चंडीगढ़, 30 जनवरी। संयुक्त किसान मोर्चा के साथ केन्द्र सरकार के हुए समझौते में बिजली निजीकरण के बहुप्रतीक्षित संशोधन बिल को किसानों व अन्य हिधारकों से बातचीत किए बिना संसद में पेश न करने का फैसला हुआ था लेकिन इसके बावजूद केन्द्र सरकार ने मुनाफे में चल रहे केन्द्र शासित प्रदेशों के बिजली विभाग को पूंजीपतियों के हवाले करने का फैसला लिया है।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ मुख्य कार्यालय सुकोमल सेन भवन, फरीदाबाद के अध्यक्ष सुभाष लाम्बा ने जारी एक बयान में आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र सरकार मुनाफे में चल रहे केन्द्र शासित प्रदेशों जिनमें चण्डीगढ़, दादरा नगर हवेली, दमन दीउप तथा पुडुचेरी के बिजली विभागों को पूंजीपतियों के हाथ बेच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूटी चण्डीगढ़ बिजली विभाग को कोलकाता की एक निजी कम्पनी को 87 करोड़ में बेच दिया है। मजेदार बात यह है कि चण्डीगढ़ बिजली विभाग ने पिछले वर्ष में 257 करोड़ रूपये का मुनाफा कमाकर केन्द्र सरकार को दिया है। चण्डीगढ़ का लाइन लांस देश में सबसे कम 09.02 प्रतिशत है। यहां के बिजली उपभोक्ताओं को बिजली कर्मचारियों व विभाग से कोई शिकायत नहीं है। चण्डीगढ़ में बिजली के रेट हरियाणा व पंजाब से काफी कम है। इसलिए उपभोक्ता बिजली कर्मचारियों के साथ मिलकर बिजली विभाग को निजीकरण से बचाने के संघर्ष में शामिल है।
यूटी चण्डीगढ़ बिजली विभाग के कर्मचारियों ने इस निजीकरण के फैसले के खिलाफ पहली फरवरी को हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। यह हडताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है। देश के बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों की सर्वोच्च कमेटी नैशनल को-आर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलैक्ट्रिसिटी इंप्लाईज एंड इंजीनियर ने इस हड़ताल के साथ एकजुटता प्रकट करने के लिए पहली फरवरी को देशभर में विरोध प्रर्दशन करने का ऐलान किया। ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमैंट इंम्पलाईज फैडरेशन ने भी हड़ताल के समर्थन और निजीकरण के खिलाफ सभी राज्यों में प्रर्दशन करने का फैसला लिया है।
चण्डीगढ़ बिजली निजीकरण के फैसले से पुनः यह साबित हो गया है कि पूंजीवाद अब सब कुछ हड़पना चाहता है और केन्द्र सरकार उसके लिए सब कुछ आसान बनाने के लिए नीतियां बनाने में जुटी हुई हैं। इसलिए इसका लाभार्थियों व कर्मचारियों की एकजुटता के साथ ही मुकाबला किया जा सकता है।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ने केन्द्र सरकार व चण्डीगढ़ प्रशासन को निजीकरण के प्रोसेस को शीघ्र स्थगित करने की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार अपने फैसले को रद्द नहीं करती तो देश भर में सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा जायेगा।
