कपूरथला, 3 फरवरी। 1951 में,हिंदु धर्म दान एक्ट पास किया गया था।इस एक्ट के जरिए कांग्रेस ने राज्यों को अधिकार दे दिया कि वो किसी भी मंदिर को सरकार के अधीन कर सकते हैं। इस एक्ट के बनने के बाद से आंध्र प्रदेश सरकार नें लगभग 34,000 मंदिर को अपने अधीन ले लिया था।कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु ने भी मंदिरों को अपने अधीन कर दिया था। इसके बाद शुरू हुआ मंदिरों के चढ़ावे में भ्रष्टाचार का खेल। उदाहरण के लिए तिरुपति बालाजी मंदिर की सालाना कमाई लगभग 3500 करोड़ रुपए है।मंदिर में रोज बैंक से दो गाड़ियां आती हैं और मंदिर को मिले चढ़ावे की रकम को ले जाती हैं। इतना फंड मिलने के बाद भी तिरुपति मंदिर को सिर्फ 7 % फंड वापस मिलता है,रखरखाव के लिए।आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईऐसआर रेड्डी ने तिरुपति की 7 पहाड़ियों में से 5 को सरकार को देने का आदेश दिया था।इन पहाड़ियों पर चर्च का निर्माण किया जाना था।मंदिर को मिलने वाली चढ़ावे की रकम में से 80 % गैर हिंदू कामों के लिए किया जाता है। तमिलनाडु,केरल,कर्नाटक हर राज्य़ में यही हो रहा है। मंदिर से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मस्जिदों और चर्चों के निर्माण में किया जा रहा है। मंदिरों के फंड में भ्रष्टाचार का आलम ये है कि कर्नाटक के 2 लाख मंदिरों में लगभग 50,000 मंदिर रखरखाव के अभाव के कारण बंद हो गए हैं।दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में धार्मिक संस्थानों को सरकारों द्वारा कंट्रोल नहीं किया जाता है, ताकि लोगों की धार्मिक आजादी का हनन न होने पाए।लेकिन भारत में ऐसा हो रहा है। सरकारों ने मंदिरों को अपने कब्जे में इसलिए किया क्योंकि उन्हे पता है कि मंदिरों के चढ़ावे से सरकार को काफी फायदा हो सकता है। लेकिन,सिर्फ मंदिरों को ही कब्जे में लिया जा रहा है। मस्जिदों और चर्च पर सरकार का कंट्रोल नहीं है। इतना ही नहीं, मंदिरों से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल मस्जिद और चर्च के लिए किया जा रहा है। यदि इस सब का कारण ढूँढें तो वह 1951 में के पास किया गया कांग्रेस का बिल है। विश्व हिन्दू परिषद जालंधर विभाग के प्रधान नरेश पंडित ने एक बैठक में कहा कि सरकार द्वारा मंदिरों का सरकारीकरण कर इनका प्रबंधन अपने हाथ में लेना गलत है। उत्तर और दक्षिण भारत सहित देश के अन्य इलाकों में दशकों से मंदिरों का प्रबंधन अपने हाथ में लेकर इन का सरकारीकरण किया जा रहा है। यह सरकार की भेदभावपूर्ण मंशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा,यदि हिन्दू धर्मस्थलों का सरकारीकरण हो रहा है तो मुस्लिमों और ईसाईयों के धर्मस्थलों को भी सरकारी नियंत्रण में कर देना चाहिए।
नरेश पंडित ने कहा कि हिंदू समाज पिछले काफी समय से अपने धर्मस्थलों में सरकारी और राजनीतिक दखल बंद करके हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए हिंदू मंदिर एक्ट की मांग कर रहा है।इसके लिए पंजाब की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के प्रमुख नेताओं से मिलकर इसकी मांग की है परंतु अब तक किसी भी राजनीतिक दल या पार्टी ने अधिकारिक रूप से हिंदू मंदिर एक्ट के पक्ष में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि इस प्राचीन देश में हिन्दू धर्म की रक्षा में और यहां के चिरंतन ऐसे अध्यात्म ज्ञान के प्रसार में मंदिरों की एक अहम भूमिका रही है।मंदिर अनादिकाल से समाज जागरण और अध्यात्म ज्ञान प्रसार के,उपासना के तथा राष्ट्र जागरण के और सामाजिक परिवर्तन के शक्ति केन्द्र रहे हैं। आज भी ऐसे अनेक मंदिरों में करोड़ों भक्त श्रद्धा से दर्शन के लिये जाते हैं और श्रेष्ठ अनुभूतियों का अनुभव करते हैं। विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि पिछले डेढ़ हजार वर्षों से आक्रमण के कालखण्ड में हमारे मंदिर हिन्दू समाज तथा धर्म-संस्कृति व प्रेरणा के,शक्ति और धर्मधारणा के महत्वपूर्ण केन्द्र होने से निरंतर ही आक्रमण और विध्वंस के लक्ष्य रहे हैं। बाद में ब्रिटिशों के कालखण्ड से उस समय के राज्यकर्ताओं ने मंदिरों के लिए विविध कानून लाकर उनकी संपत्ति पर कब्जा करना प्रारंभ कर दिया। दुर्भाग्य से भारत स्वतंत्र होने के बाद भी यह कब्जे की गलत परंपरा मंदिरों के अधिग्रहण के रूप में विविध राज्य सरकारों द्वारा अनवरत अभी भी चल रही है।
नरेश पंडित ने कहा कि हिन्दू मंदिरों के ऊपर केवल हिन्दू समाज का ही स्वामित्व रहना चाहिए।इसलिए अब भारत के संविधान में आवश्यक वह परिवर्तन करते हुए मंदिरों के प्रबंधन में,उनकी सम्पत्ति में,विविध धार्मिक व्यवस्थाओं में सरकारों का किसी भी प्रकार से स्वामित्व या सहभागिता नहीं होनी चाहिए और ऐसे योग्य कानून बनाने की अपेक्षा विश्व हिन्दू परिषद करता है। इस अवसर पर बजरंग दल के जिला प्रधान जीवन प्रकाश वालिया,विश्व हिन्दू परिषद के सीनियर जिला उप प्रधान,मंगत राम भोला,जिला उपप्रधान जोगिन्दर तलवाड़,बजरंग दल प्रदेश कार्यकारणी के सदस्य संजय शर्मा,शहरी उपप्रधान हैप्पी छाबड़ा,जिला उपप्रधान सवामी प्रसाद शर्मा,अखाडा प्रमुख बजरंगी,बजरंग दल के सीनियर नेता राजीव टंडन आदि उपस्थित थे।
