चंडीगढ़,7 फरवरी। केन्द्र सरकार के निर्देश पर बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने के खिलाफ विपक्षी दल, ट्रेड यूनियन, जन प्रतिनिधि व कर्मचारी संगठन लामबंद हो गए हैं। बिजली निजीकरण के खिलाफ 15 फरवरी को सेक्टर 17 शिवालिक होटल से स्टे पार्क में मास नागरिक धरना दिया जाएगा। इसके बाद राजनीतिक दल, किसान जत्थेबंदियां, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, ट्रेड यूनियन, काउंसलर का संयुक्त शिष्टमंडल यूटी चंडीगढ़ प्रशासक को ज्ञापन सौंपेंगे। यूटी पावरमैन यूनियन चंडीगढ़ निजीकरण के आम जनता पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी देने के लिए धर धर जाकर पर्चे वितरित किए जाएंगे। संसद, मेयर, काउंसलर व सभी राजनीतिक दलों के आगुओं को ज्ञापन दिए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि यूटी पावर मैन यूनियन ने चंडीगढ़ बिजली विभाग को कोड़ियों के भाव में निजी हाथों सौंपने के खिलाफ 21 फरवरी रात 11 बजे से तीन दिवसीय हड़ताल करने का ऐलान किया हुआ है। बिजली निजीकरण के खिलाफ सोमवार को सेक्टर 36 ए स्थित पब्लिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सेमिनार किया गया। जिसमें सर्वसम्मति से पारित किए गए प्रस्ताव में सभी नियमों कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए मुलाजिमों की भारी कमी के बावजूद प्रति वर्ष करोड़ों का मुनाफा कमाने और उपभोक्ताओं को सस्ती एवं अबाधित बिजली देने वाले बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने के फैसले की घोर निंदा की।
सेमिनार में बिजली निजीकरण के खिलाफ 21 फरवरी से शुरू हो रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का पुरजोर समर्थन करने का फैसला लिया गया। सेमिनार में बिजली निजीकरण के बाद आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी देने के लिए सभी सेक्टरों में उपभोक्ता सभाए करने का फैसला भी लिया गया।
सेमिनार में कांग्रेस पार्टी के प्रधान सुभाष चावला, आम आदमी पार्टी के प्रधान प्रेम गर्ग व वरिष्ठ उप प्रधान विक्रम धवन, सीपीआई के सचिव राजकुमार, सीपीआईएम के नेता मोहम्मद शहनाज गोरशी, आरएमपीआई के नेता इन्द्रजीत सिंह गरेवाल, अकाली दल के प्रधान व प्रार्षद हरप्रीत सिंह बुटरेला, कांग्रेस पार्टी की पार्षद गुरबख्श कौर रावत, आम आदमी पार्टी के पार्षद दमनप्रीत सिंह, फॉसवैक के चेयरमैन बलजिन्द्र सिंह बिट्टू, महासचिव जीएस गोगिया, प्रदीप चोपड़ा, पिन्डू संघर्ष कमेटी के प्रधान दलजीत सिंह पलसौरा, सरनजीत सिंह, जोगा सिंह, समूह गुरद्वारा कमेटी के महासचिव रघुबीर सिंह रामपुर, रैजीडैंटस वैल्फेयर ऐसोसिऐशन के सतिश कुमार खोसला, एम आर भाटिया, श्रीमति महिन्द्र कौर, किसान ऐकता मंच के सतनाम सिंह टांडा, शास्त्री मार्किट सेक्टर 22 के प्रधान जसविन्द्र सिंह नागपाल, पैंशनर ऐसोसिऐशन के राम सरूप, फैड़रेशन के प्रधान रघबीर चन्द, रजिन्द्र कटोच, हरकेश चन्द, चण्डीगढ़ एसएस फैड़रेशन के रंजीत मिश्रा के इलावा बिजली कर्मचारियों के नेता अमरीक सिंह, सुखविन्द्र सिंह, गुरमीत सिंह, रणजीत सिंह, पान सिंह आदि हाजिर थे।
इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाईज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा व यूटी पावरमैन यूनियन चंडीगढ़ के महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने “सस्ती व अबाधित बिजली देकर भी मुनाफे में चल रहे बिजली विभाग का निजीकरण क्यों ?” विषय पर पेपर प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि हमें मालूम नहीं की भारत सरकार व चण्डीगढ़ प्रशासन देश में सबसे सस्ती व 24 घंटे अबाधित बिजली देकर भी पिछले 5 सालों से 150 करोड़ से 350 करोड़ तक मुनाफा कमा रहे बिजली विभाग को देश में सबसे महँगी बिजली दे रही कोलकाता की एक निजी कम्पनी को बेचने पर क्यों तुली है। उन्होंने कहा कि जब चंडीगढ़ बिजली विभाग का गठन हुआ तब 1 लाख 10 हजार के करीब कनेक्शन थे और 2200 कर्मचारी काम करते थे। आज 2.50 लाख के करीब कनेक्शन हैं और करीब 1000 कर्मचारी है, जिसमें भी करीब 400 ठेका कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में 66 केवी के 14 और 33 केवी के 5 सब स्टेशन तथा 2500 के करीब डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफर है। कनेक्शन दुगुने से भी ज्यादा कर्मचारी आधे से भी कम होने के बावजूद रात दिन काम कर 24 घंटे निर्बाध बिजली दी जा रही है। चण्डीगढ़ में 100 प्रतिशत मीटरिंग सप्लाई है। लाइन लॉस केन्द्र सरकार के मानक 15 प्रतिशत से काफी कम 10 प्रतिशत से भी नीचे हैं। विभाग को अच्छी सेवा के लिए अवार्ड दिये गये हैं। पिछले 5 साल से बिजली की दरें नहीं बढ़ाई गई है, बल्कि इस साल रेट घटाये हैं तथा बिजली की दर 150 युनिट तक 2.50 रूपये तथा अधिकतम 4.50 रूपये है। लेकिन ऐमीनेंट कम्पनी ( जिसे सरकार विभाग को बेच रही है) का 150 यूनिट तक का रेट 7.16 रूपये तथा 300 यूनिट से आगे 8.92 रूपये है।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्देश पर बिजली कानून- 2003 की धज्जियाँ उड़ाकर गैर कानूनी तरीके से बिजली विभाग निजी हाथों में बेचा जा रहा है, वह भी सबसे मंहगी बिजली बेचने वाली निजी कम्पनी को, जो सिर्फ 2 साल पहले अस्तित्व में आई है। यह शक के दायरे में भी है व समझ से बाहर भी है कि 20000-25000 करोड़ की अनुमानित सम्पत्ति सिर्फ 871 करोड़ में बेची जा रही है। बेचने से पहले मशीनरी, बिल्डिंग व जमीन की कीमत तय कर आडिट भी नहीं कराया। निजीकरण के बाद तो ए.जी. का ऑडिट का प्रावधान भी खत्म हो जायेगा। सरकार व प्रशासन निजी कंपनियों को जमीन व बिल्डिंग को 1 रुपये प्रति महीने किराये पर दिया जा रहा है, जो हास्यास्पद भी है। यह भी बड़ी हैरानी की बात है कि इतना बड़ा जनविरोधी फैसला लेने से पहले प्रशासन ने मुख्य हितधारकों विशेषकर कर्मचारियों व उपभोक्ताओं से जरूरी सुझाव व एतराज लेना भी उचित नहीं समझा। अरबों / करोड़ों की प्रोपर्टी को कोड़ियों के भाव निजी घरानों को लुटाया जा रहा है । जिसे बचाना हमारा अधिकार भी है व कर्त्तव्य भी है। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन के इस कदम से जहाँ जनता पर कई गुना मँहगी बिजली का भार पडेगा व बिजली गरीब लोगों की पहुँच से दूर हो जायेगी।
अंत में सर्वसम्मत्ति से निजीकरण के खिलाफ आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने का ऐलान करते हुए 15 फरवरी 2022 को सैक्टर 17 षिवालिक होटल के सामने विषाल धरना देकर प्रषासक को ज्ञापन देने का ऐलान किया गया तथा 22 फरवरी से 72 घंटे की हो रही हड़ताल को समर्थन देने का ऐलान किया गया। यह जानकारी जारी एक विज्ञप्ति में यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने दी।
