने की कोषिष की गई जिसका कर्मचारियों ने कड़ा प्रतिरोध किया तथा सड़क पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। उसी समय एसडीएम सैंटरल ने आकर ज्ञापन लिया।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी फैड़रेशन के सचिव तथा फैड़रेशन ऑफ यूटी इम्पलाईज एण्ड वर्करज चण्डीगढ़ के महासचिव गोपाल दत्त जोषी, फैड़रेशन के प्रधान रघबीर चन्द, वरिष्ठ उप प्रधान राजिन्द्र कटोच, उप प्रधान ध्यान सिंह, संयुक्त सचिव अमरीक सिंह व हरकेष चन्द ने मुनाफे में चल रहे बिजली विभाग का निजीकरण करने के लिए चण्डीगढ़ प्रशासन तथा केन्द्र सरकार की कड़ी निन्दा की तथा चण्डीगढ़ की आम जनता को प्रशासन की नीति का कड़ा विरोध करने की अपील करते हुए कहा कि बिजली विभाग में सामान का प्रबन्ध न करने तथा 1780 संषोधित पोस्टों में से सिर्फ 1000 से कम कर्मचारियों के बावजूद उपभोक्ताओं को सस्ती तथा निर्विघ्न बिजली सप्लाई दी जा रही है। चण्डीगढ़ की जनता को बिजली की दरों में पिछले पांच साल से कोई बढ़ोतरी न करने तथा इस साल बिजली की दरें घटाने की बात को गंभीरता से सोचना चाहिए जो बिजली कर्मचारियों की कर्मठता तथा कड़ी मेहनत का नतीजा है। इसलिए आम जनता को निजकरण के खिलाफ हल्ला बोलना समय की ऐतिहासिक जरूरत है। उन्होंने कहा कि चण्डीगढ़ प्रषासन द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाकर निजीकरण के लिये नियुक्त नोडल अधिकारी की अनुपस्थिति में बिड़ खोलने से कई शंकाए पैदा होती है जिसकी उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है। देष के प्रमुख संगठनों तथा औद्योगिक क्षेत्र के संगठनों के ऐतराज के बावजूद प्रषासन ने गैर कानूनी तौर पर बिड को खोल दिया गया जिसे तुरंत रद्द करने की जरूरत है।
यूटी एम सी पैंशर्नस एसोसिेएशन के प्रधान राम सरूप, मनमोहन सिंह, भीम सेन, उजागर सिंह मोही, सुच्चा सिंह ने प्रशासन की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि अभी कंपनी बनी भी नहीं है लेकिन उसको 100 प्रतिषत बेचने के लिए बिड़िग खोली गई है जबकि इस सारी प्रक्रिया को करने से पहले कर्मचारियों तथा उपभोक्ताओं से सुझाव व ऐतराज लेने चाहिए थे तथा ट्रांसफर पॉलिसी की अधिसूचना जारी करनी चाहिए थी तथा स्टेट ट्रांसमिषन यूनिट व स्टेट लोड़ डिस्पेच सैंटर का गठन करना चाहिए था। जिसकी प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई है लेकिन बीडिंग खोल दी गई जो सरासर धोखा तथा एकतरफा फैसला हैं जिसमें गैर जरूरी जल्दबाजी की गई है। उन्होंने कहा कि बार बार अपील करने तथा ज्ञापन देने के बावजूद कर्मचारियों के हितों को भी सुरक्षित रखने के लिए प्रषासन चर्चा करने को भी तैयार नहीं है।
स्ंयुक्त कर्मचारी मोर्चा, चण्डीगढ़ के कन्वीनरों राजिन्द्र कुमार, सुखबीर सिंह, विपिन शेर सिंह, सीटीयू के प्रधान धर्मेन्द्र राही, ऐजुकेषन के आगू रणबीर सिंह राणा, रणजीत मिश्रा, अषोक कुमार, यूटी पावरमैन यूनियन के सुखविन्द्र सिंह, गुरमीत सिंह, कषमीर सिंह, पब्लिक हैल्थ के हरपाल सिंह, इंडियन कौंसल की आगू रेखा शर्मा, नसीब सिंह, हरजिन्द्र सिंह ने सरकार की निजीकरण की नीति पर करारा हमला करते हुए केन्द्र सरकार की तीखी निन्दा की तथा आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार अपने वायदे से मुकर गई है। केन्द्र सरकार बार बार सिर्फ घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण की बात कर रही है तथा सरकारी या निजी कंपनी की मनोपली खत्म कर कई कंपनीयों को लाईसैंस देकर कंपीटीषन की बात कर रही है लेकिन चण्डीगढ़ में बिजली विभाग को मुनाफे में चलने के बावजूद निजी कंपनीयों को बेचा जा रहा है। उन्होंने सरकार की करनी व कथनी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर बिजली विभाग का 100 प्रतिषत शेयर निजी मालिको को बेच दिया जाएगा तो कंपीटिषन की बात कहा रह जाती है। उन्होने बिडिंग प्रोसैस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि एक बार आरएफपी बेचने के बाद अंतिम दिनांक से कम से कम 45 दिन पहले आरएफपी में बदलाव किया जा सकता है लेकिन प्रषासन बिडिंग के लिए छः कंपनियों के आवेदन के बाद आरएफपी में बदलाव किया तथा 10 दिन के अंदर ही नयी कंपनीयों को उसमें शामिल कर लिया नियमों को ताक में रख कर किया गया यह फैसला कर्मचारियों तथा जनता के साथ सरासर धोखा है।
आल इंडिया किसान सभा के आगू सुखविन्द्र सिंह सेखों, बलबीर सिंह मुसाफिर, सीटू चण्डीगढ़ के प्रधान कुलदीप सिंह, फॉसवेक के प्रधान बलजिन्द्र सिंह बिटू तथा पेंडू संघर्ष कमेटी के प्रधान दलजीत सिंह पलसौरा, महासचिव गुरप्रीत सिंह सोमल, रैजीडैन्ट वैल्फेयर के प्रदीप चोपड़ा, ऐटक के देवी दयाल व राजकुमार, पंजाब बोर्ड महासंघ के गुरदीप सिंह, ओम प्रकाश, इंटक के कुलबीर सिंह तथा किसान नौजवान मोर्चा के आगू कृपाल सिंह ने कहा कि विभाग को बैस्ट यूटिलिटी का अवार्ड भी लगातार मिल रहा है बिजली की दर भी पडौसी राज्यों व केन्द्रषासित प्रदेषों से कम है। ट्रांसमिषन व डिस्ट्रीब्यूषन (टी एण्ड डी) लास भी बिजली मंत्रालय के तय मानक 15 प्रतिषत से काफी कम है। पिछले 5 साल से विभाग लगातार 150 करोड से 250 करोड़ तक मुनाफा कमा रहा है। विभाग का वार्षिक टर्न ओवर 1000 करोड़ के करीब है जिस हिसाब से कम से कम कीमत 15000 करोड़ से अधिक बनती है लेकिन ताजुब्ब की बात है कि बोली सिर्फ 174 करोड की लगाई जा रही है। जमीन व इमारतों का किराया सिर्फ एक रूपया प्रति महिना, 157 करोड़ रूप्या जनता का जमा एसीडी निजी मालिकों को देने का फैसला, 300 करोड़ से अधिक कर्मचारियों का फण्ड निजी ट्रस्ट के हवाले करने की बात की जा रही है जिसे किसी भी हालत में बर्दास्त नहीं किया जा सकता।
सभी वक्ताओं ने धरने व प्रर्दशन को चण्डीगढ़ प्रशासन को चेतावनी दी की अगर निजीकरण का प्रोसेस शीघ्र नहीं रोका गया तो सभी कर्मचारी संगठन संयुक्त तौर पर तीखे संघर्ष का ऐलान करेगे। वक्ताओं ने बिजली कर्मचारियों द्वारा 20 अप्रैल 2021 को की जा रही हड़ताल का पूर्ण समर्थन का ऐलान किया।

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