हरियाणा को बनाएंगे क्राइम फ्री स्टेट: अनिल विज

चण्डीगढ़, 2 अप्रैल। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने संगठित अपराध के मामलों की समीक्षा करते हुए कहा कि पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को और मजबूत बनाया जाएगा ताकि अंतरराज्यीय गैंगस्टरों की आपराधिक गतिविधियों की निगरानी करते हुए उन पर प्रभावी रूप से शिकंजा कसा जा सके।
विज कल देर सायं यहां पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति तथा अपराध पर अंकुश लगाने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।
एसटीएफ की कार्यप्रणाली पर संतोष जाहिर करते हुए गृहमंत्री ने एसटीएफ के लिए नए आधुनिक वाहन, नवीनतम तकनीक के उपकरण सहित सॉफटवेयर इत्यादि मुहैया करवाने के लिए सैद्धांतिक रूप से स्वीकृति भी प्रदान की। बैठक में जानकारी दी गई कि हरियाणा में संगठित अपराधों पर शिकंजा कसने के लिए विधानसभा में हरियाणा संगठित अपराध नियंत्रण (हरकोका) विधेयक को पारित कर राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए केन्द्र सरकार को भेजा हुआ है जहां से मंजूरी मिलते ही इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
अपराध मामलों की समीक्षा करते हुए विज ने कहा कि सभी क्राइम आपस में जुडे होते हैं। कोई भी अपराध छोटा या बडा नही होता। अगर शुरू से ही अपराध को रोकने के प्रयास किए जाएं तो आगे चलकर इसके बेहतर परिणाम मिलते हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि राज्य सरकार की मंशा अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर अपराध पर रोक लगाई जाए।
उन्होंने कहा कि अपराधियों और कानून का उल्लंघन करने वालों में पुलिस का भय होना चाहिए जबकि जनता का पुलिस पर विश्वास होना चाहिए। अपराधियों में पुलिस का भय व रूतबा तभी बढेगा जब पुलिस अपनी कार्यक्षमता को बढाते हुए पब्लिक के साथ मेलजोल बढाएगी। श्री विज ने कहा कि किसी भी सरकार की छवि को बनाने में पुलिस विभाग की अहम भूमिका होती है। इसे ध्यान में रखते हुए अपराध की रफतार पर लगाम लगाकर नागरिकों को समय पर इंसाफ सुनिश्चित करने के लिए पुलिस द्वारा सभी संभव प्रयास किए जाने चाहिए।
विज ने चोरी, सेंधमारी, गृहभेदन व वाहन चोरी जैसे मामलों को सफलतापूर्वक सुलझाने के मामलो की समीक्षा भी की। साथ ही अपराध के सभी मामलों को मुस्तैदी से काम करते हुए सुलझाने के आदेश भी दिए ताकि आम जनता को राहत मिल सके। जनता के सहयोग से पुलिस आपराधिक गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगा सकती है इसलिए पुलिस अधिकारी जनता से बेहतर तालमेल बनाएं। उन्होंने इन्वेस्टिगेशन के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए ताकि अपराधी को सजा व पीडित का समय पर न्याय मिल सके।

जन शिकायतों का निपटान टाइम बाउंड हो:
बैठक की समीक्षा करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि कई दफा पुलिस जनता की समस्याओं का समय पर निपटान नहीं कर पाती है जोकि चिंता का विषय है। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि शिकायतों को निपटाने के लिए टाइम बाउंड करें और उसी समय अवधि में उसको हल करें। जिन जिलों में क्राइम के लंबित मामलों की संख्या ज्यादा थी उन जिलों के एसपी को फटकार भी लगाई।

जल्द भरी जाएंगी पुलिस की रिक्तियां:
बैठक में बताया गया कि हर साल पुलिस विभाग से 800 कर्मी रिटायर हो जाते हैं तथा 200 कर्मियों की मृत्यु हो जाती है। इस वर्ष लगभग 7500 रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया हरियाणा राज्य कर्मचारी आयोग के माध्यम से की जानी हैं। इस पर गृहमंत्री ने पुलिस विभाग में इन पदों की भर्ती प्रक्रिया को अतिशीघ्र सुनिश्चित करवाने का आश्वासन भी दिया।
प्रशासनिक एवं इंफ्रास्ट्रक्चर मामलों की समीक्षा करते हुए विज ने उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए वाहनों, आधुनिक उपकरणों और पुलिस के क्षमता निर्माण के महत्व को रेखांकित करते हुए आश्वासन दिया कि इस दिशा में राज्य सरकार की और से पूरा सहयोग मिलेगा।

शुरू होने जा रहा डायल-112:
विज ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही इमरजैंसी रिस्पांस एंड स्पोर्ट सिस्टम 112 शुरू होने जा रहा है जिससे लोगों को आपातकालीन पुलिस व अन्य सेवाएं उपलब्ध होगी। इसके लिए 630 नई इनोवा गाडियां खरीदी जा चुकी हैं जिन्हे जल्द ही प्रभावी सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए जनता की सेवा में समर्पित कर दिया जाएगा।
डीजीपी हरियाणा मनोज यादव ने बैठक में हरियाणा पुलिस की गतिविधियों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मंत्री को अवगत कराया कि पुलिस ने पिछले 10 दिनों में 2 बडे अपराधियों को पकडा है, जिनकी अर्जित संपति को कुर्क करवाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय को लिखा गया है।
बैठक में ए.सी.एस होम राजीव अरोड़ा, डीजीपी हरियाणा मनोज यादव, डीजीपी क्राइम मोहम्मद अकिल, एडीजीपी आधुनिकीकरण एवं कल्याण आलोक कुमार रॉय, एडीजीपी प्रशासन ए.एस चावला, एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर नवदीप सिंह विर्क, एडीजीपी सी.ए.डब्ल्यू कला रामचंद्रन, आईजीपी लॉ एंड ऑर्डर, राकेश आर्य मुख्य रूप से उपस्थित थे। वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी रेंज एडीजीपी/आईजीपी, पुलिस आयुक्त और जिला पुलिस अधीक्षकों ने भागीदारी की।

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