नियमित जांच से सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है: डॉ दिव्या अवस्थी

मोहाली, 21 जनवरी। सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है और भारतीय महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है।
जनवरी को सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेस महीने के रूप में मनाए जाने के साथ, फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली की ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी की कंसल्टेंट डॉ दिव्या अवस्थी ने सर्वाइकल कैंसर के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स की कोशिकाओं में होता है जो कि योनि और गर्भाशय के बीच का शुरू होता है। यदि इसका जल्दी निदान प्रभावी ढंग से किया जाता है, तो सर्वाइकल कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामले 35-60 वर्ष के आयु वर्ग में सामने आते हैं।
सवाईकल कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों पर चर्चा करते हुए डॉ दिव्या अवस्थी ने बताया कि एचपीवी संक्रमण, प्रतिरक्षा प्रणाली की कमी, गर्भनिरोधक गोलियों का अत्यधिक उपयोग, धूम्रपान, सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज जैसे कारक सवाईकल कैंसर की संभावना को बढ़ाती है।
डॉ दिव्या इसके रोकथाम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सर्वाइकल कैंसर का लगभग 8-10 वर्षों का एक लंबा प्रारंभिक चरण होता है। सर्वाइकल कैंसर का निदान तीन प्रकार की स्क्रीनिंग विधियों के माध्यम से किया जा सकता है – पैप साइटोलॉजी, साइटोलॉजी और एचपीवी को-टेस्टींग या एचपीवी टेस्टींग। सामान्य होने पर हर 3 साल में पैप स्मीयर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। पैप रिजल्ट पर किसी भी असामान्यता की पुष्टि कोल्पोस्कोपी और सर्वाइकल बायोप्सी द्वारा की जाती है। किशोरावस्था के दौरान लड़कियों को दिए जाने पर एचपीवी वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों को रोकने में मदद कर सकता है।
प्रारंभिक चरण के सर्वाइकल कैंसर का इलाज सर्जरी के माध्यम से किया जाता है और उन्नत चरण की बीमारी का इलाज कीमो-रेडिएशन द्वारा किया जाता है।  निदान और उपचार पर जोर देते हुए, डॉ दिव्या अवस्थी ने कहा, शुरुआती जांच से सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने में मदद मिल सकती है। किशोरावस्था के दौरान टीकाकरण बाद के वर्षों में कैंसर के विकास के जोखिम को कम करता है। महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले परिवर्तनों के बारे में सावधान रहने की जरूरत है और किसी भी लक्षण के मामले में तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

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