कपूरथला, 29 दिसंबर। विश्व हिंदू परिषद अपने संगठन को मजबूती प्रदान करने तथा समाज में विहिप के उद्देश्यों को पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे 20 दिवसीय धर्म रक्षा निधि कार्यक्रम के तहत धन संग्रह कार्यक्रम जनवरी की शुरुआत के साथ आरंभ होगा।फिलहाल अलग-अलग प्रखंडों में धर्म रक्षा निधि के पूजन कार्यक्रमों को संपन्न कराने में विहिप की जिला इकाई जोर दे रही है।
बुधवार को विहिप बजरंग दल की जिला इकाई के पदाधिकारियों की एक विशेष बैठक बजरंग दल के जिला प्रधान जीवन प्रकाश वालिया व शहरी प्रधान चन्दन शर्मा के नेतृत्व में हुई।इस बैठक को संबोधित करते हुए विहिप जालंधर विभाग के प्रधान नरेश पंडित ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद संगठन को शक्ति देने के अलावा आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करने के लिए धर्म रक्षा निधि कार्यक्रम को चला रही है। इसका आयोजन दो जनवरी को मंदिर धर्म सभा में किया जायेगा। उन्होंने बताया आगामी रविवार कई प्रखंडों में बड़े स्तर पर पूजन कार्यक्रम के आयोजन होंगे।जिसमें विहिप कार्यकर्ता व विहिप पदाधिकारी मां भारती और प्रभु श्रीराम के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित व पुष्प अर्पित धर्म व संस्कृति का ज्ञान देंगे। भारत माता की आरती कर कार्यक्रम को संपन्न किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि दो जनवरी से पूजन कार्यक्रम की जगह रसीद काटकर धन संग्रह किया जाएगा। जिसमें राम व राष्ट्र भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार अपना सहयोग दे सकते हैं। जीवन वालिया ने कहा कि वर्तमान में देश में हिन्दू समाज विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है और निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए इन चुनौतियों का जवाब देना नितांत आवश्यक है। हमारा सबसे पहला कर्तव्य अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक विरासत को बचाना है। साथ ही साथ धर्म रक्षा करना भी है। उन्होंने बताया कि विश्व हिन्दू परिषद हर साल एक बार धर्म रक्षा निधि समर्पण अभियान का आयोजन करता है, जिसका उद्देश्य परिषद के आयोजन में सीधे तौर पर आम जनता की भागीदारी को सुनिश्चत करना है। इसके तहत संगठन के साथ साथ समाज का भी योगदान लिया जाता है।वालिया ने कहा कि विश्व हिदू परिषद ने मतांतरण पर रोक तथा मतांतरित हिदू भाई-बहनों को अपनी जड़ों से पुन:जोड़ने की दिशा में बड़ा कार्य किया है। उन्होंने बताया कि देश में अभी तक लगभग 62 लाख हिंदुओं के मतांतरण को रोकने के साथ-साथ लगभग 8.5 लाख की घर वापसी भी हुई है। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर का मत था कि यदि देश के संत-महात्मा मिलकर यह घोषित कर दें कि हिन्दू धर्म-शास्त्रों में छुआछूत का कोई स्थान नहीं है तो इस अभिशाप को समाप्त किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 13-14 दिसंबर 1969 के उडुपी धर्म संसद में संघ के तत्कालीन सर-संघचालक श्रीगुरुजी के विशेष प्रयासों के परिणाम स्वरूप,भारत के प्रमुख संतों ने एक स्वर से सामाजिक समरसता का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया था।1994 में काशी में हुई धर्म संसद का निमंत्रण डोम राजा को देने पूज्य संत न सिर्फ स्वयं चलकर गए बल्कि उनके घर का प्रसाद ग्रहण किया।2003 से लगातार देशभर में भगवान वाल्मीकि,संत रविदास तथा संविधान निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर इत्यादि महापुरुषों,जिन्होंने देश की समरसता में योगदान दिया,का जन्मदिवस व्यापक रूप से मनाया जा रहा है।वालिया ने बताया कि हिन्दू सम्मेलनों के जरिये हिन्दू समाज को न सिर्फ राम मंदिर आंदोलन के दौरान संघर्षों के बारे में जानकारी दी जाएगी बल्कि उन्हें यह भी बताया जाएगा कि श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के बाद भी हिदुओं के सामने खड़ी चुनौतियां समाप्त नहीं हुई हैं।धर्मांतरण,गोरक्षा,मठ-मंदिरों की सुरक्षा,लव-जेहाद जैसी समस्या अब भी हिदुओं के सामने खड़ी हैं।इस अवसर राजू सूद,नारयण दास,मंगत राम भोला,दीपक मरवाहा,मोहित जस्सल,राजकुमार अरोड़ा,विजय ग्रोवर,विजय यादव,राजीव टंडन,संजय शर्मा,बजरंगी,सोनू,अनिल वालिया,जोगिंदर तलवाड़,हैप्पी छाबड़ा आदि उपस्थित थे।
