चितकारा यूनिवर्सिटी को मिला ए प्लस  नैक एक्रिडिटेशन

चंडीगढ़, 8 सितंबर। चितकारा यूनिवर्सिटी को नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एन.ए.ए.सी.)) ने ए प्लस रेटिंग दी है। इसके साथ ही चितकारा यूनिवर्सिटी देश के उन पांच प्रतिशत हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में शामिल हो गई है जिनको इस तरह की बेहतरीन ग्रेडिंग मिली हैं। यूनिवर्सिटी ने फोर पाइंट स्केल पर  3.26 क्युमुलेटिव  ग्रेड पॉइंट एवरेज (सीजीपीए) हासिल किया है। मूल्यांकन करने वाली टीम ने यूनिवर्सिटी की तीन मुख्य कारणों के लिए तारीफ की है। ये हैं एजुकेशन इनोवेशन एंड रिसर्च के लिए बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर, साफ सुथरा व व्यवस्थित कैंपस, और इंस्टीट्यूट की लोकेशन जो कि पूरी तरह से विकसित अर्बन एरिया में में हैं जहां पर प्लेसमेंट की बहुत ही अच्छी संभावनाएं हैं।
इस उपलब्धि पर चितकारा यूनिवर्सिटी के  चांसलर डॉ अशोक के चितकारा ने कहा, “यह हमारे छात्रों, स्टाफ, व फेकल्टी की कई सालों की मेहतन का नतीजा है जिसके कारण यूनिवर्सिटी को यह  पहचान मिल सकी है। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी की अपनी अच्छी तरह से परिभाषित  रिसर्च प्रमोशन पालिसी है जिसके कारण यूनिवर्सिटी में स्टेट आफ द आर्ट अत्याधुनिक उन्नत सुविधाएं विकसित हो सकी हैं।  क्यूरिन के  पास मल्टी डिसिपिलनरी एडवांस्ड फेसिटिलीज हैं जिसके पास डीएसटी, डीआरडीओ आदि सरकारी एजेंसियों के सहयोग से 37.24 करोड़ की रिसर्च फंडिंग हैं।  रिसर्च व पेटेंट की फाइलिंग के लिए  रिसर्च स्कालर्स व फैकल्टी के लिए सीड मनी को दिया जाता है।
यूनिवर्सिटी की प्रो चांसलर डॉक्टर मधु चितकारा ने सभी हितधारकों के प्रति हार्दिक धन्यवाद देते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी ने स्टैंडराइज्ड प्रोसीसर्ज को अपनाते हुए पाठ्यक्रम को तैयार किया है जिसको नियमित अंतराल के बाद सभी हितधारकों के फीडबैक को लेने के बाद  संशोधित किया जाता है। कोर्सों को तैयार करते समय स्थानीय, क्षेत्रीय व वैश्विक जरूरतों व  रोजगार देने की योग्यता  और उद्यमिता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है।  ब्लेंडेड मोड के जरिए एक्सेस मेंटल , पार्टिसिपेट व प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग यूनिवर्सिटी में प्रैक्टिस में हैं। हमने फ्लेक्सिबल सीबीसीएस सिस्टम को अपनाया है जो कि छात्रों को मल्टीडिसीप्लिनरी एप्रोच के लिए स्वतंत्रता देता है। क्रिटिकल थिंकिंग व प्राब्लम साल्विंग स्किल में उच्चतम स्तर के मूल्यांकन करने के लिए  प्रोग्राम स्पेसिफिक लर्निंग के जरिए  एसेसमेंट प्रोसेस पूरी तरह से परिभाषित हैं।
1994 में स्थापित एन.ए.ए.सी. यूजीएस की एक स्वायत्त संस्था है जो कि हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स का मूल्यांकन करती है और उन्हें एक्रीडिटेशन देती है।  असेसमेंट प्रोसीसर्ज के लिए  एन.ए.ए.सी ने सात मापदंडों को अपनाया है जो कि इस प्रकार हैं क्यूरी कूलर एसपेक्ट्स, टीचिंग लर्निंग एंड एवेल्यूयेशन, रिसर्च इनोवेशन एंड एक्सटेंशन, इनफ्रास्ट्रकचर्स एंड लर्निंग रिसोर्स, स्टूडेंट सपोर्ट एंड प्रोगेशंस, लीडरशिप एंड मैनेजमेंट व इंस्टीट्यूशंस वेल्यूस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज ।
एन.ए.ए.सी से मान्यता प्राप्त संस्थान में पढ़ाई करने से छात्रों को अत्याधुनिक तरीके से सीखने का मौका मिलता है और उन्हें ऐसी डिग्री मिलती है जिसकी वैश्विक स्तर पर मान्यता होती है। उनको तुरंत एक विश्वसनीय संस्थान के छात्र होने की तुरंत पहचान मिलती है  और उन्हें प्लेसमेंट के लिए बेहतरीन मौके हासिल होते हैं क्योंकि इंडस्ट्रीज  हायर ग्रेडिंग इंस्टीट्यूशंस से नौकरियों पर रखने को प्राथमिकता देती हैं। एन.ए.ए.सी द्वारा एक्रीडिटेशन की प्रक्रिया से गुजरने पर यूनिवर्सिटी को अपनी  ताकत, कमजोरियों और अवसरों का पता चलता है। हायर एन.ए.ए.सी ग्रेड यूनिवर्सिटी में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के साथ ही इंटर इंस्टीट्यूशंस इंटरएक्शन को भी बढ़ावा देता है।
यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डाक्टर अर्चना मंत्री का कहना है कि यूनिवर्सिटी स्टूडेंट, फैकल्टी के लिए विदेशी एकेडमिक इंस्टीट्यूशन के साथ मिलकर ग्लोबल बीक की प्रेक्टिसेस को अपनाती  है। इंटरनेशनली फंडेड रिसर्च प्रोजेक्ट्स, इंटरनेशनल कांफ्रेंस व कल्चरल इमर्सन के जरिए पूरे कैंपस में कई तरह के गतिमान संबंधों को स्थापित किया जा चुका है।इस बेस्ट प्रेक्टिस के जरिए 250 ग्लोबल एक्सपर्ट, व 25000 छात्रों को फायदा पहुंच चुका है।
एक्रीडिटेशन एंड क्वालिटी एश्योरेंस सेल के डायरेक्टर  डॉक्टर केके मिश्रा ने कहा कि ”पुरानी योजना में 2017 से पहले संपूर्ण मूल्यांकन पीयर टीम द्वारा किए जाने वाले दौरों पर आधारित था लेकिन मौजूदा प्रक्रिया के तहत 70 प्रतिशत मूल्यांकन अब इंस्टीट्यूशन  और यूनिवर्सिटी  द्वारा प्रदान दिए जाने वाले डेटा पर निर्भर करता है जो कि थर्ड पार्टी द्वारा एवेल्यूटेड किया जाता है जो कि एक्रिडिटेशन को और भी कठिन व मुश्किल कर देता है।

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