खरीफ खरीद मौसम 2021-22 से पहले अतिरिक्त क्रय केंद्रों की व्यवस्था करने के मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

चंडीगढ़, 18 सितंबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विपणन सत्र 2021-22 के दौरान खरीफ फसलों की खरीद के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई परेशानी न हो। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अतिरिक्त खरीद केन्द्रों की स्थापना हेतु आवश्यक स्थानों की समय रहते पहचान करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने मंडी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के संबंध में निर्देश देते हुए कहा कि मंडियों में मजदूरों की उपलब्धता की समय पर व्यवस्था करने के साथ ही पर्याप्त संख्या में ड्रॉयर्स, तराजू, बारदाना, सिलाई मशीन आदि उपलब्ध होना भी सुनिश्चित किया जाये।
मुख्यमंत्री आज यहां वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों एवं अन्य संबंधित जिला अधिकारियों के साथ मेरी फसल मेरा ब्योरा के तहत फसलों के सत्यापन, फसलों की खरीद की तैयारी और परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में आय और दिव्यांगों के सत्यापन की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में प्रशासनिक सचिव भी उपस्थित रहे। खरीद मौसम 2021-22 के दौरान खरीफ फसलों की खरीद 25 सितंबर से शुरू होगी
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री को विपणन मौसम 2021-22 के दौरान खरीफ फसलों की खरीद की अवधि के बारे में अवगत कराया गया।
उन्हें बताया गया कि धान की खरीद 25 सितंबर से शुरू होने की संभावना है और यह 15 नवंबर, 2021 तक जारी रहेगी। मक्का, बाजरा और मूंग की खरीद पहली अक्टूबर, 2921 से शुरू होने की संभावना है और यह 15 नवंबर, 2021 तक जारी रहेगी। इसी प्रकार, मूंगफली की खरीद पहली नवंबर से की जाएगी और 31 दिसंबर 2021 तक जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री को यह भी बताया गया कि खरीफ फसलों की खरीद भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि खरीफ फसलों की निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या में मण्डिय़ों की व्यवस्था की गई है, जिसके तहत धान की खरीद के लिए 199, बाजरा की खरीद के लिए 86, मक्का की खरीद के लिए 19, मूंगफली की खरीद के लिए सात और मूंग की खरीद के लिए 38 मंडियां खोली गई हैं।

अतिरिक्त खरीद केंद्रों व्यवस्था सुनिश्चित की जाए:

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की सुविधा और फसलों की परेशानी मुक्त खरीद सुनिश्चित करने के लिए यदि आवश्यकता हो तो मंडियों या खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए।
इसके अतिरिक्त, हर खरीद केंद्र पर बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। सभी संबंधित अधिकारी मार्केट कमेटी के सचिवों और एचएसएएमबी के संबंधित अधिकारियों को उपयुक्त निर्देश जारी करें। इसके अलावा, खरीफ खरीद मौसम 2021-22 के दौरान मंडियों में पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ-साथ खरीद कार्यों की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बीपीएल परिवारों को सरसों के तेल का लंबित भुगतान करने के निर्देश देते हुए श्री मनोहर लाल ने कहा कि इसके लिए विशेष काउंटर खोले जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पात्र परिवार अपने भुगतान के लिए नजदीकी पीडीएस डिपो से भी सम्पर्क कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री को बताया गया कि उनके निर्देशानुसार 72 अतिरिक्त खरीद केन्द्र स्थापित किए गए हैं ताकि किसानों को फसल बेचने में कोई परेशानी न हो और कार्य के लिए सक्षम युवक भी तैनात किए गए हैं।

स्वच्छता अभियान के लिए सेम एवं जल निकासी के प्रबंधन के लिए  समय रहते प्रबंध सुनिश्चित किए जाए:

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आवासीय क्षेत्रों और खेतों में सेम और जल निकासी से सम्बन्धित समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए फोङ्क्षगंग और आस पास के क्षेत्र में स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने निर्देश दिए कि मानसून के दौरान सडक़ों की स्थिति खराब हो जाती है इसलिए सभी सम्बन्धित विभाग 15 दिनों के भीतर खराब सडक़ों की रि-कारपेटिंग से पूर्व खड्डे भरना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को शीघ्र गिरदावरी का कार्य पूरा करने के निर्देश दिये ताकि मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर उपलब्ध सभी डेटासेट से बेमेल डेटा निकाला जा सके। उन्होंने उपायुक्तों को खरीद के दौरान किसानों की सहायता करने और उनकी शिकायतों को हल करने के लिए मंडी स्तर पर टीमों का गठन करने के भी निर्देश दिये।
मनोहर लाल ने कहा कि खरीद के दौरान फसल क्षेत्र के सत्यापन से संबंधित किसानों की शिकायतों को दूर करने के लिए सप्ताह में दो बार जिला शिकायत निवारण समिति (डीजीआरसी) की बैठक बुलाई जाए और डीडीए डीजीआरसी के सदस्य-सचिव के रूप में उपायुक्त की सहायता करें। मनोहर लाल ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि एमपीएमवी के तहत लंबित क्षेत्र को कृषि क्षेत्र के पदाधिकारियों से सत्यापित करवाया जाए ताकि पहली किस्त का भुगतान समय पर किया जा सके।
उन्होंने निर्देश दिये कि सभी फसलों के लिए बेमेल आंकड़ों का सत्यापन 21 सितंबर, 2021 तक पूरा किया जाए और इस तरह के बेमेल आंकड़े गांवों में पंचायत घर आदि जैसे विशिष्ट स्थानों पर चिपकाए जाएं। उन्होंने कहा कि इसके लिए 15 सितम्बर, 2021 को विस्तृत एसओपी जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्य विपणन समितियों के सचिवों और ग्राम सचिवों के माध्यम से किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मंडी स्तर पर सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएं। मंडी स्तर पर बाजरा के स्टॉक की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि विशेष बाजरा पंजीकरण किए जाने के अतिरिक्त अपने डेटा को सही करवाने के इच्छुक बाजरा उत्पादकों की सुविधा के लिए लगभग 700 केन्द्र स्थापित किए जाने चाहिए।
पराली जलाने पर रोक के लिए तुरंत कदम उठाए

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उपायुक्त पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए तत्काल कदम उठाएं। दूसरे चरण में आमंत्रित आवेदनों को ग्राम/ब्लॉक एवं उपमंडल स्तर पर नोडल अधिकारी द्वारा 28 सितम्बर,2021 तक संसाधित किया जाएगा। राज्य के कोने-कोने में मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कटाई कार्यक्रम के लिए प्रयास किए जाएं और इसकी निगरानी ग्राम स्तर के नोडल अधिकारियों द्वारा किए जाने की आवश्यकता है ।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि डीएलईसी द्वारा पहले से अनुमोदित मामलों के लिए 25 सितम्बर, 2021 तक मशीनें खरीदी जाएं, मशीन उपयोग डेटा को दैनिक आधार पर  www.agriharyana.gov.in  पोर्टल पर अपलोड किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि हॉट स्पॉट गांवों यानी रेड और येलो जोन पर कम से कम एक सीएचसी स्थापित करने का प्रयास किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर उपायुक्त कार्यालयों पर नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के साथ ही पराली की गांठों के भंडारण के लिए पंचायत भूमि उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाए। गौ-शाला/उद्योगों तथा अन्य धान फसल अवशेष उपयोग करने वाले उद्योग आदि के साथ तालमेल स्थापित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा फसल अवशेष जलाने के दुष्परिणामों के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए आईईसी गतिविधि और जागरूकता अभियान/शिविरों की शुरुआत की जानी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि रेड और यलो ज़ोन के प्रत्येक गाँव कवर हो। राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजना के बारे में जागरूकता पैदा की जाए और उन्हें बताया जाए कि  www.agriharyana.gov.in  पोर्टल पर पंजीकरण कर गांठें बनाकर फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 1000 रुपये प्रति एकड़ दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, ग्राम स्तरीय/ब्लॉक स्तर/जिला स्तरीय प्रवर्तन दल एवं मोबाइल स्क्वाड का गठन किया जाए।

जिला मिलिंग कमेटी

मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि प्रत्येक जिले के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला मिलिंग कमेटी का गठन किया गया है। एफसीआई सहित खरीद एजेंसियों के जिला प्रमुख और राइस मिलर्स एसोसिएशन द्वारा नामित राइस मिलर्स के दो नामित सदस्य इसके सदस्य हैं और जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक इसके सदस्य सचिव हैं।
बैठक में बताया गया कि खरीद मौसम प्रारंभ होने के पूर्व जिला आवंटन कमेटी द्वारा पात्र चावल मिलों का ऑनलाइन पंजीयन, सूची की जांच, आवंटित राइस मिलों की सूची जारी करना और  आबंटित मिल मालिक द्वारा अनुबंध पर हस्ताक्षर एवं प्रतिभूति जमा करवाना आदि सुनिश्चित किया जायेगा।

परिवार पहचान पत्र डेटाबेस में आय सत्यापन

मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वर्तमान में जिलों में आय सत्यापन के दो चरण चल रहे हैं। लगभग छ: महीने पहले शुरू किए गए पहले चरण में लगभग 92 प्रतिशत परिवारों का सत्यापन पूरा हो चुका है और दूसरे चरण में 28 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है।
उन्हें बताया गया कि दोनों चरणों के कार्य को 30 सितंबर, 2201 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

परिवार पहचान पत्र डेटाबेस में दिव्यांग सत्यापन के लिए विशेष सॉफ्टवेयर

मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि नागरिक संसाधन सूचना विभाग (सीआरआईडी) ने दिव्यांग अम्ब्रेला योजनाओं के तहत लाभ के पात्र दिव्यांग नागरिकों के सत्यापन के लिए एक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल विकसित किया है।
मुख्यमंत्री को बताया गया  कि मॉड्यूल परिवार पहचान पत्र डेटाबेस में व्यक्तियों की दिव्यांग स्थिति के डेटा का सत्यापन करता है। इसमें संबंधित सीएमओ के रिकॉर्ड में उपलब्ध हरियाणा के दिव्यांग निवासियों के डेटा के डिजिटलीकरण (डेटा प्रविष्टि के माध्यम से) के लिए एक सबमॉड्यूल भी हैै।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परिवार उत्थान योजना का सर्वेक्षण तुरन्त किया जाए।  सीएमओ और ऑपरेटरों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। संबंधित अतिरिक्त उपायुक्तों के समन्वय से सीआरआईडी द्वारा ऑपरेटरों को उपलब्ध कराया गया है और यह कार्य 30 सितंबर, 2021 तक पूरा होने की संभावना है।

मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर 7.5 लाख किसान पंजीकृत

मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि एमएसपी पर उपज की बिक्री और सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा (एमएफएमबी) पर पंजीकरण अनिवार्य है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल 31 अगस्त, 2021 को बंद कर दिया गया था और एमएमएफबी पर पंजीकरण की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार 22 जिलों में 46,98,781 एकड़ क्षेत्र के पंजीकरण के साथ कुल 7,50,949 किसान पंजीकृत हैं, जबकि 88,92,329 एकड़ को कृषि योग्य संचयी क्षेत्र के रूप में पंजीकृत किया गया है। इस प्रकार, 22 जिलों में कुल पंजीकरण लगभग 52.82 प्रतिशत है।
बैठक में बताया गया कि खरीफ 2021 में फसलों के लिए पंजीकरण खरीफ 2020 की तुलना में बढ़ गया है और धान में 114 प्रतिशत, मक्का 115 प्रतिशत, मूंग, अरहर, उड़द सहित खरीफ दलहन 214 प्रतिशत, मूंगफली, तिल, अरंडी सहित खरीफ तिलहन 222 प्रतिशत, बागवानी फसलें 319 प्रतिशत और चारा 84 प्रतिशत बढ़ा है। इसी तरह, पिछले वर्ष की तुलना में किसानों की संख्या में मक्का में 116 प्रतिशत, खरीफ दलहन में 201 प्रतिशत, खरीफ तिलहन में 199 प्रतिशत और बागवानी में 222 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि एमएमएफबी पर सभी लंबित शिकायतों का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव श्री विजय वर्धन, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डी.एस. ढेसी, रोजगार विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वी. एस. कुण्डू, बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  पी.के.दास, स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव महावीर सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा,  खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के प्रधान सचिव वनीत गर्ग, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रधान सचिव विजेन्द्र कुमार, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव एवं सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक डॉ. अमित अग्रवाल,  मुख्यमंत्री की उप प्रधान सचिव आशिमा बराड़ और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक हरदीप सिंह भी उपस्थित थे।

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