हरियाणा में अब पानी की चोरी करने वालों पर लगेगी लगाम

चंडीगढ़, 18 सितंबर। हरियाणा में नहरी पानी की चोरी पर लगाम लगाने के लिए रियल टाइम डाटा एक्विजिशन सिस्टम (आरटीडीएएस) की शुरुआत हो गई है। आज हरियाणा निवास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम मनोहर लाल ने इसका लोकार्पण किया। पहले चरण में प्रदेशभर में 90 स्थानों पर आरटीडीएएस को स्थापित किया गया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में जल प्रबंधन के लिए तकनीक बेहद आवश्यक है इसलिए आरटीडीएएस की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि जल को हम पैदा नहीं कर सकते, उसका केवल प्रबंधन किया जा सकता है। अलग-अलग अध्यनों से तस्वीर उभर कर सामने आ रही है कि यदि इसी तरह जल का दोहन होता रहा तो आने वाले 30 से 35 वर्ष के बाद हमारे प्रदेश में मरुस्थल जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है। इसलिए समय रहते जल प्रबंधन अति आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने पिछले वर्ष जल प्रबंधन को लेकर दो वर्षीय योजना बनाई। इसके तहत मेरा पानी-मेरी विरासत योजना को अपनाने वाले किसानों को 7 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन और अन्य जल प्रबंधन योजनाएं भी हरियाणा सरकार चला रही है। जल संकट पूरे प्रदेश में एक समान नहीं है। कहीं जलस्तर बहुत नीचे है तो कहीं पर बहुत ऊपर है। ऐसे में सिंचाई के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली योजना लागू की गई है ताकि दक्षिण हरियाणा के उन खेतों तक भी पानी पहुंच सके जहां पानी की बहुत किल्लत है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि नहर में कितना पानी छोड़ा गया और आखिरी टेल तक कितना पानी पहुंचा, इसे अब आरटीडीएएस के माध्यम से पता लगाया जा सकेगा। कहीं बीच में पानी की चोरी हुई हो तो संबंधित अधिकारी को मैसेज जाएगा कि किस कारण से टेल के आखिरी छोर तक पानी कम हुआ है। आरटीडीएएस के माध्यम से विभाग के पास यह डाटा भी उपलब्ध होगा कि नहरों में कितना पानी उपलब्ध है, कितना होना चाहिए और टेल पर कितना पानी पहुंचना चाहिए और कितना पानी पहुंचा।
इस मौके पर हरियाणा जल संरक्षण अभियान की गुडविल एंबेसडर नियुक्त की गई मनिका श्योकंद, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. अमित अग्रवाल, उपप्रधान सचिव आशिमा बराड़, सिंचाई विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ सतबीर कादियान सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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