करनाल, 4 फरवरी। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर हमला दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता का विषय है। ऐसे किसी भी कृत्य की कड़ी निंदा होनी चाहिए और ऐसी प्रवृत्ति को सख्ती से कुचला जाना चाहिए। चुनाव एक वैचारिक संघर्ष है जिसमें हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। सांसद ओवैसी हमले में सुरक्षित बच निकले यह संतोष की बात है, लेकिन हमले के तत्काल बाद उनके द्वारा दिया गया बयान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और समाज को बांटने वाला है। यह बात हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वह असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे जिसमें उन्होंने फायरिंग की घटना के बाद मीडिया को दिए बयान में कहा था कि यह हमला गोडसे की नाजायज औलादों ने किया है। उन्होंने यह भी धमकी दी कि यदि हमले के आरोपियों को सजा न मिली तो पूरे देश में अराजकता फैल जाएगी।
डॉ. चौहान ने पूछा कि गोडसे की नाजायज औलादों और पूरे देश में अराजकता फैलने से ओवैसी का क्या तात्पर्य है? उसी दिन यूपी सरकार के वरिष्ठ मंत्री सिद्धार्थ सिंह पर भी कातिलाना हमला हुआ था, लेकिन उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। डॉ. चौहान ने कहा कि ओवैसी की राजनीति एक विभाजनकारी सोच पर आधारित है जिसे वह अपने तुच्छ राजनीतिक लाभों के लिए अक्सर प्रकट करते रहते हैं। तथ्यों के सामने आने से पूर्व बिना समय गवाएं हमले के लिए गोडसे की विचारधारा को जिम्मेदार ठहराना ओवैसी के राजनीतिक पूर्वाग्रह को प्रदर्शित करता है। हमले के तत्काल बाद बिना किसी ठोस सबूत के ऐसा बयान देना किसी राजनीतिक एजेंडे का भी संकेत देता है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि गिरावट के इस दौर में राजनीति विचारधाराओं की लड़ाई नहीं, बल्कि साम-दाम-दंड-भेद का खेल होकर रह गई है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत पार्टी के कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले किए गए थे। यहां तक कि चुनाव के उपरांत भी भाजपा को वोट देने वाले मतदाताओं एवं पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई और कई लोगों के घर भी जला दिए गए। मीडिया कर्मियों को भी नहीं छोड़ा गया। तो क्या यह मान लिया जाए कि ये हत्याएं और जानलेवा हमले जिन्ना की नाजायज औलादों ने की थीं? देश का एक वर्ग यह नैरेटिव गढ़ने में जुटा है कि हिंसक गतिविधियों के पीछे हिंदू समुदाय का ही हाथ होता है। देश में अगर कुछ है तो वह भगवा आतंकवाद है। यह वही वर्ग है जो देश और दुनिया के विभिन्न स्थानों पर आतंकवादी हमले, सीरियल बम विस्फोट और कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार कर उन्हें राज्य से खदेड़ देने वाले कट्टरपंथी समुदाय का धर्म आज तक पता नहीं लगा पाया है। आतंकी गतिविधियों में लिप्त युवाओं को भटका हुआ नौजवान बताया जाता है। इस समुदाय के लिए उसका मजहब देश के संविधान और कानून से भी ऊपर है। यही समुदाय देश के टुकड़े करने के भी सपने देखता है और संसद हमले में शामिल आतंकी अफजल गुरु का समर्थन करता है। इस खतरनाक सोच के लोग खुद को लिबरल और धर्मनिरपेक्ष कहते हैं।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि नाथूराम गोडसे ने वैचारिक मतभेद के कारण गांधी की हत्या की थी। यह किसी दूसरे समुदाय के खिलाफ किया गया हिंसक कृत्य नहीं था, बल्कि एक हिंदू द्वारा की गई दूसरे हिंदू की हत्या थी। इस कृत्य का समर्थन कतई नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसा कदम उठाने के पीछे के कारणों पर चर्चा के दौरान गोडसे ने कई गंभीर सवाल उठाए थे जिनका उत्तर आज तक नहीं मिल पाया है। गोडसे गलत था लेकिन गांधी कितने सही थे, इस पर भी बहस होनी चाहिए। गोडसे को कोसने वाले उन सवालों से बचना चाहते हैं। यह भी स्पष्ट हो चुका है कि गोडसे हत्या में अकेला नहीं था। सतह पर भले ही गोडसे का चेहरा सामने आया हो, लेकिन इस षड्यंत्र में कई बड़ी हस्तियां शामिल थीं।
डॉ. चौहान ने कहा कि संविधान और कानून की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले असदुद्दीन ओवैसी का अपना अतीत भी कम दागदार नहीं है। आजादी के समय हैदराबाद को पाकिस्तान में मिलाने के लिए उनके पिताजी ने निजाम के साथ मिलकर पुरजोर कोशिश की थी और भारतीय सेना से लड़ने के लिए एक लाख रजाकारों की फौज बनाई थी। ओवैसी की रगों में भी वही खून है। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने यूपी के लोगों को धमकी दी थी कि जब योगी और मोदी चले जाएंगे तो उन्हें कौन बचाएगा।उन्हीं के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि यदि 15 मिनट के लिए पुलिस को हटा दिया जाए तो 15 करोड़ की आबादी वाला समुदाय 100 करोड़ की आबादी वाले समुदाय पर भारी पड़ेगा।
15 मिनट के लिए पुलिस हटाने की बात करने वाले गोडसे को कोस रहे : डॉ. चौहान
