बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज का तीन दिवसीय उत्सव सम्पन्न

बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज का तीन दिवसीय उत्सव सम्पन्न
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चंडीगढ़, 13 सितंबर। बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज को समर्पित तीन दिवसीय उत्सव यहां बुधवार को मंदिर के संचालक व 9वीं पुश्त के गद्दीनशीन महंत जय कृष्ण नाथ तथा मंदिर की सह-संचालिका साध्वी सुरिन्द्रा देवी के सानिध्य में संपन्न हो गया। यह आयोजन सेक्टर 36 स्थित प्राचीन गुग्गा माड़ी मंदिर में हर वर्ष की भांति भाद्रपद की द्वादशी, त्रयोदशी व चतुर्दशी को आयोजित किया जाता है।
बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज के तीन दिवसीय इस उत्सव के अंतिम दिन महंत जय कृष्ण नाथ तथा की साध्वी सुरिन्द्रा देवी व अन्य भक्तजनों ने ध्वजारोहण की परम्परा को निभाया जिसके उपरांत बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज की पूजा विधि विधान के साथ की गई।
उत्सव में 9वीं पुश्त गद्दीनशीन महंत जय कृष्ण नाथ ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि भक्त ही एकमात्र ऐसा साधन है जो हृदय से यदि भगवान को याद करे तो परमपिता भी स्वयं को उसके अधीन कर देते हैं। इसलिए भक्ति से भगवान भी भक्त के वश में हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि गुग्गा माडी मंदिर जो वर्षों पुराना है, में जो श्रद्धालु सच्चे भाव से अपनी कोई मनोकामना लेकर आता है वह पूरी होती है। यह आस्था का जीता जागता सबूत है। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में डॉ स्वामी राजेश्वरानंद पुरी ने स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद पद्धति पर चर्चा की और शास्त्रों के अनुसार आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान उन्होंने गौ रक्षा व गौ माता के महत्व पर प्रवचन दिए। उत्सव के दौरान तीन दिन निरन्तर विशाल अटूट भंडारे का आयोजन किया गया।
उत्सव के समापन पर विशेष अतिथि के तौर पर देश के विभिन्न राज्यों से संत महात्माओं ने शिरकत की। जिन्होंने बाबा जाहरवीर गोगा जी महाराज के जीवन पर प्रकाश डाला और प्रवचन दिये।
भजन गायन का प्रारम्भ साध्वी सुरिन्द्रा देवी ने गणेश वंदना तथा जग में साचो तेरो नाम के प्रसिद्ध भजन के साथ किया जिसके बाद भजन गायक राजन शेरगिल ने मधुर भजन गाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने गाए गए भजनों में मुझे रास आ गया है, तेरे दर पर सर झुकाना, हारे का तू है सहारा, गोपाल राधे, मैं हुं दासी, तुम हो राजा गाकर कर उपस्थित श्रद्धालुओं का घंटों समां बांधे रखा और झुमने पर विवश कर दिया। वहीं भजन गायिका रेवा शर्मा ने तारा है सारा जमाना, श्याम हमको भी तारों, क्यों घबराऊँ मैं, मेरा तो श्याम से नाता है, गाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। बबिता वेरका ने लाल मेरी सुन जैसे कई सुंदर भजन गाकर श्रद्धालुओं का समाँ बांधा।

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