कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन के साथ की मुलाकात

नई दिल्ली, 11 मई। प्रवासी मामले, ग्रामीण विकास एवं पंचायत संबंधी कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल द्वारा आज यहाँ साउथ ब्लॉक में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन के साथ मुलाकात करके प्रवासी भारतीयों से सम्बन्धित अहम मद्दे उठाए गए।
मीटिंग के दौरान धालीवाल द्वारा अमृतसर हवाई अड्डे से कैनेडा, अमरीका, आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के लिए सीधी उड़ाने शुरू करने और चंडीगढ़ और अमृतसर हवाई अड्डे को भी सभी ज़रूरी सहूलतों वाला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाऐ जाने की माँग की गई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और इमीग्रेशन काऊंटरों पर फोकस करते हुए सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाए जाने चाहिएं जिससे प्रवासी भारतीयों को इन काऊंटरों पर पेश समस्याओं से राहत मिल सके। लोगों को ट्रैवल वीज़ा लेने और कागज़ों की तस्दीक करवाने में दिक्कत आ रही है। इसके सम्मुख ज़रूरी हलातों में पंजाबी भाईचारे के लिए 24X7 हेल्पलाइन होनी चाहिए। इसके साथ ही ओवरसीज़ सिटीज़नस ऑफ इंडिया (ओ.सी.आई) के वीज़ों की कार्यवाही तेज़ी से करने की सिफ़ारिश की जाती है।
उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय भाईचारे से सम्बन्धित मुद्दों को समयबद्ध ढंग से हल करने के लिए भारत सरकार के स्तर पर सिंगल विंडो शिकायत निवारण प्रणाली की ज़रूरत है। विदेश मंत्रालय में एक हैल्पडैसक स्थापित किया जा सकता है, जो प्रवासी भारतीयों को मदद लेने के योग्य बनाने के लिए 24 घंटे उपलब्ध हो। इस हेल्पडेस्क नंबर का विदेश मंत्रालय के सभी दूतावासों के द्वारा व्यापक तौर पर प्रचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा भारत लौटने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए भारतीय पुलिस से कोई पुलिस तस्दीक नहीं होनी चाहिए। इसकी बजाय, यह तस्दीक मूल देश से की जानी चाहिए। इसी तरह जो भारतीय निवासी राजनैतिक शरण अधीन हों उनको अपने देश वापस आने के लिए कानून में एक विशेष व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐन.आर.आईज़ से सम्बन्धित जायदादों पर लगातार कब्ज़ा होने का ख़तरा रहता है। इसलिए लिमीटेशन एक्ट में प्रतिकूल कब्ज़े की 12 साल की धारा से बचने के लिए विशेष राहत के लिए अपील की गई।
उन्होंने कहा कि यदि एक साल की मियाद के लिए पैसे का लेन-देन नहीं किया जाता है तो बैंक खाते बंद हो जाते हैं, इसलिए प्रवासी भारतीयों को खातों को फिर सुरजीत करने की इजाज़त और इस एक साल सम्बन्धी शर्त से छूट दी जाये। बीमा पॉलसी की परिपक्वता का लाभ लेने के लिए एक यह शर्त है कि एन.आर.आई की तरफ से भारत में बैंक खाता खुलवाया जाये। इस शर्त को ख़त्म किये जाने की ज़रूरत है।
इसके साथ ही प्रवासी भारतीयों को अपने हथियार लायसैंसों को आनलाइन रिन्यू के योग्य बनाने के लिए आर्मज़ एक्ट में एक विशेष प्रावधान किया जाये। उन्होंने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीय भाईचारा 1990 के दशक से दोहरी नागरिकता की माँग कर रहा है परन्तु यह अभी भी मंजूरी के लिए लम्बित है जिसको स्वीकृत किया जाये। उन्होंने कहा कि ओ.सी.आई कार्डधारक भारत में ज़मीन नहीं खरीद सकते। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री से अपील की कि इस सम्बन्धी विशेष उपबंध लागू किये जाएँ। केंद्रीय मंत्री मंडल द्वारा प्रस्तावित प्रवासी भारतीयों को वोटिंग के अधिकार होने चाहिएं। ऑनलाइन वोटिंग की सुविधा प्रवासी भारतीयों को प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपातकालीन स्थिति में भारतीयों को विदेशों में से बाहर निकालने में मदद के लिए विदेशों में रह रहे भारतीयों के सही और स्पष्ट डाटा की ज़रूरत होती है और इस समय कोई डाटा आसानी से उपलब्ध नहीं है। उन्होंने अपील की कि विदेशों में भारतीय मिशनों को भारत के नागरिकों का शहर अनुसार डेटाबेस रखने के लिए कहा जाये।
अन्य अहम मुद्दों संबंधी बात करते हुये धालीवाल ने कहा कि विवाह शादियों से सम्बन्धित मामलों में धोखाधड़ी की घटनाएँ नियमित तौर पर रिपोर्ट की जाती हैं। इस पर रोक लगाने के लिए ज़रूरी है कि कानून में अपराधियों को वापस लाने का विशेष उपबंध करवाया जाये। इसी तरह एक विदेशी देश के अधिकार क्षेत्र में भारतीय कौंसलेटों के अलग-अलग सेवा देने के नियम हैं। उदाहरण के लिए, वैनकूवर कौंसलेट जनरल दफ़्तर को असली पासपोर्ट जमा करवाने की ज़रूरत होती है जबकि टोरांटो दफ़्तर ऐसी माँग नहीं करता। उन्होंने यह अपील की कि प्रवासी भारतीयों और ओसीआईज़ को ऐसी परेशानियों से बचाने के लिए किसी देश के अंदर भारतीय कौंसलेटों के नियमों की एकसारता होनी चाहिए।
इमीग्रेशन से सम्बन्धित पासपोर्ट और वीज़ा मुद्दों को कई अदारों की बजाय भारत सरकार के पास सिंगल विंडो पर समयबद्ध तरीके से हल होना चाहिए। इसी तरह धोखेबाज़ ट्रैवल एजेंटों के मंसूबों को रोकने के लिए एक विशेष सैल स्थापित किया जा सकता है जो लोगों की विदेशों में तस्करी करते हैं और फिर उनको बीच में छोड़ देते हैं। नागरिकों के इस शोषण के लिए इन एजेंटों /एजेंसियों के लिए सख़्त सज़ाओं की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि कई बार दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में प्रवासी भारतीयों के मृतक शरीर को देश वापस लाना पड़ता है। ऐसे मृतक शरीर को भारत सरकार की तरफ से अपने खर्चे पर 24 घंटों के अंदर वापस लाने की व्यवस्था करनी चाहिए और इस सम्बन्धी औपचारिक कार्यवाहियों को बाद में भी निपटाया जा सकता है।
धालीवाल ने बताया कि मुरलीधरन की तरफ से इन सभी मुद्दों के हल के लिए रचनात्मक समर्थन दिया गया और अन्य मंत्रालयों से सम्बन्धित मुद्दों को प्रमुखता से विचारने के लिए भी भरोसा दिया गया।

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