आयोग विभिन्न पहलों के माध्यम से मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सुशासन के विजन को चरितार्थ करने की दिशा में काम कर रहा

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चंडीगढ़, 5 जनवरी। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग निरंतर यह सुनिश्चित कर रहा है कि प्रदेशभर में आवेदकों को समयबद्ध तरीके से सरकार की कल्याणकारी सेवाएं प्रदान हों। आयोग विभिन्न पहलों के माध्यम से मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सुशासन के विजन को चरितार्थ करने की दिशा में काम कर रहा है। इन पहलों ने अधिक पारदर्शिता लाकर प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उन लोगों के जीवन को आसान बनाया है जो सरकार से कोई सेवा लेते हैं।
हाल ही में, एक आवेदक के शस्त्र लाइसेंस के रिन्यूअल में देरी के एक मामले में डीसीपी पंचकूला मोहित हांडा की कार्यप्रणाली को लेकर आयोग ने नाराजगी जाहिर की और एसएचओ, एमडीसी पंचकूला, वहीदा हामिद और तत्कालीन एसएचओ, एमडीसी पंचकूला सुनील कुमार पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
आयोग की सचिव मीनाक्षी राज ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि आवेदक 2019 से अपने लाइसेंस के रिन्यूअल के लिए पंचकूला पुलिस से संपर्क कर रहा था, जोकि हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत एक अधिसूचित सेवा है। इसके अंतर्गत यदि लाइसेंस की वैधता समाप्त नहीं हुई है तो 15 दिन और यदि लाइसेंस की वैधता समाप्त हो गई है तो 22 दिन की समय सीमा निर्धारित है।
आवेदक के बार-बार अनुरोध को गलत रिपोर्ट के आधार पर स्वीकार नहीं किया गया था और मई, 2021 में फिर से व्यक्तिगत रूप से डीसीपी से मिलने के बाद ही उनके मामले को संबंधित एसएचओ को भेज दिया गया था। इसके बावजूद, अक्टूबर 2021 में मामले को औपचारिक रूप से मंजूरी दी गई थी। डीसीपी पंचकूला उक्त सेवा प्रदान करने के लिए नामित अधिकारी होने के नाते उक्त समय सीमा के अनुसार अधिसूचित सेवाओं के वितरण की निगरानी करने में विफल रहे, इसलिए आयोग ने उन्हें निर्धारित समय सीमा के अनुरूप इस मामले को सुपरवाइज करने के लिए एडवाइजरी जारी की है।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन एसएचओ, एमडीसी सुशील कुमार और एसएचओ वहीदा हामिद ने अपनी रिपोर्ट में देरी की जिसके कारण आगे मामले में देरी हुई, जिसके लिए आयोग ने उन्हें जिम्मेदार ठहराया और उन पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, जो इन अधिकारियों द्वारा आदेश की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर कोष में जमा करवाया जाना है।
हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त टी.सी. गुप्ता ने कहा कि आयोग द्वारा यह देखा जाता है कि प्रत्येक अधिसूचित सेवा समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से आवेदकों को प्रदान की जाती है और जो इसमें विफल रहते हैं, उन्हें आयोग द्वारा जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस वर्ष से देरी के किसी भी मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। यदि नामित अधिकारी या वे अधिकारी जो देरी के लिए जिम्मेदार हैं, वे आयोग को संतुष्ट करने में विफल रहते हैं कि सेवा उनके नियंत्रण से परे कारणों की वजह से समय सीमा के भीतर नहीं दी जा सकती है, ऐसे मामलों में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि आयोग विभिन्न पहलों के माध्यम से हरियाणा के लोगों के जीवन को आसान बनाने और प्रणाली में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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