कपूरथला हलके का चुनावी दंगल, दांव पर दिग्गजों की साख, चुनावी दंगल फतेह के लिए झोंकी ताकत

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कपूरथला, 6 फरवरी। दशकों बाद  कपूरथला हलके का चुनावी दंगल काफी तीखा होने जा रहा है। कपूरथला से अजेय माने जा जाते राणा गुरजीत सिंह के लिए इस बार चुनाव जीत पाना इतना आसान नहीं होगा। उनका अभी तक अपने बेटे के हलके सुल्तानपुर लोधी की तरफ ज्यादा फोकस है। इसके चलते भाजपा शहरी क्षेत्र में हिदू वोट बैंक को पक्का करने में जुटी है तो बसपा-शिअद ग्रामीण क्षेत्रों में अपने पारंपरिक वोट बैंक की किलेबंदी में लगे है। आम आदमी पार्टी शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में डोर-टू-डोर तेजी से पहुंच करने में लगी है। कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह एवं उनके परिवार की तरफ से कपूरथला हलके से पांच चुनाव लड़े गए है और हर बार उनकी जीत का अंतर पहले से बड़ा होता चला आया है। इस बार चुनावी परस्थितियों काफी बदली हुई नजर आ रही है। राणा गुरजीत सिंह अभी तक कपूरथला के बजाय सुल्तानपुर लोधी से आजाद तौर पर चुनाव लड़ रहे अपने बेटे राणा इंद्रप्रताप सिंह के हलके में सक्रिय है। उनका अधिकांश जोर अपने बेटे के सियासी किले को मजबूत करने में लगा है। इस वजह से राणा गुरजीत सिंह अपने कपूरथला हलके की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहे है। राणा की हलके में सक्रियता के अभाव का भाजपा पूरा लाभ लेने की कोशिश में लगी है।भाजपा के नेता व वर्कर ही नहीं बल्कि आरएसएस का पूरा कैडर समूची हिदू वोट बैंक को भाजपा के प्रत्याशी रणजीत सिंह खोजेवाल के पक्ष में लामबंद करने में लगा है। एक लाख 49 हजार कुल वोटरों में करीब आधे वोटर शहरी क्षेत्र में बसे है। इनमें भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक इस बार इधर-उधर जाने के बजाय भाजपा के पक्ष में जाने की उम्मीद है। इससे पहले भाजपा व अकाली में गुटबाजी का सबसे ज्यादा लाभ राणा गुरजीत सिंह को मिलता रहा है, लेकिन फिलहाल इस बार ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। उधर, शिरोमणि अकाली दल एवं बहुजन समाज पार्टी का अपना फिक्स वोट बैंक भी इस बार एकजुट दिखाई दे रहा है, जिसमें अभी तक सेंध लगाने की संभावना नामात्र दिखाई दे रही है। बसपा उम्मीदवार दविदर सिंह ढपई का पूरा जोर दोनों दलों के पारम्परिक वोट बैंक को पक्का करने में लगा है। हालाकि अकाली दल को कुछ नेता अभी तक खुल कर अपने उम्मीदवार के साथ दिखाई नहीं दिए है।आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार मंजू राणा एवं उनकी टीम डोर टू डोर मुहिम को तरजीह दे रही है। उनकी तरफ से पांच-पांच सदस्यों की शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 20-20 टीमें बनाई गई है। उनकी तरफ से हर घर दस्तक दी जा रही है। इससे पहले आप भी भीतरघात का शिकार होती रही है, लेकिन इस बार आप टीम भी काफी एकजुट दिख रही है। अब देखना होगा कि राणा गुरजीत सिंह को मात देने के लिए किसी दल का कौन सा उम्मीदवार क्या रणनीति अपनाता है या फिर राणा गुरजीत सिंह अपनी जफ्फी के स्टाइल से फिर से सभी को चित करते हुए एक बार फिर अजेय होकर निकलते है। नतीजा बेशक जो भी हो, लेकिन इस बार का चुनावी दंगल कतई किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। अगर कोई अपनी जीत पक्की समझेगा तो यह उसकी बड़ी सियासी गलत अथवा आकलन होगा। इस बार हैरानीजनक व चौकाने वाले नतीजों की संभावना से कोई इंकार नहीं कर सका। राणा गुरजीत सिंह कपूरथला से अभी तक पांच चुनाव जीत चुके हैं। 2002 को कांग्रेस से सियासी सफर शुरू करने वाले राणा गुरजीत सिंह ने 33715 वोट लेकर पूर्व परिवहन मंत्री रघबीर सिंह को हराया। इसके बाद हुए उप चुनाव में राणा की भाभी सुक्खी राणा ने चुनाव लड़ कर जीत हासिल की तथा 2007 में राणा गुरजीत सिंह की पत्नी राणा राजबंस कौर ने 40888 वोट हासिल कर जीत हासिल किया। 2012 में राणा गुरजीत सिंह ने 54221 वोट हासिल कर बडी जीत दर्ज की। 2017 में राणा गुरजीत सिंह ने 56378 वोट हासिल कर अपनी अजय अभियान जारी रखा। अब कांग्रेस ने फिर से राणा को पार्टी की टिकट से नवाजा है और अब राणा परिवार का यह छठा चुनाव होगा जिसे भाजपा उमीदवार रणजीत सिंह खोजेवाल,आप की मंजू राणा व अकाली बसपा के दविदर सिंह ढपई से पार पाना होगा।

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