करनाल, 4 जनवरी। । देश में अब सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर है। हमारी राष्ट्रीय अस्मिता को नकारने वाले लोगों में अब हिंदू दिखने की होड़ मची है। यहां तक कि भारत की पहचान को लेकर भ्रमित रहने वाली और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताने वाली कांग्रेस पार्टी के कर्णधार भी अब सूट के ऊपर जनेऊ लटका कर मंदिर-मंदिर घूमने पर विवश हैं। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने की। वह भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. चौहान ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक अस्मिता को नकारने वाले जो लोग अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्म स्थान पर मंदिर के बजाय शौचालय बनाने के सुझाव दे रहे थे, उनके नेता अब खुद को हिंदू बता रहे हैं। यह बड़ा परिवर्तन देश में आई सांस्कृतिक नवचेतना का संकेत है। यह राष्ट्रवादियों की जीत है। भाजपा प्रवक्ता ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के चरम काल में पार्टी कार्यकर्ताओं ने माथे से कलंक को धोने का काम किया। इस राष्ट्रवादी अभियान की कीमत हमें उत्तर प्रदेश समेत संवैधानिक तरीके से चुनी गई चार राज्यों की सरकारों को खोकर चुकानी पड़ी थी। इसके बाद वर्षों तक सत्ता के सूत्रों से वंचित रहने के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने क्या-क्या सहा और झेला, यह आज इतिहास है। इसी अवधि में राम के विरोधियों और रामद्रोहियों ने देश की सर्वोच्च अदालत में शपथ पत्र देकर भगवान श्रीराम को काल्पनिक पात्र बताया था।
भाजपा प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि जिस राम का नाम लेकर सुबह-सुबह हमारी आंखें खुलती हैं, जन्म से लेकर मृत्यु होने तक जिनका हम नाम लेते रहते हैं, उस राम को यदि हमारे जीवन से निकाल दिया जाए तो कुछ बचेगा ही नहीं। श्रीराम भारतीय जनमानस की धमनियों में रक्त और श्वास नलियों में प्राणवायु बनकर बहते हैं। उस घोर निराशा के दौर से निकलकर आज हम इस स्थिति तक पहुंचे हैं कि इटली वाली ताई का लल्ला और लल्ली जनेऊ-तिलक लगाकर घूमने पर विवश हैं और खुद को दत्तात्रेय गोत्र के हिंदू बता रहे हैं। इस परिवर्तन का श्रेय भाजपा कार्यकर्ताओं के परिश्रम और उसके परिणामस्वरूप आई राष्ट्रीय चेतना को जाता है।
ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने भाजपा कार्यकर्ताओं से उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनाव में एक-एक बूथ की अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम मानकर पहरेदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के सामने चुनौतियां अब भी कम नहीं हुई हैं। इसलिए जनजागरण अभियान निरंतर चलता रहना चाहिए। भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं को सांस्कृतिक नवचेतना का वाहक बनना चाहिए।
देश में अब सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर: डॉ. चौहान
