हिजाब पर जो आज चुप हैं, देश उनसे भी मांगेगा हिसाब: डॉ. चौहान

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करनाल, 14 फरवरी। राजनीति देश के लिए होनी चाहिए, राजनीति के लिए देश नहीं। सुविधा और मतलब परस्त राजनीति देश के हित में नहीं है। दो समुदायों में मजहबी उन्माद पैदा कर देश को बांटने की अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा हो जाने के बावजूद कुछ राजनेता अपना वोट बैंक खिसक जाने के डर से इस पर मुंह खोलने से बच रहे हैं। उन्हें देश में पैदा हो रहे चिंताजनक हालात से ज्यादा रामपुर के विकास की चिंता है। यह पेशा तो हो सकता है, लेकिन राजनीति नहीं हो सकती। जिनके लिए देश की एकता-अखंडता से ज्यादा वोट बैंक का तुष्टिकरण महत्वपूर्ण है, उन्हें राजनीति से हट जाना चाहिए। यह बात हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वह हिजाब विवाद पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी की चुप्पी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।
डॉ. चौहान ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की महाभारत पर लिखी कविता की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा कि राष्ट्रकवि की पंक्तियां –“जो रहे तटस्थ समय लिखेगा उनका भी इतिहास” एक कालजई विचार है। यह हर काल और परिस्थितियों में लागू रहेगा। धर्म-अधर्म, न्याय-अन्याय और सत्य-असत्य के युद्ध में कोई तीसरा पक्ष नहीं होता। यह जीवन का वह कर्मक्षेत्र है जिसमें मनुष्य को कोई एक पक्ष लेना ही पड़ता है। इसमें अपने कर्तव्यों से बचने वाला कायर कहलाता है और इतिहास उसे कभी माफ नहीं करता। हिजाब मुद्दे पर चुप्पी साधने वाले नेताओं को भी यह समझ लेना चाहिए।
डॉ. चौहान ने कहा कि चुनाव के ऐन वक्त पर शुरू हुई यह शर्मनाक मांग कोई संयोग नहीं बल्कि एक महाप्रयोग है। इस मांग के पीछे सक्रिय पाकिस्तान, खालिस्तान और देश में छिपे गद्दारों के गठजोड़ का खुलासा हो चुका है। यह विवाद दुर्भाग्यपूर्ण तो है, लेकिन कीचड़ जब जमा हो जाता है तो उसी से कमल भी खिलता है। इस विवाद ने देश में समान नागरिक संहिता की जरूरत को एक बार फिर से रेखांकित किया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी द्वारा की गई घोषणा स्वागत योग्य है। अन्य राज्यों को भी इसका अनुकरण करना चाहिए। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत के ही एक राज्य गोवा में यह समान नागरिक संहिता पहले से लागू है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि हिजाब की मांग सड़कों व सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़ने की जिद जैसी ही है। इसके पीछे कोई धार्मिक भावना नहीं, बल्कि यह अपने शक्ति प्रदर्शन का एक राजनीतिक एजेंडा है। संविधान के अनुसार सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त है, लेकिन यह विशेष समुदाय कुछ ज्यादा ही समान दिखना चाहता है। यह समुदाय व्यवस्था को डरा कर संविधान की मनमानी व्याख्या करना चाहता है ताकि जिहाद को एक वैधानिक कवच मिल सके। देश को इनके काले मंसूबों से सावधान रहना होगा।

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