संस्कृत अध्यापकों से संबंधित सेवा नियमों में किए गए संशोधनों को लेकर संस्कृत अध्यापक संघ ने शिक्षा मंत्री का जताया आभार

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चंडीगढ़, 10 फरवरी। हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ ने आज शिक्षा मंत्री कंवर पाल के यमुनानगर निवास स्थान पर जाकर हाल ही में संस्कृत अध्यापकों से संबंधित सेवा नियमों में किए गए संशोधनों के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि 8 फरवरी को हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में हरियाणा राज्य शिक्षा स्कूल कॉडर (ग्रुप-बी) सेवा नियम-2012, मेवात जिला स्कूल शिक्षा (ग्रुप-बी) सेवा नियम-2012 और हरियाणा स्कूल शिक्षा (ग्रुप-सी) राज्य कॉडर सेवा नियम, 2021 में संशोधन सम्बंधी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई थी। इन संशोधनों के बाद अब शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा शास्त्री और आचार्य को नियमित बी.एड. और एम.ए. संस्कृत के समकक्ष माना जाएगा। शिक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है, जिसमें हमारे वेद, उपनिषद व अन्य धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान निहित है। राज्य सरकार का सदैव यह प्रयास रहेगा कि यह ज्ञान लोगों तक पहुचें। संस्कृत भाषा पर शिक्षा शास्त्री व आचार्य जैसी शैक्षणिक योग्यता रखने वालों की पकड़ अन्य लोगों की तुलना में अधिक होती है।
हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ की लम्बे समय से यह मांग थी जिसको सरकार ने माना है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को और अधिक बढ़ावा मिलना चाहिए, जिसके लिए सरकार प्रयासरत है और जल्द की संस्कृत अध्यापकों की पदोन्नति भी जाऐगी। हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि यह मांग बहुत लंबे समय से अटकी हुई थी, जिसे मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल व शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने गंभीरता से लेकर पूरा कर एक ऐतिहासिक कार्य किया है। अध्यापक संघ ने कहा कि पहले की सरकारों ने इस विषय को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया और न ही कभी इस विषय को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। इस दौरान संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉक्टर दिनेश शास्त्री भी उपस्थित रहें।
इस अवसर पर हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ के शिक्षा मंत्री का पगड़ी बांध कर व स्मृति चिह्न देकर मान-सम्मान किया। इस अवसर संघ के संरक्षक रोशन लाल, महासचिव रामफूल, कोषाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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