श्री प्रताप धर्म प्रचारणी रामलीला दशहरा कमेटी ने किया सीता हरण हनुमान नाटक का मंचन

कपूरथल, 12 अक्टूबर। सीता हरण करते ही रावण कहता है कि निंसदेह अब तू लंका की पटरानी बनेगी, छल से, कपट से, फरेव से गुलेतर को उडाता हूं, अगर में स्वंयबर में पशीमां होकर लोटा था, लेकिन इस बार अपना भागय अजमाता हू, यह उदगार लंकापति रावण ने श्री प्रताप धर्म प्रचारणी राम लीला दशहरा कमेटी द्वारा बुधवार की सांय को देवी तालाव और रात्रि को शालीमार बाग में मंचित नाटक सीताहरण, हनूमान मिलाप नाटक में उस समय कहे जब लक्ष्मन द्वारा अपना नाक काट देने के बाद रावण की बहन सुर्पनखा बदला लेने के लिए अपने भाई महाराज रावण को उकसा कर बताती है कि वे अपने भाई के लिए सोंर्दय की देवी सीता को लेने के लिए गई थी और राम के छोटे भाई लक्ष्मन ने उसकी नाक काट डाली। इस मंचित नाटक का उदगाटन सीनीयर ऐडवोकेट हरचरन सिंह ने अपने कर कमलों से किया।
इससे पहले रावण की बहन सुर्पनखा अपनी कटी हुई नाक लेकर लंका नरेश के दरबार में जाकर त्राहीमान त्राहीमान कहकर संबोधित करती है। बहन की कटी हुई नाक से बहते खून को देखकर लंका नरेश रावण अपना आपा खो बैठते है और राम,लक्ष्मण से बदला लेने के लिए अपना भेष बदलकर एक ऋषि का रूप धारण कर प्रभु राम की कुटिया में जाकर रावण सीता से भिक्षा मांगता है, लेकिन रावण अपनी दिव्य दृष्टि से देखता है कि सीता की कुटिया के बाहर लक्ष्मण ने रेखा खींच रखी है,जिसको भेदना कठिन है। रावण चुतराई से सीता माता को कुटिया से बाहर आकर भिक्षा देने को कहता है। सीता जैसे ही बाहर कदम रखती है तो लंकापति रावण सीता का हरण कर उसे लंका ले जाता है और अटठास करते हुए कहता है कि निसंदेह अब तूं लंका की पटरानी वनेगी। जैसे ही प्रभु राम और लक्ष्मण कुटिया में आते है तो सीता को वहां न पाकर विचलित हालत में उसकी तलाश करते हुए जंगलों की तरफ जाते है तो उन्हें जटायु सारा व्रतांत बताता है और कहता है कि उसने माता सीता को बचाने के लिए रावण से दो हाथ किए थे। इतनी बात कहते ही जटायु प्राण त्याग देता है। वहीं दूसरे दृश्य में प्रभु राम के अनन्य भक्त हनुमान से प्रभु राम की भेंट होते ही पंडाल में बोल सीयापति राम चंद्र महाराज की जय,बोलो जय बजरंगी बली हनुमान की जयकारे गूंजते है। वहीं पवन पुत्र हनुमान सीता माता की तलाश करते हुए लंका के उस बगीचे में जा पहुंचते है,जहां पर सीता माता एक पेड़ के नीचे बैठी विश्राम कर रही होती है तो हनुमान सीता माता को मिलकर धैर्य देते है और कहते है कि उन्हें पापी रावण से घबराने की कोई जरूरत नहीं है और दृश्य से लीला सपन्न हो जाती है।
इस अवसर पर सभा के अध्यक्ष विनोद कालिया, कृष्ण लाल सराफ, कमलजीत सिंह, बिशंवर दास, रजिंदर वर्मा, सतीश शर्मा, सुरिंदर शर्मा, राजेश सूरी, दबिंदर कालिया, मंगल सिंह, ऐडवोकेट, पवन कालिया, गुलशन लुंबा, अश्वनी सूद, हरबंत सिंह भंडारी, देश बेरी, त्रिलोचन सिंह धिंजन, अशोक बवल, जसबिंदर सिंह, भूपिंदर सिंह, बलजिंदर सिंह, बावा पंडित, किशन दत शर्मा, रघु शर्मा, धर्मपाल तथा दर्जनों कलाकार उपस्थित थे।

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