स्कूलों की मनमानी के खिलाफ लामबंद हुए पेरेंट्स, फीस नहीं भरने पर कई बच्चों को निकाला

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चंडीगढ़, 22 मार्च । चंडीगढ़ और मोहाली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी की विरोध में सोमवार को छात्रों के पेरेंट्स ने ताली-थाली बजाकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं। कई स्कूलों से फीस जमा नहीं कराने पर बच्चों को स्कूल से निकाल दिया है। कई स्कूलों में बच्चों के एग्जाम नहीं लिए जा रहे हैं। इस मुद्दे पर सेक्टर 44 में पेरेंट्स ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।पंजाब अगेंस्ट करप्पशन के प्रधान सतनाम सिंह, पेरेंट्स यूनिटी फार जस्टिस चण्डीगढ़ के प्रधान मनीश सोनी और मोहाली पेरेंट्स ऐसोसीएशन के प्रधान हिरदेपाल सिंह और यूनाईटड पेरेंट्स ऐसोसीएशन के प्रधान अंजलि सिंह ने सांझा बयान जारी करते कहा कि इस समय पर अदालत के हुक्मों के बावजूद निजी स्कूलों की फ़ीसों के मामलो में पूरी धक्केशाही जारी है।
यूनाइटड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रधान अंजलि सिंह ने कहा कि इस बारे में लगातार शिकायतें मिलने और ईमेल के बावजूद शिक्षा विभाग चंडीगढ़ और मोहाली, रोपड़, फतेहगढ़, शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ने इन घटनाओं का कोई नोटिस नहीं लिया। उन्होंने कहा कि सरकार के शिक्षा अधिकारी सिर्फ प्राइवेट स्कूलों की कठपुतली बने हुए हैं। इसके अलावा गवर्नर के कहने के बावजूद भी उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा। पेरेंट्स ने कई बार मेल भेजकर समय लेने की कोशिश भी की, एडवाइजर ने भी बिना मिले नीचे भेज दिया
अंजलि सिंह ने कहा कि सरकार ने अब तक इन स्कूलों की बैलेंसशीट या सही-सही ट्यूशन फीस की जानकारी भी नहीं ली। वे कोर्ट का आदेश का आदेश भी लागू नही करा सके। पेरेंट्स ने RTI के द्वारा बैलेंसशीट हासिल करके स्कूलों के करोड़ों रुपए सालाना के सरप्लस का पता करके सार्वजनिक किया है। इसके बाद चंडीगढ़ के शिशु निकेतन और मंडी गोबिंदगढ़ के ओम प्रकाश बांसल स्कूल के करोड़ा रुपयों का भी पता लगाया था। ओम प्रकाश बांसल स्कूल की मान्यता भी रद्द करवाई थी।

31 मार्च तक अल्टीमेटम:

पेरेंट्स ने कहा कि प्रशासन को 31 मार्च तक का अल्टीमेटम दे रहे हैं। अगर तब तक कोई सुनवाई नहीं होती तो आधिकारियों को सांकेतिक रोश के तौर पर ताले भेजेंगे। जिससे वह मूकदर्शक बने शिक्षा विभाग को ताले लगा कर बंद कर दें। साथ ही देश की सभी पेरेंट एसोसिएशन से अपील करेंगे कि वो सभी मुख्यमंत्री, गवर्नर और देश के प्रधानमंत्री को ताले भेजें, ताकि देश में बेकार हो चुके शिक्षा विभाग को ताले लगाए जा सकें ।

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