पीएम मोदी द्वारा साहिबजादों के बलिदान के दिन को हर वर्ष ‘वीर बाल दिवस’ मनाए जाने के ऐलान का उमेश शारदा ने किया स्वागत

कपूरथला, 10 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब चार साहिबजादों के बलिदान के दिन को हर वर्ष ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की तो  बीजेपी के अन्य नेता खुशी का इजहार करने लगे। पंजाब भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य उमेश शारदा ने प्रधानमंत्री की तरफ से दशमेश पिता के प्रकाश पर्व मौके चार साहिबज़ादे जी की शहादत को समर्पित बाल दिवस के तौर पर हर साल मनाने के ऐलान का ज़ोरदार शब्दो में स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले का जितना भी स्वागत किया जाएं कम है।
उमेश शारदा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सिखों के साथ विशेष लगाव को समुदाय और पवित्र गुरुओं के प्रति उनके व्यक्तिगत श्रद्धा भाव के साथ-साथ सिख समुदाय को सशक्त बनाने के लिए किए गए उनकी सरकार के कार्यों में देखा जा सकता है। उमेश शारदा ने कहा कि जब देश के इतिहास की बात होती है, तो सिखों का इतिहास उससे अलग नहीं हो सकता। स्कूलों में बच्चों को गुरु पुत्रों बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के बलिदान के बारे में बताया जाना चाहिए। सही मायनों में साहिबजादा दिवस बच्चों के लिए बाल दिवस के रूप में होना चाहिए। इससे बच्चों को प्रेरणा मिलेगी। जब हम सिख इतिहास को पढ़ते हैं, तो जिस कालखंड में विदेशी आक्रमणकारियों ने देश पर हमला किया, तब खालसा पंत देश की रक्षा के लिए खड़े हुआ था। खालसा पंत की स्थापना ने यह स्पष्ट संदेश दिया था कि वह धर्म और भारत को बचाने के लिए ही है। गुरु तेग बहादुर ने भी कश्मीर और दिल्ली में हिंदुओं को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था। गुरु पुत्रों की शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है।
उन्होंने कहा कि भारत, भारतीयता, हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के चार-चार पुत्रों ने अपने आपको बलिदान कर दिया। उमेश शारदा ने कहा कि सिख धर्म ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए बहुत बलिदान दिए हैं।जिसमें 26 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह के बेटे जोरावर सिंह और साहेबजादे फतेह सिंह को भी अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी।इन वीर सपूतों के बलिदान दिवस को बाल दिवस के रूप में मनाने के फैसले से साहिबजादों को सच्ची श्रद्धांजलि है। उमेश शारदा ने कहा कि शूरवीरों को उचित सम्मान देना हमारी ज़िम्मेदारी है,हम लोगों का कर्तव्य है,जिसको भाजपा ने पूरा किया है।साहिबजादो के बलिदानों से लोगों को प्रेरणा मिले। इसके लिए सरकार उठाया गया यह उचित कदम है।
उमेश शारदा ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों के बलिदान को हमें कभी नहीं भूलना चाहिए।देश के हर बच्चे को यह जानना जरूरी है कि चार साहिबजादे कौन थे।हम अपने बच्चों को इनकी वीरता की कहानी सुनाएंगे तो हमारा बच्चा इस देश पर आने वाली हर मुसीबत को झेल सकता है।उन्होंने कहा कि चार साहिबजादे की कहानी को स्कूल के पाठ्यक्रम में भी शामिल करना चाहिए,जिससे कि बच्चे इनकी वीरता से वाकिफ हो सकें। उमेश शारदा ने कहा कि जिस कालखंड में विदेशी आक्रमणकारियों ने देश पर हमला किया,तब खालसा पंथ देश की रक्षा के लिए खड़ा हुआ था।खालसा पंथ की स्थापना ने यह स्पष्ट संदेश दिया था कि वह धर्म और भारत को बचाने के लिए ही है।गुरु तेग बहादुर ने भी कश्मीर और दिल्ली में हिंदुओं को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था।सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह के चार साहिबजादों की शहादत को नमन करते हुए।उन्होंने कहा कि इनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है।भारत,भारतीयता,हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए गुरु गोविंद सिंह महाराज के चार पुत्रों ने अपने आपको बलिदान कर दिया। उमेश शारदा ने कहा कि सनातन संस्कृति एवं हिंदू धर्म की रक्षा में गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों का बलिदान हुआ।गुरु गोविंद सिंह जी के चार पुत्र में से दो युद्ध के मैदान में लड़ते लड़ते शहीद हुए और दो को मुगलों ने दीवार में चुन दिया। ऐसे साहिबजादे अजित सिंह,जुझार सिंह,जोरावर सिंह व फतेह सिंह ने केसरिया की रक्षा में हंसते-हंसते अपना बलिदान दिया।

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